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बच्चों के लिए लिखने वाले रामानुज त्रिपाठी को इस तरह किया गया याद

बाल साहित्यकार एवं गीतकार कवि रामानुज त्रिपाठी की पुण्य तिथि पर साहित्यकार सम्मान समारोह का आयोजन सुल्तानपुर के जिला पंचायत सभागार में किया गया।

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Laxmi Narayan

Jul 21, 2017

Sultanpur Literature News

Sultanpur Literature News

( साहित्यिक रिपोर्ट )

सुल्तानपुर.
बाल साहित्यकार एवं गीतकार कवि रामानुज त्रिपाठी की पुण्य तिथि पर साहित्यकार सम्मान समारोह, पुस्तक लोकार्पण एवं विचार गोष्ठी का आयोजन सुल्तानपुर के जिला पंचायत सभागार में किया गया। इस अवसर पर देश-प्रदेश के कई साहित्यकारों ने हिस्सा लिया। सम्पूर्ण कार्यक्रम दो सत्रों में विभाजित था जिसमें पहला सत्र बाल साहित्य पर और दूसरा सत्र नवगीतों पर आधारित था। पहले सत्र में रामानुज त्रिपाठी के बालगीत संग्रह 'जंगल का स्कूल' और मासिक पत्रिका 'बालवाटिका' के जुलाई अंक का लोकार्पण हुआ। दूसरे सत्र में गीतकार धीरज श्रीवास्तव एवं डॉ मंजु श्रीवास्तव द्वारा सम्पादित गीत-संकलन 'नेह के महावर' और रामानुज त्रिपाठी के नवगीत संग्रह 'धुएँ की टहनियाँ' का लोकार्पण हुआ। दोनों सत्रों के विचार पक्ष को विभिन्न साहित्यकारों ने सम्बोधित किया। कार्यक्रम का संचालन युवा आलोचक एवं समीक्षक ज्ञानेन्द्र विक्रम सिंह रवि ने किया।


पंडित रामानुज त्रिपाठी सृजन संस्थान सुल्तानपुर ने रामानुज त्रिपाठी की पुण्यतिथि पर आयोजित इस कार्यक्रम में भीलवाड़ा के साहित्यकार डॉ.भैरूंलाल गर्ग, सुल्तानपुर के आद्या प्रसाद सिंह प्रदीप, लखनऊ के बन्धु कुशावर्ती, रायगढ़ के श्याम नारायण श्रीवास्तव एवं भीलवाड़ा के फतह सिंह लोढ़ा को बाल साहित्य सम्मान 2017 से सम्मानित किया गया।


'बाल साहित्य की वर्तमान प्रासंगकिता' विषय पर चर्चा के दौरान बोलते हुये वरिष्ठ बाल कथाकार दिनेश प्रताप सिंह चित्रेश ने कहा, 'आज हम बच्चों को शिक्षा देने और उसे प्रौढ़ बनाने के नाम पर अधिक से अधिक बोझ के नीचे दबा रहे हैं| यहाँ बच्चे बौद्धिक न होकर कुंठित होने लगते हैं। हमें बच्चों को इस कुंठा से बचाने के लिए बाल साहित्य से जोड़ना होगा।'


लखनऊ के बंधु कुशावर्ती का कहना था, 'रामानुज त्रिपाठी रामनरेश त्रिपाठी के बाद बाल साहित्य के इस जिले के बड़े महत्वपूर्ण हस्ताक्षर रहे हैं। उनके पुत्र अवनीश और पुत्री सुधा ने रामानुज त्रिपाठी की स्मृति में बेहद सराहनीय आयोजन किया है। कथासमवेत पत्रिका के संपादक डॉ शोभनाथ शुक्ल ने त्रिपाठी जी के बाल साहित्य पर प्रकाश डालते हुए कहा, 'बाल साहित्य पढ़ते हुए मुझे हमेशा लगता है कि दो प्रकार के उद्देश्य होने चाहिए जिसमें पहला -बच्चों का मनोरंज करना और दूसरा ज्ञान देते हुए बच्चों को सचेत करना।' कार्यक्रम में मुख्य अतिथि के रूप में मौजूद बालवाटिका पत्रिका के संपादक डॉ भैरूँलाल गर्ग ने अपना संस्मरण साझा करते हुए कहा, 'रामानुज त्रिपाठी के बाल साहित्य से परिचय बालवाटिका पत्रिका से ही संभव हो सका। उनकी चिट्ठियां बड़े आदरपूर्ण और सम्मान से सुन्दर हस्तलिखित प्रारूप में आती थीं।'


