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अंधविश्वास ऐसा कि प्रसव के दौरान बिगड़ी महिला की हालत तो झाडफ़ूंक करवाने परिजन लेकर पहुंचे गुड़ी

अंधविश्वासी परिजनों ने तबीयत खराब होता देख उसे गांव में ही किसी सिरहा-गुनिया के पास लेकर पहुंचे। जहां उसका झाड़-फूंक कर इलाज किया जा रहा था।

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Dornapal Pragnent Women

Dornapal Pragnent Women

दोरनापाल.ग्रामीण इलाकों में आज भी कई ऐसे इलाके हैं, जहां अज्ञानता अपनी पांव पसारे हुए है। नागलगुंडा ग्राम पंचायत के कोषागुड़ा ग्राम का जहां एक महिला का घर में प्रसव कराया गया। जिसके बाद मां की तबीयत खराब होना शुरू हो गया। अंधविश्वासी परिजनों ने तबीयत खराब होता देख उसे गांव में ही किसी सिरहा-गुनिया के पास लेकर पहुंचे। जहां उसका झाड़-फूंक कर इलाज किया जा रहा था। एक सप्ताह बीत जाने के बाद जब परिजनों ने महिला की तबीयत ठीक न होता देख जब महिला की जान पर बन आई तब उसे हास्पिटल पहुंचाया।


गंभीर हालत में 108 की मदद से पहुंचाया हास्पिटल
प्रसव पीडि़त महिला की जब जान पर बन आई तो उसे 108 की सहायता से दोरनापाल स्वास्थ्य केंद्र लाया गया। जहां महिला की हालत गंभीर देख दोरनापाल अस्पताल के डाक्टर ने प्रसव पीडि़त महिला को जिला अस्पताल में बेहतर उपचार के लिए रेफर कर दिया। ज्ञात हो कि समय रहते अगर प्रसव पीडि़त महिला को स्वास्थ्य केंद्र पहुंचाया जाता तो महिला को रेफर करने की नौबत नहीं आती।


अंधविश्वास से एक सप्ताह तक करवाया झाड़-फूंक
कोषागुड़ा की 24 वर्षीया मड़कम देवे का एक सप्ताह पहले प्रसव पीड़ा होने पर परिवार के लोग अस्पताल न ले जाकर घर पर ही प्रसव कराया गया। प्रसव के बाद उसकी हालत खराब हो गई और साथ ही दस्त शुरू हो गया। एक सप्ताह तक झाड़-फूंक के बाद उसकी हालत और खराब होने लगी तो परिवार के लोग 108 को फोन कर बुलाए और उसे दोरनापाल स्वास्थ्य केंद्र ले गए जहां हालत गंभीर होने पर जिला अस्पताल रेफर कर दिया गया।


अस्पताल के इलाज से ज्यादा करते हैं भरोसा
ज्ञात हो आज के इस युग में भी ग्रामीण इलाकों में अज्ञानता व अंधविश्वास पैर पसारे बैठा हुआ है। अंधविश्वास के कारण झाडफ़ूंक पर ग्रामीण हास्पिटल के इलाज से भी ज्यादा भरोसा करते हैं। एक सप्ताह बीत जाने के बाद जब परिजनों ने महिला की तबीयत ठीक न होता देख जब महिला की जान पर बन आई तब उसे हास्पिटल पहुंचाया।