
...और नामदेवजी ने प्राण त्याग दिए
सूरत. श्री रामकृष्ण सेवा समिति सूरत द्वारा 7 जनवरी से 13 जनवरी तक मनभरी फार्म में चल रही भक्तमाल कथा में व्यासपीठ से गौर दास महाराज ने संत नामदेव जी के सुंदर चरित्र की व्याख्या करते हुए बताया कि नामदेव जी को जब दीक्षा मिल गई तब उन्हें कण-कण में भगवान दिखाई देने लगे एक बार नामदेव जी रोटी बनाकर एक तरफ रख रहे थे कि इतने में कुत्ता आया और सारी रोटी मुंह में उठाई और बाहर की ओर भागा नामदेव जी ने कुत्ते के रूप में भगवान को देखा और घी की कटोरी लेकर श्वान के पीछे भागे और जाकर श्वान को पकड़ लिया। इतने में चतुर्भुज रूप में भगवान प्रकट हो गए और नामदेव जी को आशीर्वाद प्रदान किया। आखिरकार भगवान रुक्मणी के साथ उनके घर का छप्पर बांध दिया और रंग रोगन कर दिया। अब नामदेव जी गंभीर हो गए और सोचने लगे कि भगवान को मेरे कारण मजदूर तक बनना पड़ा और एकांत में रहना शुरू कर दिया और भगवान से प्रार्थना करी कि हमारे पूरे परिवार के 14 लोगों की समाधि आप की पैड़ी पर बने और फिर ऐसा ही हुआ नामदेव जी कीर्तन करते हुए अपने परिवार के साथ वहीं पर अपने प्राण त्याग दिए। विशेष रविवार को कथा का समय सुबह 9 बजे से दोपहर 1 बजे तक रहेगा।
Published on:
12 Jan 2019 01:03 pm
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