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ATS ARREST : गुजरात में एक बार फिर ‘लाल सलाम’ की दस्तक !

- पत्थलगड़ी मुहिम चला कर सतीपति संप्रदाय के आदिवासियों को सरकार के खिलाफ भडक़ाने का प्रयास - एटीएस ने तापी व महिसागर जिलों से महिला समेत तीन को नक्सली प्रवृतियों के आरोप में पकड़ा, झारखंड में थे वांछित - Efforts to incite the tribals of Satipati sect against the government by running a Pathalgadi campaign - ATS arrested three, including woman from Tapi and Mahisagar districts, on charges of Naxalite trends,wanted in Jharkhand

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ATS ARREST : गुजरात में एक बार फिर ‘लाल सलाम’ की दस्तक !

ATS ARREST : गुजरात में एक बार फिर ‘लाल सलाम’ की दस्तक !

सूरत. गुजरात में पत्थलगड़ी मुहिम को शुरू कर सतीपति संप्रदाय और स्थानीय आदिवासियों को सरकार के खिलाफ हिंसक आंदोलन के रूप में जोडऩे के प्रयास का दावा करते हुए एटीएस ने तापी व महिसागर जिलों से एक महिला समेत झारखंड के तीन जनों को गिरफ्तार किया है।

एटीएस सूत्रों के मुताबिक झारखंड के खूंटी जिले के बुटीगरा गांव निवासी बिरसा औरेया (28) व सामू औरेया (20) व रांची जिले के हुन्द्रु गांव निवासी एक महिला बबिता कछप तीनों नक्सलवादी प्रवृति से जुड़े हैं। उनके खिलाफ झारखंड में कई मामले दर्ज है। जिनमें झारखंड पुलिस को उनकी तलाश थी। बिरसा और उसका भाई सामू तापी जिला मुख्यालय व्यारा के पास कटासवण गांव के में छिपे थे।

जबकि बबिता महिसागर जिले के संतरामपुर में छिपी हुई थी। तीनों प्रतिबंधित संगठन कम्युनिस्ट पार्टी ऑफ इंडिया (माओवादी) से जुड़े हैं। बिरसा के खिलाफ झारखंड के अलग-अलग थानों में 20 से अधिक मामले दर्ज हैं, जिनमें वह वांछित था। तीनों के कब्जे से मोबाइल, लेपटॉप, प्रतिबंधित संगठन कम्युनिस्ट पार्टी ऑफ इंडिया (माओवादी) से जुड़े कागजात मिले हैं।

एटीएस को तीनों की सरकार विरोधी हिंसक प्रवृतियों के बारे में गुप्त सूचना मिली थी। जिसके आधार पर अलग-अलग टीमों ने शुक्रवार को कार्रवाई कर उन्हें हिरासत में लिया। तीनों के खिलाफ एटीएस ने भारतीय दंड संहिता की धारा 121(ए), 124 (ए), 153 (ए) व 120 (बी) के तहत मामला दर्ज किया है।

यहां उल्लेखनीय है कि करीब दस साल पूर्व भी पुलिस ने सूरत समेत दक्षिण गुजरात के शहरी क्षेत्र में सरकार के खिलाफ हिंसक आंदोलन की मुहिम चलाने के आरोप में कई लोगों को गिरफ्तार किया था। इनमें अन्य राज्यों के कुछ वांछित नक्सली भी शामिल थे। लेकिन पुलिस कोर्ट में हिंसक आंदोलन साबित नहीं करपाई थी। उनमें से अधिकतर को कोर्ट ने रिहा कर दिया था।