विशिष्ट अतिथि के रूप में राजस्थान के फतह सिंह लोढ़ा जी ने कहा, 'भारतवर्ष में अनेक लेखक थे, हैं और रहेंगे लेकिन पिता के साहित्य को आगे लाने वालों को उँगलियों पर गिना जा सकता है। रामानुज त्रिपाठी के साहित्य को जन-जन तक पहुंचाने में अवनीश त्रिपाठी का बड़ा योगदान रहा है इसीलिए वे बधाई के पात्र हैं। ' प्रथम सत्र का अध्यक्षीय वक्तव्य देते हुए वरिष्ठ बाल एवं अवधी साहित्यकार आद्या प्रसाद सिंह 'प्रदीप' का कहना था कि बाल साहित्य आज से नहीं आदि काल से रचा जा रहा है जिसे समृद्ध करने में रामानुज त्रिपाठी की बड़ी भूमिका रही है।


कार्यक्रम के दूसरे सत्र में वरिष्ठ छंदकार आचार्य ओम नीरव , वरिष्ठ उपन्यासकार एवं आँचलिक कथाकार डॉ सूर्यदीन यादव, कवयित्री डॉ मंजु श्रीवास्तव, गीतकार धीरज श्रीवास्तव को छंद,गीत साहित्य सम्मान 2017 से सम्मानित किया गया। रामानुज त्रिपाठी की पुण्य तिथि पर उनके नवगीतों पर एक चर्चा आयोजित की गई। रामानुज त्रिपाठी के स्वभाव के अत्यंत निकट रहे समीक्षक एवं आलोचक सुरेश चंद्र शर्मा ने रामानुज त्रिपाठी जी के नवगीतों में मानवीय संवेदना के पक्ष को रखते हुए उनके व्यक्तित्व और कृतित्व पर प्रकाश डाला। पंजाब विश्वविद्यालय चंडीगढ़ में हिंदी विभाग के शोधार्थी एवं समीक्षक अनिल पाण्डेय ने कहा, 'नवगीतों में आत्मकथ्य और मानवीय संवेदनाएं तलाशनी हों तो कहीं जाने की आवश्यकता नहीं है, बस रामानुज जी के गीत पढ़ें।' वरिष्ठ साहित्यकार प्रो. डा.सुशील कुमार पांडेय का कहना था, 'पंडित रामानुज त्रिपाठी प्राचीन परम्पराओं के पथ पर अग्रसर हैं। उनके नवगीत कल के प्रतीक पर आज की सच्चाई है। दूसरे सत्र के मुख्य अतिथि कवितालोक सृजन संस्थान लखनऊ के संस्थापक आचार्य ओम नीरव ने अपनी अभिव्यक्ति देते हुए कहा, 'नवगीत और बाल कविता में रामानुज जी का स्वरूप अलग दिखता है। बच्चे के अंदर प्रवेश करना परमहंस हो जाना है। पंडित जी इसके अनुकरणीय उदहारण हैं।' द्वितीय सत्र में विशिष्ट अतिथि के रूप में कानपूर विश्वविद्यालय की प्रोफेसर डॉ. मंजू श्रीवास्तव रहीं और अध्यक्षता नाडियाड गुजरात के वरिष्ठ उपन्यासकार डॉ सूर्यदीन यादव ने की। मंच का सञ्चालन युवा समीक्षक ज्ञानेन्द्र विक्रम सिंह रवि और सरस्वती वंदना करुणेश भट्ट ने किया।


कार्यक्रम का सुल्तानपुर के लिए इसलिए भी महत्व है क्योंकि यहाँ पर इससे पहले कभी बालसाहित्य पर कोई कार्यक्रम नहीं आयोजित किया गया है। पं रामनरेश त्रिपाठी से लेकर हिंदी साहित्य की बहुत ही समृद्धशाली परंपरा से भरे इस जिले में इस प्रकार का यह पहला पूर्णत सफल आयोजन है। कार्यक्रम में आशुकवि आद मथुरा प्रसाद सिंह 'जटायु', डॉ रामप्यारे प्रजापति, जगदीश प्रसाद श्रीवास्तव, सुधा त्रिपाठी, आद वीरेंद्र कुमार त्रिपाठी, उत्कर्ष सिंह, प्रीति तिवारी, प्रशंसा शुक्ला, रचना शुक्ला, डॉ देवनारायण शर्मा, उमाशंकर शुक्ल, उमाकांत पांडेय, संदीप सिंह, डॉ ओंकार नाथ द्विवेदी, जयंत त्रिपाठी, डॉ लक्ष्मण गाँधी आदि उपस्थित रहे। आभार ज्ञापन आयोजक के रूप में संस्थान के अध्यक्ष अवनीश त्रिपाठी ने किया। कार्यक्रम का आयोजन रामानुज त्रिपाठी की 13वीं पुण्य तिथि पर 08 जुलाई 2017 को किया गया।