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Sultanpur : अभिमन्यु बने बाहुबली यशभद्र सिंह का पोस्टर वायरल, कौरवों के रूप में दिख रहे भाजपाई

त्रिस्तरीय पंचायत चुनाव खत्म होने के बाद अब सुलतानपुर में Jila Panchayat Adhyaksh पद के लिए जोड़-तोड़ शुरू हो गई है

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राम सुमिरन मिश्र
पत्रिका न्यूज नेटवर्क
सुलतानपुर. जनपद के इसौली विधानसभा क्षेत्र के पूर्व विधायक रहे बाहुबली चन्द्रभद्र सिंह उर्फ सोनू एवं उनके अनुज पूर्व ब्लॉक प्रमुख यशभद्र सिंह मोनू का सोशल मीडिया पर एक पोस्ट वायरल हो रहा है। वायरल पोस्टर में बाहुबली पूर्व ब्लॉक प्रमुख यशभद्र सिंह मोनू को अभिमन्यु की भूमिका में दर्शाया गया है और कौरवों के रूप में भाजपा जिलाध्यक्ष डॉक्टर आर.ए वर्मा, सुलतानपुर विधायक सूर्यभान सिंह, कादीपुर विधायक राजेश गौतम के साथ युद्ध चित्रण के साथ भाजपा नेता शिव कुमार सिंह और पूर्व मंत्री विनोद सिंह भी पोस्टर युद्ध में शामिल दर्शाए गए हैं। अभिमन्यु के चरित्र में दिखाए गए पूर्व ब्लॉक प्रमुख मोनू सिंह के हाथ में रथ का पहिया दिखाया गया है, जो कौरव रूपी भाजपा नेता से घिरे हैं और उनसे युद्ध कर रहे हैं। पोस्टर वायरल होने के बाद पुलिस विभाग के सोशल मीडिया सेल ने मामले की जांच पड़ताल शुरू कर दी है। हालांकि, खबर लिखे जाने तक एसपी या किसी वरिष्ठ अधिकारी का कोई अधिकृत बयान नहीं आया है।

त्रिस्तरीय पंचायत चुनाव खत्म होने के बाद अब जिला पंचायत अध्यक्ष पद (Jila Panchayat Adhyaksh) के लिए जोड़-तोड़ शुरू हो गई है। बताया जा रहा है़ कि यशभद्र सिंह मोनू की बहन अर्चना सिंह जिला पंचायत अध्यक्ष पद की प्रबल दावेदार हैं। मोनू उन्हीं के चुनाव मैनेजमेंट में निकले थे। करीब हप्ते भर पहले पुलिस ने मोनू सिंह और उनके 11 समर्थकों को रात भर कोतवाली नगर में ही बैठाए रखा गया। इस बीच कई जगह से फोन भी आए, पुलिस भी दबाव में थी, लेकिन वो छूट नहीं सके। उनके और समर्थकों के खिलाफ 4 केस दर्ज किया गया था। सभी आरोपियों को कोर्ट में पेश किया था, जिसमें से सिर्फ दो लोगों की जमानत नहीं हो सकी थी। बाकी सभी आरोपियों की जमानत याचिका स्वीकार कर जमानत मिल गई थी। बाहुबली मोनू सिंह को शांतिभंग की धाराओं में चालान किया गया था। जिससे उनकी जमानत होने में कोई परेशानी नहीं हुई। मोनू सिंह की जमानत होने के बाद पुलिस कर्मियों पर नाराज कप्तान ने कोतवाली प्रभारी समेत तीन पुलिस कर्मियों को लाइन हाजिर कर दिया था।

अर्चना सिंह जिला पंचायत अध्यक्ष पद की प्रबल दावेदार
अर्चना सिंह वार्ड नंबर 24 से जिला पंचायत सदस्य का चुनाव जीती है़ं। महिला सीट होने के नाते उन्हें जिला पंचायत अध्यक्ष का प्रबल दावेदार माना जा रहा है़। अंदरखाने में चर्चा तो यहां तक है कि समाजवादी पार्टी के सिंबल पर वो चुनाव लड़ सकती हैं। सत्ताधारी दल किसी भी कीमत पर भद्र परिवार में जिला पंचायत अध्यक्ष का पद जाने नहीं देना चाहता। यशभद्र सिंह और उनके समर्थकों के खिलाफ हुई कार्रवाई को इसी नजरिए से जोड़कर देखा जा रहा है।

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बाहुबली का भाई मेनका गांधी के सामने लड़ा था चुनाव
5 वर्ष पूर्व जिला पंचायत अध्यक्ष पद के लिए हुए चुनाव में यशभद्र सिंह मोनू भी मैदान में थे। उस समय मोनू के भाई पूर्व विधायक चंद्रभद्र सिंह सोनू भाजपा में थे। इसलिए भाजपा ने मोनू को समर्थन दिया था। समाजवादी पार्टी ने तत्कलीन जिला पंचायत अध्यक्ष ऊषा सिंह को टिकट दिया था। वो जीत भी गईं और तब से मोनू बनाम ऊषा राजनैतिक नूराकुश्ती पूरे पांच साल चली। आरोपी यशभद्र के भाई चंद्रभद्र सिंह ने लोकसभा चुनाव में पूर्व मंत्री मेनका गांधी के सामने चुनाव लड़ा था।

भाजपा के लिए पंचायत अध्यक्ष की कुर्सी आसान नहीं
साल 2019 में लोकसभा का चुनाव आया तो पूर्व विधायक चंद्रभद्र सिंह सोनू BSP के टिकट पर मेनका गांधी के विरुद्ध मैदान में आ गए। उन्होंने सारी ताकत झोंक दी। अंत में 14 हजार के अंतर से चंद्रभद्र सिंह चुनाव हार गए। अब जब जिला पंचायत अध्यक्ष का चुनाव होना है। भाजपा से ऊषा सिंह के प्रत्याशी बनाए जाने की संभावना है़। लेकिन दिक्कत इस बात की है कि 45 जिला पंचायत सदस्यों वाले चुनाव में भाजपा के अपने 3 जिला पंचायत सदस्य जीते हैं, उसे 20 वोट और चाहिए। जिसे कवर करना आसान नही हैं। चर्चा है कि ऐसे में सबसे बड़ा रोड़ा मोनू सिंह थे, जिन्हें साइड लगाने की कोशिश की जा रही है।

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