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आदिवासी और मुस्लिम मतदाताओं पर सभी प्रत्याशियों की नजर

भरुच संसदीय सीट का हालजीत के लिए प्रत्याशी लगा रहे जोरबारह दिन बाद होगा मतदान

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सूरत

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Sunil Mishra

Apr 10, 2019

patrika

आदिवासी और मुस्लिम मतदाताओं पर सभी प्रत्याशियों की नजर


भरुच. भरुच संसदीय क्षेत्र के लिए हो रहे चुनाव में प्रत्याशियों के पास अब बहुत ही कम वक्त शेष रह गया है। दो सप्ताह का ही वक्त शेष रहने से सभी प्रत्याशी पूरी ताकत चुनाव प्रचार में जुट गए हैं। प्रत्याशियों की ओर से जनसंपर्क के साथ नुक्कड़ सभा का आयोजन कर मतदाताओ को साधने की पूरी कोशिश की जा रही है। कांग्रेस और भाजपा के साथ बीटीपी के प्रत्याशियों के बीच यहां पर मुकाबला होने से इस बार का चुनाव काफी दिलचस्प हो गया है। आदिवासी समाज से भाजपा और बीटीपी की ओर से प्रत्याशी चुनाव मैदान में है, वहीं कांग्रेस ने अल्पसंख्यक कार्ड खेलते हुए मुस्लिम को अपना प्रत्याशी बनाया है। आदिवासी एवं मुस्लिम वोटों के विभाजन का फायदा किसे होता है, यह तो आने वाला वक्त ही बताएगा। हालांकि चुनाव जीतने के लिए सभी प्रमुख प्रत्याशी अपना अपना गणित सेट करने में जुट गए हैं। निर्दलीय प्रत्याशियों की ओर से भी प्रमुख दलों के प्रत्याशियों को आंशिक टक्कर देते हुए वोटों में सेंधमारी जरूर की जाएगी, जिसका नुकसान राष्ट्रीय दलों के प्रत्याशियों क ो जरूर होगा।


आदिवासी व मुस्लिम वोटों के लिए घमासान
भरुच संसदीय क्षेत्र में मुस्लिम और आदिवासी मतदाताओं का प्रभाव सबसे ज्यादा है। शहरी इलाके में भाजपा का प्रभुत्व होने से सात विधानसभा सीट के गांवों में आदिवासी और मुस्लिमों का वोट हासिल करने के लिए बीटीपी और कांग्रेस प्रत्याशियों के बीच घमासान चल रहा है। आदिवासी वोटों का विभाजन भाजपा के लिए नुकसानदायक साबित होगा। इस कारण भाजपा की ओर से शहरी इलाके में ज्यादा ध्यान केन्द्रित किया जा रहा है।
भरुच लोकसभा सीट के लिए बनाए गए मतदान केन्द्र
विधानसभा मतदान केन्द्रों की संख्या
करजन 246
देडियापाड़ा 314
जंबूसर 279
वागरा 248
झगडिय़ा 321
भरुच 252
अंकलेश्वर 256
कुल 1,916

पिछले चुनाव की तुलना में इस बार बढ़े तीन प्रत्याशी
2014 के लोस चुनाव में कुल चौदह प्रत्याशी चुनाव में उतरे थे। इसकी तुलना में वर्ष 2019 के चुनाव में कुल सत्रह प्रत्याशी खड़े हैं। तीन प्रत्याशी इस बार के चुनाव में बढ़ गए हैं। सिर्फ भाजपा प्रत्याशी मनसुख वसावा तथा एक निर्दलीय को छोडक़र सभी चेहरे 2014 के लोस चुनाव की तुलना में नए हैं।