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जीएसटी से परेशान व्यापारियों को फिर से देनी होगी एक परीक्षा

ई-वे बिल का पहला दिन तो छुट्टी में बीता, नेटवर्क की परीक्षा आजकपड़ा व्यापारी एक साथ बिल जनरेट कर रवाना करेंगे पार्सल

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सूरत

जीएसटी के बाद एक अप्रेल से अंतरराज्यीय व्यापार के लिए ई-वे बिल लागू कर दिया गया है। पहले केन्द्र सरकार ने 1 फरवरी से ई-वे बिल लागू करने की घोषणा की थी, लेकिन सर्वर की खामी के कारण इसे स्थगित कर दिया गया था।
रविवार को ई-वे बिल का पहला दिन था। मार्केट बंद रहने के कारण व्यापारियों के बहुत कम पार्सल रवाना हुए। उन्होंने पहले ही ई-वे बिल और पार्सल ट्रांसपोर्ट के लिए भेज दिए थे। इससे व्यापारियों और ट्रांसपोर्टर्स को कोई तकलीफ नहीं हुई। सोमवार को कपड़ा बाजार खुलेगा और सभी व्यापारी एक साथ जीएसटी बिल के साथ पार्सल भेजेंगे। देशभर में बड़ी संख्या में व्यापारी एक साथ जीएसटी के नेटवर्क पर लोग-इन कर ई-वे बिल जनरेट करेंगे, तब जीएसटी नेटवर्क की परीक्षा होगी कि यह एक साथ इतना भार झेल पाता है या नहीं या पिछली बार की तरह ठप होकर व्यापारियों का सिरदर्द बढ़ाता है। व्यापारियों का कहना है कि सरकार ने पिछली बार तैयारी के बिना ही ई-वे बिल 1 फरवरी से लागू करने की घोषणा कर दी और पहले दिन ही व्यापारियों को काफी परेशान होना पड़ा था। सूरत टैक्सटाइल ट्रांसपोर्ट गुड्स एसोसिएशन के प्रमुख युवराज देसले ने बताया कि रविवार होने के कारण ई-वे बिल का ज्यादा असर नहीं दिखा। बहुत कम पार्सल रवाना हुए। सोमवार को ही व्यापारियों की समस्या पता चल सकेगी।

राज्यों ने अपने-अपने ई-वे बिल की व्यवस्था की थी

उल्लेखनीय है कि
1 अप्रेल तक सभी राज्यों ने अपने-अपने ई-वे बिल की व्यवस्था की थी । यदि सूरत के व्यापारी को यूपी में माल भेजना होता तो वहां की राज्य सरकार की वैट की साइट से ई-वे बिल अपलोड करने के बाद पार्सल के साथ भेज रहे थे। सभी राज्य अपने ही ई-वे बिल को मान्य कर रहे थे यदि ट्रांसपोर्टर केंद्र सरकार के ई-वे बिल का फॉर्म ले जाए तो उसे अवैध मानकर पार्सल रोक लिया जाता था। इस कारण व्यापारी असमंजस में हैं कि 1 अप्रेल से केंद्र सरकार के ई-वे बिल से काम चल जाएगा या केंद्र और राज्य, दोनों के ई-वे बिल बनाने पडेंग़े। सीए सुशील काबरा का कहना है कि केंद्र का ई-वे बिल सभी जगह माना जाएगा।