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दीशित जरीवाला हत्या केस में सहायक लोक अभियोजक ने कहा अपील में जाने जैसा केस नहीं

संदेह का लाभ देते हुए सेशन कोर्ट ने आरोपियों को निर्दोष छोड़ा था, राज्य सरकार ने अपील के लिए मांगा था अभिप्राय

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दीशित जरीवाला हत्या केस में सहायक लोक अभियोजक ने कहा अपील में जाने जैसा केस नहीं

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सूरत. बहुचर्चिंत कपड़ा उद्यमी दीशित जरीवाला हत्याकांड मामले में राज्य सरकार की ओर से मामले को उच्च न्यायालय में चुनौती दिया जा सकता है या नहीं इसके लिए मांगा गया अभिप्राय का जवाब सहायक लोक अभियोजक भद्रेश दलाल ने दिया है।


वर्ष 2016 में हुई दीशित जरीवाली की हत्या मामले में सेशन कोर्ट ने 31 दिसम्बर, 2019 को फैसला सुनाया था। कोर्ट ने संदेह का लाभ देते हुए अभियुक्त दीशित की पत्नी वैल्सी जरीवाला, उसका प्रेमी सुकेतु मोदी और ड्राइवर धीरेन्द्रसिंह चौहाण को संदेह का लाभ देते हुए आरोपों से बरी कर दिया था। मामले को लेकर राज्य सरकार के कानून विभाग के सचिव की ओर से इस मामले में सहायक लोकअभियोजक रहे भद्रेश दलाल को पत्र लिखकर अभिप्राय मांगा था कि क्या इस मामले को उच्च न्यायालय में चुनौती दी जा सकती है? सहायक लोक अभियोजक दलाल ने भेजे अभिप्राय में लिखा है कि मामले को लेकर आए फैसले का विश्लेषण करने के बाद सेशन कोर्ट ने अभियुक्तों को निर्दोष छोड़े जाने को लेकर जो कारण बताए गए है उससे वह सहमत है और फैसले को चुनौती देने जैसा नहीं है। गौरतलब है कि वर्ष 2016 में पार्ले प्वॉइंट की सर्जन सोसायटी निवासी कपड़ा उद्यमी दीशित जरीवाला की उसके बंगले में ही हत्या कर दी गई थी। जांच के दौरान दीशित की हत्या पत्नी वैल्सी ने अपने प्रेमी सुकेतु मोदी और उसके ड्राइवर धीरेन्द्रसिंह के साथ मिलकर की होने का खुलासा हुआ था। पुलिस ने तीनों को गिरफ्तार कर उनके खिलाफ सेशन कोर्ट में चार्जशीट पेश की थी। तीन साल से अधिक समय तक चली सुनवाई के बाद अभियोजन पक्ष आरोपों को साबित करने में विफल रहा था और कोर्ट ने संदेह का लाभ देते हुए तीनों अभियुक्तों को निर्दोष छोड़ दिया था।