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बड़े सपने दिखाकर जिन गांवों में बसाई औद्योगिक नगरी, वहां विकास तो दूर; पैदल चलने लायक भी सडक़ नहीं

Industrial city: ग्राम नयनपुर, गिरवरगंज में कागजों में ही सिमटकर रह गए विकास कार्यों के बड़े-बड़े दावे, जिला पंचायत सदस्य ने कलक्टर का कराया ध्यानाकर्षण

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बड़े सपने दिखाकर जिन गांवों में बसाई औद्योगिक नगरी, वहां विकास तो दूर; पैदल चलने लायक भी सडक़ नहीं

Industrial city road and pond

सूरजपुर. जिला मुख्यालय से लगे औद्योगिक नगरी (Industrial city) नयनपुर, गिरवरगंज में एक ओर जहां फैक्टरियों से निकले वाली धुएं से पूरा गांव बदहाल है, वहीं ग्रामीणों को एक अदद सडक़ के लिए भी प्रशासन का मुंह ताकना पड़ रहा है।

जबकि इन गांवों में जब बड़ी फैक्टरियों लग रही थी तब उन्हें ऐसे सपने दिखाए गए थे कि ये गांव अब गांव नही बल्कि यहां के सपनों को पर लग जाएंगे। एक दशक से अधिक का समय हो गया लेकिन हुआ वही जो अब तक होता आया है। सपने दिखाने वाले मालामाल और देखने वाले कंगाल।


इस संबंध में जिला पंचायत सदस्य कुलदीप बिहारी ने बताया कि नयनपुर व गिरवरगंज में (Industrial city) आज 40 से अधिक छोटे बड़ी औद्योगिक इकाइयां लगी हुईं हैं। इसके सीएसआर मद से अगर ईमानदारी से अगर यहां का विकास हुआ होता तो गांव चमन हो जाता लेकिन ऐसा हुआ नहीं।

आज यहां के लोग यहां की धरती प्रदूषण से बेहाल है। फैक्टरियों से निकलने वाला धुआं लोगों की मुसीबत का सबब बना हुआ है। लोग बीमारी से ग्रसित है, शुद्ध पेयजल नही मिल रहा है। सडक़ें जर्जर हंै। रोजगार का पता नहीं है।


बाहर वालों को मिला रोजगार, स्थानीय ताक रहे मुंह
बिहारी बताते हंै कि रोजगार पर यूपी-बिहार वालों का कब्जा है। स्थानीय लोग ही बेरोजगार हंै, जबकि कहा गया था कि स्थानीय को रोजगार मिलने के साथ ही गांव में सडक़, बिजली, पानी, मंगल भवन, खेलकूद की व्यवस्था की जाएगी। इसके अलावा पर्यावरण ठीक रखने पर्याप्त पेड़-पौधे लगाए जाएंगे। ऐसा कुछ भी नहीं हुआ जिससे ग्रामीण खुद को ठगा सा महसूस कर रहे है।


डीसीसी ने कलक्टर को लिखा पत्र
जिला पंचायत सदस्य बिहारी कुलदीप ने कलक्टर को पत्र लिख कर गांव की बदहाली की ओर ध्यानाकर्षित करते हुए गांव के विकास हेतु पहल करने की मांग की है।