
पत्रिका न्यूज नेटवर्क
सुलतानपुर. बाजारों में दूध, मावा और पनीर के अलावा कई मसालों की मिलावट की खबरें आपने सुनी होंगी, पर क्या आपने कभी जीरे में मिलावट की खबरें सुनी हैं। ये खबर सौ फीसदी सच है कि मार्केट में नकली जीरा धड़ल्ले बेचा जा रहा है। उस नकली जीरे की पहचान कर पाना बहुत कठिन होता है। उसे आप गौर से देखने पर भी नकली होने का संदेह नहीं कर पाएंगे। बाजार में उपलब्ध नकली जीरे के खाने में प्रयोग से शरीर पर कई साइड इफेक्ट्स होता है। सुलतानपुर जिला अस्पताल में तैनात इमरजेंसी मेडिकल अफसर डॉ. दीपक मिश्र की मानें तो नकली जीरे के प्रयोग से कैंसर होने का खतरा सौ फीसदी तक बढ़ जाता है।
थाली को खुशबू से लबरेज करने वाले जीरे के नकली माल के कारोबार के तार सुलतानपुर ही नहीं, बल्कि उत्तर प्रदेश से लेकर दिल्ली, गुजरात व राजस्थान तक फैले हुए हैं। नाम न लिखने की शर्त पर नकली जीरे के एक कारोबारी ने बताया कि 80 फीसद नकली जीरे को 20 फीसद असली जीरे में मिलाया जाता है। यह सामान उत्तर प्रदेश और राजस्थान से मंगाया जाता है। रंग और गंध भी मिलाया जाता है, इसलिए आसानी से नकली जीरा पहचान में नहीं आता है।
ऐसे तैयार होता है नकली जीरा
नकली जीरा जंगली घास, गुड़ और पत्थर के पाउडर से तैयार किया जाता है। जंगली घास (झाऊ) नदियों के किनारे उगती है, इसमें जीरे के आकार की छोटी-छोटी पत्तियां चिपकी होती है। इस घास को फूल झाड़ू में भी इस्तेमाल किया जाता है। उत्तर प्रदेश में यह घास 5 रुपये किलो में मिल जाती है। वहां से इसे फैक्ट्री तक लाया जाता है। इसे झाड़ा जाता है, इससे जीरे के आकार की पत्तियां झड़ जाती हैं। फिर गुड़ को गर्म कर उसका शीरा बना लिया जाता है। उसमें वहीं दाने डाल दिए जाते हैं। जीरे जैसा रंग आ जाए इसके लिए पत्थरों का पाउडर मिलाया जाता है। खास बात यह कि सामान्य जीरे की तरह इसमें किसी तरह की खुशबू नहीं होती, इसलिए इसमें जीरे के गंध वाली केमिकल मिलाकर फिर असली जीरे में मिला दिया जाता है।
नकली जीरा बन सकता है कैंसर का कारण
जिला अस्पताल में तैनात इमरजेंसी मेडिकल अफसर डॉ दीपक मिश्र कहते हैं कि जो लोग नकली जीरा बनाकर बाजारों में नकली जीरे का कारोबार कर रहे हैं, वह आम लोगों की सेहत से खिलवाड़ है। डॉ. मिश्र ने कहाकि नकली जीरा खाने से कैंसर होने का खतरा बढ़ जाता है। ऐसे में यदि आपकी रसोई तक नकली जीरा पहुंच रहा है, तो आपको जीरे को लेकर थोड़ा सतर्क रहने की जरूरत है, ताकि आपकी सेहत पर इसका नकारात्मक प्रभाव न पड़े।
बहुत आसान है नकली जीरे की पहचान करना
सुलतानपुर के चौक घण्टाघर में किराने के थोक व्यापारी मदनलाल ने बताया कि नकली जीरे की पहचान करना बहुत आसान है। नकली जीरा पानी में डालते ही रंग छोड़ने लगता है। इसके साथ ही यह गलने भी लगता है। और यह पानी की सतह पर आकर उतराने लगता है।
चोखा है नकली जीरे का कारोबार
मदनलाल कहते हैं कि नकली जीरे का कारोबार चोखा है। मसालों के थोक बाजार में जीरे का भाव करीब 200 रुपये से 250 सौ रुपये किलो के बीच है, लेकिन नकली जीरा महज 100 रुपये में उपलब्ध है।
Report- राम सुमिरन मिश्र
Published on:
22 Mar 2021 08:18 pm
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