
Ankit Mehta on 4-day police remand
नवसारी।डांग में किसानों के उत्थान के नाम पर करोड़ों की धोखाधड़ी करने के मामले में आरोपी अंकित मेहता को मंगलवार को सुबीर कोर्ट में पेश किया गया। दोनों पक्षों की दलीलों के बाद कोर्ट ने उसे 4 दिनों के रिमांड पर पुलिस को सौंप दिया। उसे महाराष्ट्र के लोनावला से पकड़ा गया था।
डांग जिले में आदिवासी किसानों के लिए दुबई की यूनिवर्सल रोबो इनोवेशन कंपनी के सीएसआर फंड से 25 करोड़ रुपए खर्च करने का वादा करने के बाद किसानों से धोखाधड़ी प्रकरण में मुख्य आरोपी अंकित मेहता को महाराष्ट्र पुलिस ने रविवार को लोनावला से गिरफ्तार कर डांग पुलिस को सौंपा था। उसे डांग लाने के बाद पुलिस ने पूछताछ की। इसमें उसके अलग-अलग 22 बैंक खाते होने के अलावा दो पैनकार्ड और पहचान पत्र मिलने की बात सामने आई थी। वहीं फर्जी दस्तावेज तथा खुद को सरकारी आदमी बताकर कई बैंकों से लाखों का ऋण उठाने का भी खुलासा हुआ। मंगलवार को पुलिस ने अंकित मेहता को सुबीर फस्र्ट क्लास ज्यूडिशियल कोर्ट में पेश कर 10 दिन का रिमांड मांगा।
दलीलों में विभिन्न कंपनियां बनाने का मकसद क्या था, अलग-अलग बैंक खातों की जांच, नवसारी से मिली लक्•ारी कारें किसकी है, स्टाम्प पेपर, लेटरपैड आदि की जांच के लिए अंकित का साथ होना अनिवार्य बताया गया। आरोपी के वकील ने अंकित के एनजीओ को कलक्टर द्वारा ही मंजूरी देने की बात रखी। कोर्ट ने दोनों पक्षों की दलीलों को सुनने के बाद आरोपी अंकित मेहता को 4 दिन के रिमांड पर पुलिस को सौंप दिया।
नंदित मेहता के नाम से भी की थी धोखाधड़ी
अंकित मेहता वर्ष 2006 में अहमदाबाद में नंदित श्रेणिक मेहता के नाम से रहता था। उस समय उसने अहमदाबाद के एक जने से उसकी कार किराए पर ली थी। बाद में उसने न तो कार का तय किराया दिया और न कार लौटाई। इस पर कार मालिक ने नंदित मेहता के खिलाफ पुलिस में प्राथमिकी दर्ज करवाई थी। इसके बाद उसने अपना नाम बदल लिया। नंदित श्रेणिक मेहता की जगह अंकित शिरीष मेहता नाम रखकर बकायदा उसकी कानूनी कार्रवाई भी की। इसके बाद से नंदित, अंकित मेहता बन गया। उसने सारे दस्तावेज भी अंकित के नाम से बनवाए हैं।
कलक्टर के पीए के कहने पर छपा था विज्ञापन : माहिती विभाग
डांग जिले में यूनिवर्सल रोबो इनोवेशन कंपनी के नाम पर अंकित मेहता एवं भावेश्री ने प्रशासन और अन्य कई लोगों को लालच देकर नई कंपनियां खड़ी की थीं। इसमें से एक प्रशासन के साथ होर्डिंग्स को लेकर एमओयू करने की बात सामने आई है। इसमें जिला माहिती विभाग के माध्यम से 100 होर्डिंग्स पर एक वर्ष के लिए विज्ञापन लगाने के लिए टेंडर विज्ञापन अखबार में छपवाया था। माहिती विभाग से सरकारी रेट पर अगर किसी एनजीओ या अन्य को विज्ञापन छपवाना हो तो उसमें सम्बंंधित विभाग या कलक्टर की मंजूरी अनिवार्य होती है।
एनजीओ डांग कृषि विकास सेल की ओर से इंडोटेक कंपनी के टेंडर विज्ञापन को छपवाने के मामले में माहिती विभाग से पता चला कि विज्ञापन देने के लिए कलक्टर के पीए ने सूचना दी थी, जिसका पत्र बाद में देने को कहा था। बाद में हमें कलक्टर कार्यालय से लिखित रूप में कोई पत्र नहीं मिला। इसके आधार पर हमने रजिस्ट्रर में दर्ज कर विज्ञापन अखबार को भेजा था। उल्लेखनीय है कि विज्ञापन में माहिती विभाग का नंबर भी प्रकाशित किया गया था।
डांग में इंडोटेक कंपनी बनाकर 15 लाख की ठगी
आरोपी अंकित मंहता ने डांग कलक्टर को विश्वास में लेने के बाद डांग में विज्ञापन के बड़े होर्डिंग्स लगवाने के लिए इंडोटेक कंपनी बनाकर उसके नाम से एमओयू किया था। इसमें अंकित को विज्ञापन के जरिए होने वाली आय से कुछ प्रतिशत सरकार को देना था। जिला प्रशासन से करार करने के बाद अंकित ने डांग जिला माहिती विभाग के माध्यम से सरकारी रेट पर टेंडर का विज्ञापन भी अखबार में प्रकाशित करवाया था। इसके बाद तापी के दो लोगों से 15 लाख रुपए के होर्डिंग बनवाए थे, लेकिन उन्हें उनका बिल नहीं चुकाया गया। इस मामले में तापी के लोगों ने भी पुलिस से संपर्क कर उनसे ठगी की जानकारी दी है।
Published on:
26 Jul 2018 10:36 pm
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