
महुवा में 65 किसान प्राकृतिक किसानी से जुड़े
बारडोली. सूरत जिला की महुवा तहसील के 65 किसानोड्ड ने रासायनिक खाद की जगह सुभाष पालेकर प्रेरित गाय आधारित जीरो बजट की प्राकृतिक खेती को अपनाने की शुरुआत की है। राज्यपाल आचार्य देवव्रत के प्रयासों से दक्षिण गुजरात में भी प्राकृतिक किसानी को बढ़ावा मिल रहा है।
भारतीय संस्कृति में लोग आदिकाल से प्रकृति और गौमाता की पूजा करते आए हैं। पुरातनकाल की गाय आधारित खेती अब आधुनिक युग में भी होने लगी है। महुवा के 65 किसानों ने इस खेती को अपनाकर नए बदलाव की शुरुआत की है। गौ आधारित प्रकृतिक खेती से आम जनता की रोगप्रतिकारक क्षमता बढऩे के साथ ही क्लाइमेंट चेंज और ग्लोबल वॉर्मिंग की समस्या में भी कमी आएगी। खेती में रासायनिक खाद और पानी का ज्यादा उपयोग होने से जमीन की उर्वरता में कमी आ रही है। रासायनिक खाद व दवाई महंगी होने के साथ ही हानिकारक भी है, जबकि प्राकृतिक खेती में ज्यादा उत्पादन के लिए जैविक खाद और जीवामृत घर पर ही बनाया जाता है।
महुवा तहसिल के वडिया गांव निवासी किसान प्रकाश चंदू पटेल पिछले एक साल से प्राकृतिक खेती से जुड़े हैं। उन्होंने एक साल पूर्व वड़ताल स्थित सुभाष पालेकर की देशी गाय आधारित खेती के लिए सात दिनों का प्रशिक्षण लिया था। घर आकर शुरुआत में गांव के निकट की गौशाला से देशी गाय के गोबर का खाद और गौमूत्र लेकर जीवामृत बनाया और पहली बार गन्ने की फसल में इस्तेमाल किया। इसका फायदा होता देख दो गीर गाय खरीद कर घर पर ही जीवामृत बनाना शुरू किया। उन्होंने कहा कि जनवरी में भिंडी की फसल की थी, जिसमें पेस्टिसाइड का उपयोग किए बिना अच्छी पैदावार ली। उन्होंने कहा कि रासायनिक खाद के इस्तेमाल से खर्च काफी हद तक कम हो गया।
आत्मा प्रोजेक्ट के महुवा तहसील के ब्लॉक टैक्नोलॉजी मैनेजर देवेन्द्र शर्मा के अनुसार प्राकृतिक खेती से पर्यावरण का संवर्धन होने के साथ ही जीरो बजट की खेती के प्रति रुझान बढ़ा है। महुवा तहसील में एक साल में एक हजार किसानों को प्राकृतिक खेती का प्रशिक्षण दिया गया है। फिलहाल 65 किसान इस पद्धति से खेती कर रहे हैं और क्षेत्र के 475 किसान प्राकृतिक खेती का मन बना रहे हैं।
Published on:
14 Oct 2020 06:05 pm
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