10 अप्रैल 2026,

शुक्रवार

Patrika Logo
Switch to English
home_icon

मेरी खबर

video_icon

शॉर्ट्स

epaper_icon

ई-पेपर

सुलतानपुर में गांधी जी को देखने-सुनने उमड़ी थी हजारों की भीड़

मैं सुलतानपुर हूं, मेरे आंचल को छूती हुई आदि गंगा गोमती अविरल बहती हुई गंगा सागर तक सफर करती है...

2 min read
Google source verification
sultanpur

सुलतानपुर में गांधी जी को देखने-सुनने उमड़ी थी हजारों की भीड़


सुलतानपुर. मैं सुलतापुनर हूं। मेरे आंचल को छूती हुई आदि गंगा गोमती अविरल बहती हुई गंगा सागर तक सफर करती है। मेरे आंचल में वह पवित्र सीताकुंड घाट है, जहां माता सीता ने वन जाते समय स्नान-ध्यान किया था। मैं वह सौभाग्यशाली सुलतानपुर हूं, जहां की धरती पर सहस्त्राब्दी के सबसे बड़े सन्त महात्मा गांधी के चरण पड़े थे। जी हां! सुलतानपुर वह सौभाग्यशाली शहर है, जहां महात्मा गांधी के चरण पड़े थे। बात नवम्बर 1929 की है, जब स्वराज आंदोलन की अलख जगाने गांधी जी कस्तूरबा गांधी के साथ यहां आए थे। इस दौरान वह सीताकुंड पर स्थित बाबू गनपत सहाय की कोठी में रात्रि विश्राम के लिए रुके हुए थे। अगले दिन सुबह रेलवे स्टेशन के बगल स्थित सेठ जगराम दास धर्मशाला में एक सभा आयोजित की गई थी। उस दिन महात्मा गांधी को देखने-सुनने हजारों लोगों की भीड़ जुटी थी। गांधी जी ने जब लोगों से फिरंगी हुकूमत के खिलाफ एक जुट होकर आंदोलन करने का आह्वान किया तो जिले के सेठ-साहूकारों ने भामाशाह बनकर अपनी पोटली का मुंह खोलकर खुले दिल से चंदा दिया।

देखा जाये तो गांधी जी के उस दौर के प्रत्यक्षदर्शी भी नहीं रहे, लेकिन आज भी वह दास्तान, लोगों का वह जज्बा जन-जन के बीच प्रचलित है और चर्चा का विषय है। इसका प्रमाण तो उस समय प्रकाशित पत्रिका 'जन भारती' के मार्च 1995 के रजत जयंती अंक में 'राष्ट्रीय आंदोलन में सुल्तानपुर का योगदान' शीर्षक से प्रकाशित डॉ. शैलेंद्र श्रीवास्तव के आलेख में भी इसका जिक्र मिलता है। उन्होंने उस पत्रिका के पृष्ठ संख्या -23 पर लिखा है कि वयोवृद्ध वकील बाबू रामकुमार लाल (अब दिवंगत) के अनुसार, महात्मा गांधी और कस्तूरबा गांधी जब सुल्तानपुर आये तो उन्हें देखने-सुनने के लिए हजारों की भीड़ इकट्ठा हो गई थी और हजारों की संख्या में छात्र भी आये हुए थे। गांधी जी बाबू गनपत सहाय की सीताकुंड स्थित कोठी 'केशकुटीर' में ठहरे थे। गांधी जी ने रेलवे स्टेशन के समीप जगराम दास धर्मशाला में सभा की और जिले में आंदोलन जारी रखने का निर्देश दिया था।

स्वतंत्रता आंदोलन में गांधी जी के साथ कूद पड़े थे राष्ट्रभक्त
गांधी जी की इस सभा में जिले में जंग-ए-आजादी के अग्रणी सेनानी ठाकुर, राम नरायन, बाबू संगमलाल, राम हरख सिंह, अनन्त बहादुर सिंह, भगौती प्रसाद, चन्द्रबलि पाठक, उमादत्त शर्मा, हरिहर सिंह भी शामिल थे। वयोवृद्ध इतिहासकार बाबू राजेश्वर सिंह ने भी अपनी किताब 'सुल्तानपुर का इतिहास' में भी इसको तस्दीक़ करते हैं। वे बताते हैं कि साइमन कमीशन के विरोध में जनता को जागृत करने देश व्यापी दौरे पर निकले बापू सुल्तानपुर आये थे। यहां पर बापू की गर्मजोशी से अगवानी की गई थी। हालांकि, कांग्रेस के गरम दल के नेता रहे बाबू गनपत सहाय गांधी जी के बेहद नजदीकी थे। गांधी जी फैजाबाद से बाबू गनपत सहाय की मोटर कार से ही आये थे। सेठ-साहूकारों से गांधी जी ने स्वराज की लड़ाई में चंदा मांगा तो सभा में मौजूद महाजनों ने भामाशाह बनकर उनकी झोली भर दी थी। उन्होंने लिखा है कि जिस केशकुटीर में बापू ठहरे थे, वो अब गनपत सहाय पीजी कॉलेज के राधारानी महिला विभाग में तब्दील हो चुका है। वहीं धर्मशाला का वह आंगन आज भी सुनहरी याद दिला रहा है।

बड़ी खबरें

View All

सुल्तानपुर

उत्तर प्रदेश

ट्रेंडिंग