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सूरत. 15 वर्षीय बेटी से दो साल तक बलात्कार कर उसे गर्भवती बनाने के मामले में आरोपी सौतेले पिता को पॉक्सो एक्ट मामले की विशेष अदालत ने दोषी करार देते हुए 20 साल का कठोर कारावास और पांच हजार रुपए अर्थदंड की सजा सुनाई है। कोर्ट ने अपने फैसले में कहा है कि आरोपी पीडि़ता का सौतेला पिता होने से उसकी जिम्मेदारी थी कि वह अपनी बेटी की संरक्षण करे, लेकिन उसने बेटी से ही बलात्कार कर भारतीय संस्कृति, संस्कार और समाज विरोधी कृत्य किया है। आरोपी ने एक बच्ची के मान-सम्मान को ठेस पहुंचाने वाला अधम और समाज के लिए कंलकित करने वाला कृत्य किया है।
प्रकरण के अनुसार सलाबतपुरा निवासी अनिल नाम के आरोपी ने विधवा महिला से प्रेम विवाह किया था। महिला को पहले पति से एक पुत्र और दो पुत्रियां है। सभी साथ में रहते थे। इस दौरान रात के समय आरोपी ने 15 वर्षीय बेटी से बलात्कार किया और किसी को बताने पर जान से मारने की धमकी दी। इस तरह वह दो साल तक बच्ची से बलात्कार करता रहा। बच्ची जब गर्भवती हुई तो पूरा मामला सामने आया और किशोरी की मां ने अपने पति के खिलाफ बलात्कार की शिकायत दर्ज करवाई। पुलिस ने आरोपी को गिरफ्तार कर आइपीसी और पॉक्सो एक्ट की धाराओं के तहत कोर्ट में चार्जशीट पेश की थी, तब से मामले की सुनवाई कोर्ट में चल रही थी। सुनवाई के दौरान अतिरिक्त लोक अभियोजक दीपेश दवे आरोपों को साबित करने में सफल रहे। शनिवार को अंतिम सुनवाई के बाद कोर्ट ने आरोपी सौतेले पिता को दोषी करार देते हुए 20 साल का कठोर कारावास और पांच हजार रुपए अर्थदंड की सजा सुनाई।
डीएनए से साबित हुआ बायोलॉजिकल पिता ही आरोपी
लोक अभियोजक दीपेश दवे ने बताया कि दो साल से सौतेले पिता की हैवानियत का शिकार हो रही बच्ची का जब मासिक आना बंद हो गया और उसका पेट उभरा हुआ दिखने लगा तो मां को आशंका हुई। उन्होंने विश्वास में लेकर जब बेटी से पूछा तो पूरा मामला सामने आया। उस समय बच्ची तीन महीने की गर्भवती थी। बाद में पीडि़ता ने बच्चे को जन्म दिया। बच्चे और आरोपी के डीएनए की जांच की गई तो जांच में आरोपी सौतेला पिता ही बच्चे का बायोलॉजिकल पिता होने की पुष्टि हुई और यह कोर्ट में अहम सबूत साबित हुुआ।
Published on:
19 Aug 2023 09:08 pm
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