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बोले वरुण गांधी-जनप्रतिनिधियों को एक-एक पाई का हिसाब जनता को देना चाहिए

कहा- देश में अमीरी-गरीबी की खाई बहुत बड़ी है।  

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सुल्तानपुर. बीजेपी सांसद वरुण गांधी शनिवार को अपने संसदीय क्षेत्र सुल्तानपुर में थे। उन्होंने कहा कि मुझे जितना आज मिला है, उसका लाभ दूसरो को कितना मिल रहा है। यह सवाल बार-बार उनके मन में उठता है। उन्होंने कहा कि मैं सोचता हूं कि मैं रहूं या न रहूं, मगर इतना कर जाऊं कि जो लोग याद रखें और उसका जनता को लाभ मिले।

बीजेपी सांसद वरुण गांधी शनिवार को यहां जिला अस्पातला की न्यू इमरजेंसी विंग में जीवनरक्षक उपकरणों का लोकापर्ण करने आए थे। लोकार्पण के बाद सभा को संबोधित कर रहे थे। उन्होंने कहा कि हुए उन्होंने कहा कि वे शनिवार को जिला अस्पताल की न्यू इमरजेंसी विंग में जीवनरक्षक उपकरणों का लोकार्पण करने आए थे। न्यू इमरजेंसी के लिए अत्याधुनिक चिकित्सा उपकरण सांसद निधि से करीब डेढ़ करोड़ रुपए देकर उपलब्ध कराएं हैं। उन्होंने यहां एक सभा को संबोधित करते हुए कहा कि देश में अमीरी-गरीबी की खाई बहुत बड़ी है।

यह पैसा उनका नहीं बल्कि देश की जनता का है

बीजेपी सांसद ने कहा कि सुल्तानपुर के 16 लाख लोगों ने उन्हें जो जिम्मेदारी दी है। उसे वे बखूबी निवर्हन करने की जरूरत महसूस करते हैं। उन्होंने कहा कि जनप्रतिनिधियों को एक-एक पाई का हिसाब अपनी जनता को देना चाहिए। यह पैसा उनका नहीं बल्कि देश की जनता का है। हैंडपंड व सोलर लाइट से सस्ती लोकप्रियता कमाई जा सकती है, लेकिन उन्हें देश के भावी पीढ़ी की चिंता है। उन्होंने ने अपने क्षेत्र की जनता को भरोसा दिलाते हुए कहा कि वे शिक्षा व स्वास्थ्य सेवाओं के क्षेत्र में 90 फीसदी पैसा खर्च करेंगे।

...तो आप इंसान नहीं है
वरुण गांधी ने कहा कि प्रदेश में सभी जिला अस्पतालों की हालत एक जैसी है। अगर उसकी दशा देखकर आपके आंखमें आंसू नहीं आए तो आप इंसान नहीं है। दशा यह है कि एक बेड पर दो-दो प्रसूताओं की डिलिवरी कराई जाती है। एम्स में जाने वाले अधिकतर मरीज बेड न मिलने के कारण वापस कर दिए जाते हैं।

तो उस देश का भविष्य खतरे में है
वरुण गांधी ने कहा कि इस देश में भारतीय प्रशासनिक सेवा (आईएएस), भारतीय पुलिस सर्विस (आईपीएस) हो सकती है तो इंडियन मेडिकल सर्विस व इंडियन एजुकेशन सर्विस क्यों नहीं। जिस देश की फीसदी जीडीपी स्वास्थ्य पर खर्च होती हो तो उस देश का भविष्य खतरे में है। उन्होंने कहा कि उनका मानना है कि देश की 10 फीसदी जीडीपी शिक्षा व 10 फीसदी स्वास्थ्य पर खर्च की जानी चाहिए।

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