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“स्कूल नहीं जाऊंगी पैर दबवाती हैं वार्डेन”, छात्रों ने लगाया गंभीर आरोप

कस्तूरबा गांधी आवासीय बालिका विद्यालय लम्भुआ की सारी व्यवस्था इस कदर बेपटरी है कि यहां पढ़ने के लिये बच्चियां जाना नहीं चाहती हैं।

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"स्कूल नहीं जाऊंगी पैर दबवाती हैं वार्डेन", छात्रों ने लगाया गंभीर आरोप

सुलतानपुर. कस्तूरबा गांधी आवासीय बालिका विद्यालय लम्भुआ की सारी व्यवस्था इस कदर बेपटरी है कि यहां पढ़ने के लिये बच्चियां जाना नहीं चाहती हैं। कारण यहां व्याप्त भ्रष्टाचार है। कस्तूरबा गांधी आवासीय बालिका विद्यालय लम्भुआ में तैनात वार्डेन और अन्य स्टाफ पर गम्भीर आरोप यह है कि यहां शिक्षा ग्रहण कर रहीं छात्राओं से स्कूल मे वार्डन सिर और पैर दबवाती हैं। इतना ही नहीं बच्चियों से झूठे बर्तन और कपड़े भी धुलवाये जाते हैं। मना करने पर उन्हें तरह-तरह की यातनायें भी दी जाती हैं। उन्हें दण्ड के तौर पर एक टाइम भोजन भी नहीं दिया जाता है। छात्राओं के लिये आयी सामग्री को खुले तौर पर बाजार में बेचने का आरोप वार्डन पर है। वार्डेन के सहयोग के तौर पर वहां का एक कर्मी भी शामिल है।

शिकायतों के बावजूद बीएसए कौस्तुभ कुमार सिंह और डीसी बालिका शिक्षा ओपी तिवारी जांच के नाम पर कोरम पूरा करते हैं। इतना ही नहीं है यहां की वार्डन अभिभावकों को खुलेआम धमकाती है और कहती है कि शिकायतों से कुछ होने वाला नहीं है। यहां उल्लेखनीय बात यह है कि सर्व शिक्षा अभियान के अन्तर्गत संचालित कस्तूरबा गांधी आवासीय बालिका विद्यालय में अनसूचित जाति, अनुसूचित जनजाति के गरीब व असहाय वर्ग के लोगों की बेटियों के पढ़ने का प्रावधान है। जिले के लम्भुआ तहसील स्थित केजीवीवी में इस समय 100 की संख्या में छात्रायें पंजीकृत हैं। जिनमें ज्यादातर छात्राएं विद्यालय जाना पसंद नहीं करती। एक छात्रा ने अपना नाम गुप्त रखने की शर्त पर बताया कि प्रभारी वार्डन अखिलेश कुमारी छात्राओं से सुबह और शाम हाथ और पैर दबवाती हैं। वार्डेन के द्वारा छात्राओं को अनुसूचित जाति और गरीबी का ताना दिया जाता है। कपड़े धुलने और बर्तन मांजने का जिम्मा छात्राओं पर है। विद्यालय में रसोईयां के तौर पर रंजीत भारती ललित और उमेश की तैनाती है, फिर भी बच्चियों से रसोई का काम और झाड़ू लगाया जाता है। वार्डन की जूठी थाली भी साफ कराई जाती है। अगर छात्राओं द्वारा काम करने से मना किया जाता है तो उन्हें शारीरिक दण्ड देकर प्रताड़ित किया जाता है। आरोप यह भी है कि वहां पर तैनात एक अन्य शिक्षक के जरिये बच्चियों के लिये आने वाले साबुन तेल और खाद्य सामग्री को बाजारों में बेच दिया जाता है। उनसे मिलने वाले पैसे को बेसिक शिक्षा के एसएसए कार्यालय तक पहुंचाया जाता है और कुछ सामग्रियों को वार्डन के घर भेज दी जाती है।


शिकायतों की जांच एक हफ्ते में करने का था निर्देश

कस्तूरबा गांधी आवासीय बालिका विद्यालय लम्भुआ में व्याप्त भ्रष्टाचार और छात्राओं के हो रहे शोषण की शिकायत चमार महासभा के प्रदेश अध्यक्ष विजय कुमार गौतम ने जिलाधिकारी से की थी । यूँकि शिकायत का संज्ञान लेते हुए डीएम विवेक ने बीएसए से एक सप्ताह में जांच कर रिपोर्ट देने का आदेश दिया था , लेकिन बीएसए ने अभी तक इस गम्भीर शिकायत की जांच शुरू ही नहीं की है ।