
Expiry medicine
सूरजपुर. जिला चिकित्सालय समेत जिले की स्वास्थ्य व्यवस्था को लेकर आये दिन कोई न कोई शिकायत होती रहती है, जिला चिकित्सालय में स्वास्थ्य कर्मचारियों की भर्ती। कर्मचारियों का संलग्नीकरण और डायरिया व मलेरिया पीडि़तों की मौत लगातार अखबारों की सुर्खिया बनती रही है।
लेकिन इस बार जिला अस्पताल में कालातीत दवाइयां के वितरण से नया विवाद उत्पन्न हो गया है। ग्रामीण क्षेत्र से आने वाले कम पढ़े लिखे लोग तो अंग्रेजी में लिखी पर्ची और दवाइयों का नाम व कालातीत तिथि भी नहीं पढ़ पाते है। ऐसे में कालातीत दवाइयों का काउण्टर से वितरण करना मरीजों के जीवन से खिलवाड़ का मामला है।
नगर के भ_ापारा अग्रसेन वार्ड निवासी काजल सारथी ने बताया कि उसके बच्चे को स्वास्थ्यगत परेशानी होने पर 30 मई को जिला चिकित्सालय में उपचार कराने गई थी और इसे भर्ती करने के बाद एमोक्सीसिलीन ओरल सस्पेंशन नामक दवा की पर्ची दी गई।
पीडि़त बच्चे के परिजन ने दवा काउण्टर से दवा ली तो उसमें मई 2018 की कालातीत अवधि वाली दवा मिली, पहले दिन तो उसने उस दवा को उपयोग में नहीं लाया लेकिन क्रमश: 1, 2 और 4 जून को भी काउण्टर से जो दवा मिली उसमें कालातीत अवधि मई 2018 अंकित थी।
इसी बीच हाल चाल जानने पहुंचे पड़ौसी की नजर दवा की कालातीत अवधि पर पड़ी और उसने दवा के सेवन से रोक दिया, अन्यथा कोई बड़ी घटना से इनकार नहीं किया जा सकता था। अस्पताल में उस नाम की नई दवाई नहीं होने पर दवा दुकान से उक्त नाम की दवा खरीदकर बच्चे को पिलाई।
होनी चाहिए कार्रवाई
जिला चिकित्सालय जैसे इकाई से ऐसी चूक की अपेक्षा नहीं की जा सकती। मरीजों को सही दवा मिले इसकी जिम्मेदारी प्रबंधन की है। संबंधित पर कार्रवाई हो।
अजय अग्रवाल, नपा उपाध्यक्ष सूरजपुर
कालातीत दवाइयां की जाएंगीं नष्ट
कालातीत दवाईयों का वितरण नहीं किया जाता है। यदि ऐसा हुआ है तो इस संबध्ंा में जानकारी ली जायेगी, दोबारा ऐसी चुक न हो इसके लिए सार्थक कदम उठाये जाएंगे और कालातीत दवाइयों को नियमानुसार नष्ट किया जायेगा।
डॉ. आरएस सिंह, बीएमओ, सूरजपुर
Published on:
06 Jun 2018 12:56 pm

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