22 जनवरी 2026,

गुरुवार

Patrika LogoSwitch to English
icon

मेरी खबर

video_icon

शॉर्ट्स

epaper_icon

ई-पेपर

पंजाब, राजस्थान के बाद गुजरात में नशेड़ी बढ़े ! अफीम छुड़ाने की दवा की खपत बढ़ी

कोरोना के बाद निकोटिन, अल्कोहल के अलावा गांजा, एमडी ड्रग व अन्य नशे के मामले बढ़े, 20 से 35 वर्ष की आयु वर्ग के आसानी से नशे की लत के हो रहे शिकार

3 min read
Google source verification

सूरत

image

Pradeep Joshi

Aug 02, 2022

पंजाब, राजस्थान के बाद गुजरात में नशेड़ी बढ़े ! अफीम छुड़ाने की दवा की खपत बढ़ी

File Image

केस-1 : कोरोना के बाद सितंबर 2021 में डार्क वेब के जरिए मादक पदार्थो का कारोबार करने वाले दंपति को दिल्ली एनसीबी टीम ने सूरत के अड़ाजन से गिरफ्तार किया। उनके दो ठिकानों से गांजा, चरस व नशीली दवाएं बरामद की है।

केस-2 : अहमदाबाद सरखेज क्षेत्र के व्यवसायी का पुत्र एमडी ड्रग्स लेने के बाद शहर में रोज बेवजह घंटों 200 -300 किलोमीटर ड्राइविंग करता था। पिता ने उसकी कार में जीपीएस ट्रैकर लगाया तो पता लगा कि वह रामोल और असलाली क्षेत्र में बार-बार जाता था और ड्रग खरीदता था। बाद में वह नेटवर्क भी पकड़ा गया।

प्रदीप जोशी. सूरत. 'उड़ता पंजाब' तो सभी ने सुना। इसके बाद नशे के कारोबार में राजस्थान और अब गुजरात अलार्मिंग सिचुएशन पर है। नशा मुक्ति केंद्रों से जुड़े डॉक्टर का तो यहां तक कहना है कि बढ़ते मेट्रो कल्चर के चलते विकसित गुजरात नशे के मामले में चिंताजनक स्थिति पर आ रहा है। नशे को लेकर देश के सबसे संवेदनशील 272 जिलों में गुजरात के 8 जिले अहमदाबाद, सूरत, वडोदरा, भरुच, मेहसाणा, पोरबंदर और जामनगर शामिल हैं।


गुजरात एटीएस के ताजा आंकड़ों पर नजर डालें तो वर्ष 2021 में ही 1,466.18 करोड़ रुपए के नशीले पदार्थ व दवाएं जब्त किए गए। जबकि पिछले दो वर्षों में 704.04 करोड़ रुपए की दवाएं जब्त की गई। इसमें एटीएस ने 427.3 किलो हेरोइन, 6.65 किलो एमडी और 3.54 किलो ब्राउन शुगर थी। पिछले तीन सालों में करीब 2,170 करोड़ की नशीली दवाएं जब्त की गई। महत्वपूर्ण तथ्य है कि कोरोना काल के बाद नशे के मामलों में बड़ा उछाल आया है।


अफीम छुड़ाने वाली दवा की खपत बढ़ी


पंजाब, राजस्थान के बाद अब गुजरात में भी अफीम जैसे नशे को छुड़ाने के लिए डॉक्टरों की ओर से दी जाने वाली एसेंशियल नारकोटिक ड्रग्स (टेबलेट का नाम नहीं दिया जा सकता) का कंजप्शन (खपत) काफी बढ़ गया है। यह डाटा बताता है कि गुजरात में भी अफीम आदि के नशेड़ियों की संख्या तेजी से बढ़ी है। इनमें अहमदाबाद में सबसे अधिक, फिर बड़ौदा में ड्रग्स और सूरत में अल्कोहल और निकोटिन का उपयोग बढा है। इनके बाद अन्य शहर हैं।

अहमदाबाद में यहां पकड़े अधिक मामले


सूत्रों के मुताबिक गुजरात के बड़े शहरों में यंगस्टर का सर्कल काम कर रहा है। इन्हीं में से ड्रग पेडलर भी बन जाते हैं। नशा छुड़ाने वाले डॉक्टर के मुताबिक अहमदाबाद के रखियाल के सुंदरम नगर, रामोल, ओढव, वटवा, जुहापुरा,गोमतीपुर, शाहआलम जैसे छोटे से पॉकेट क्षेत्र से ही पिछले दिनों 15 से 20 नशेड़ी लड़के लाए गए। बाद में वहां के नेटवर्क भी उजागर हुआ। वडोदरा में डिजाइनिंग जैसे क्रिएटिव क्षेत्र के कुछ लड़के लड़कियां वीट का इस्तेमाल करने लगे हैं। सूरत में हाई प्रोफाइल युवाओं का नेटवर्क पिछले दिनों चर्चा में रहा।

पाकिस्तान से भी तस्करी


भारत में पाकिस्तान के रास्ते नशीली दवाओं की तस्करी हो रही है। 73 पाकिस्तानी को भी गिरफ्तार किया गया था। एटीएस के मुताबिक, पाकिस्तानी तस्करों ने कई बार ड्रग्स तस्करी के लिए गुजरात के तटों का इस्तेमाल करने की कोशिश की। सितंबर 2021 में मुंद्रा बंदरगाह से 21,000 करोड़ की नशीली दवाओं की जब्ती हुई। जिसकी जांच राष्ट्रीय जांच एजेंसी (एनआईए) कर रही है।


अब 60-70% नशे वाले मरीज


अहमदाबाद के मानसिक चिकित्सालय में आने वाले मरीजों में पहले 60 से 70% सामान्य साइकेट्रिक पेशेंट होते थे, बाकी नशे के होते थे। अब 60 परसेंट गांजा, शराब, एमडी ड्रग व अन्य नशे के मरीज आ रहे हैं। इनका आयु वर्ग 20 से 35 वर्ष तक का देखा जा रहा है। 20 से 30 वर्ष वालों में गांजा व अन्य नशा का चलन बढ़ा और 30 प्लस की उम्र वालों में अल्कोहल व निकोटिन का नशा बढा है।
डॉ. रमाशंकर यादव, चिकित्सा अधीक्षक,मानसिक आरोग्य हॉस्पिटल अहमदाबाद

अब नए युवा मरीजों की संख्या अधिक


नशामुक्ति की ओपीडी में नई बात देखने को मिल रही कि पहले नशे के पुराने मरीज आते थे, अब ऐसे युवा नए मरीज भी आ रहे हैं जो पहली स्टेज पर होते हैं। मेट्रो कल्चर वाले अहमदाबाद, सूरत जैसे शहरों में अन्य राज्यों से आने वाले लोगों में शराबबंदी होने के कारण आसानी से ना दिखने वाले सस्ते गांजे जैसे नशे की तलाश बढ़ जाती है।
विनय सोलंकी, प्रोजेक्ट डायरेक्टर, परिवर्तन नशा मुक्ति केंद्र