सतीपति संप्रदाय के लोगों को उकसाना

एटीएस का दावा हैं कि तीनों सरकार के खिलाफ आदिवासियों को उकसा कर बगावत करवाने का प्रयास कर रहे थे। इसके लिए वे पिछले वर्षो से मुख्यधारा में शामिल हो रहे दक्षिण गुजरात के क्षेत्रिय सतीपति संप्रदाय से जुड़े आदिवासियों को उकसा रहे थे। साथ ही यहां भी पत्थलगड़ी मुहिम चला कर गुजरात के अन्य आदिवासियों को सरकार के खिलाफ हिंसा के लिए भडक़ाने का प्रयास कर रहे थे। इसके लिए वे गुप्त रूप से फंड भी जमा कर रहे थे। लोगों से चंदा ले रहे थे। इनके संपर्क में और कौन-कौन लोग थे व उनके और कितने साथी गुजरात में छिपे है। इस बारे में पूछताछ की जा रही है।

क्या है पत्थलगड़ी मुहिम ?

झारखंड के खूंटी जिला क्षेत्र के आदिवासी समुदाय में मृत व्यक्ति की समाधी पर बड़ा पत्थर रखने का रिवाज है। ताकी जहां मृत व्यक्ति को दफनाया गया हो उस जगह की पहचान हो सके तथा शव को जानवरों से भी बचाया जा सके। समय-समय पर आदिवासी वहां जाकर अपने चहेतों को याद करते हैं।

2016 में इन पत्थरों पर सरकार व व्यवस्था विरोधी संदेश लिख कर आदिवासियों को अवैध रूप से हिंसा के लिए उकसाने और उन्हें कथिततौर पर नक्सलवाद से जोडऩे की मुहिम शुरु हुई थी। पिछले कुछ समय में वहां इसका व्यापक प्रभाव देखने को मिला था। वहां कुछ हिंसक घटनाएं भी हुई है।

इसी मुहिम को पत्थलगड़ी रूप में जाना जाता हैं। माना जाता हैं कि जल, जंगल और जमीन पर आदिवासियों के सार्वभौमिक अधिकार से जुड़ी यह मुहिम दक्षिण गुजरात के सतीपति संप्रदाय की मुहिम से प्रभावित होकर शुरु हुई है और झारखंड के खूंटी जिले में जोर पकड़ रही हैं। हालांकि सती पति संप्रदाय से जुड़े लोग बताते हैं कि हम किसी हिंसक आंदोलन का समर्थन नहीं करते। हक के लिए हमारी लड़ाई अहिंसक है।

क्या है सतीपति संप्रदाय ?

सती यानी माता और पति यानी पिता इन्हीं से मिल कर बना है ‘सतीपति’ ये आदिवासी किसी धर्म में नहीं मानते है। माता पिता और प्रकृति खास कर अन्न की पूजा करते है। खुद को भारत का मूल निवासी मेहमान है। शेष सभी को बाहरी मानते है। उनकी मान्यता हैं कि 1930 में रानी विक्टोरिया ने उन्हें ब्रिटिश लीज खत्म होने पर जल जंगल और जमीन की मालिकी का हक दिया था।

वे खुद को एसी/भारत सरकार कुटुम्ब परिवार कहते है। कटासवण वाले दादा केश्रीसिंह गामित को अपना नेता मानते है। दिल्ली की भारत सरकार के कानूनों को नहीं मानते। कहते है कानून से सिर्फ प्रकृति का होता है। ये लोग मतदाता कार्ड, राशन कार्ड नहीं बनवाते और न ही सरकारी मदद लेते है।

बस,ट्रेन में टिकट भी नहीं लेते। सरकार और सरकारी नीतियों का अपने विवेक पूर्ण व्यवहार और तर्को से शांतिपूर्ण ढंग से पुरजोर विरोध करते है। इस संप्रदाय के लोग गुजरात के अलावा महाराष्ट्र, मध्यप्रदेश और राजस्थान के आदिवासी बहुल इलाकों में भी बताए जाते हैं।

कोविड टेस्ट की प्रक्रिया चल रही हैं


एटीएस के अधिकारी सीआर जाधव ने बताया कि पकड़े गए आरोपियों के कोविड टेस्ट की प्रक्रिया चल रही है। उनका टेस्ट होने के बाद गिरफ्तार कर कोर्ट में पेश किया जाएगा और रिमांड की मांग की जाएगी।