5 अप्रैल 2026,

रविवार

Patrika Logo
Switch to English
home_icon

मेरी खबर

video_icon

शॉर्ट्स

epaper_icon

ई-पेपर

51 हजार दीपों से जगमग होगा प्रसिद्ध बिजेठुआ महाबीरन धाम

13 नवम्बर को हनुमान जन्मोत्सव पर बिजेथुआ महावीर धाम के मंदिर प्रांगण को दुल्हन की तरह सजाया जाएगा। पिछली बार की तरह इस बार भी मकरी कुण्ड सरोवर की आरती और 51 हजार दीपों की जगमग रोशनी से सरोवर रौशन होगा।

2 min read
Google source verification
51 हजार दीपों से जगमग होगा प्रसिद्ध बिजेठुआ महाबीरन धाम

51 हजार दीपों से जगमग होगा प्रसिद्ध बिजेठुआ महाबीरन धाम

सुल्तानपुर. जनपद मुख्यालय से 48 किलोमीटर पूरब लखनऊ बलिया राजमार्ग संख्या 36 के किनारे स्थित सूरापुर कस्बे से दो किलोमीटर दक्षिण बिजेथुआ महावीरन सुप्रसिद्ध ऐतिहासिक व पौराणिक धर्म स्थली है। पौराणिक स्थल विजेथुआ महाबीर धाम में कार्तिक मास के कृष्ण पक्ष की चतुर्दशी को मेष लग्न में हनुमान जन्मोत्सव पारम्परिक वैदिक रीति रिवाज से मनाया जाता है। कार्यक्रम के आयोजक सर्वेश मिश्र ने बताया कि 13 नवम्बर को हनुमान जन्मोत्सव पर बिजेथुआ महावीर धाम के मंदिर प्रांगण को दुल्हन की तरह सजाया जाएगा। पिछली बार की तरह इस बार भी मकरी कुण्ड सरोवर की आरती और 51 हजार दीपों की जगमग रोशनी से सरोवर रौशन होगा। मकरी कुंड में 51000 दीपोत्सव के साथ ,काशी की तर्ज़ पर गंगा जी की आरती, हनुमान जी की आरती व शिव जी की आरती होगी।

मंदिर का है अपना महत्व

रामायण में इस स्थान की अपनी कथा है। इस जगह भगवान हनुमान जब लक्ष्मण के लिए संजीवनी लाने जा रहे थे तो उन्होंने दैत्य कालनेमि को मारा और विश्राम किया था। भगवान हनुमान ने मकर कुंड में स्नान भी किया जो बिजेथुआ मंदिर के किनारे पर स्थित है। रावण ने भगवान राम के कार्य में बाधा डालने के लिए कालनेमि नाम के दैत्य को नियुक्त किया था। कुंड में स्नान करते समय एक मकरी ने हनुमान जी से कहा की कालनेमि संत नहीं अपितु दैत्य है। भक्त जन अपनी मनोकामना की सिद्धि के लिए यहां पर घंटियां चढाते हैं। बिजेथुआ महावीरन जिला मुख्यालय से लगभग 50 किमी दूर कादीपुर तहसील में स्थित है और सड़क मार्ग बस और निजी टैक्सी द्वारा यहां पहुंचा जा सकता है।

ये भी पढ़ें: रेलवे के लिए मुसीबत बन रहे छुट्टा जानवर, रेलवे ट्रैक पर मवेशियों के कारण प्रभावित हो रहा ट्रेनों का संचालन

ये भी पढ़ें: पानी की टंकी पर लगेगा ताला, यूपी सरकार ने कहा सीढ़ीयों पर लगा दें ताला ताकि न कर पाए कोई प्रदर्शन