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‘सूरदास उद्धवजी के अवतारÓ

धनुर्मलमास में श्रीभक्तमाल कथा का आयोजन

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'सूरदास उद्धवजी के अवतारÓ

सूरत. श्रीरामकृष्ण सेवा समिति की ओर से धनुर्मलमास के उपलक्ष में वेसू के वीआईपी रोड पर मनभरी फार्म में आयोजित श्रीभक्तमाल कथा में व्यासपीठ से वृंदावन के गौरदास महाराज ने संत सूरदास के वृतांत को बुधवार को आगे बढ़ाया। उन्होंने बताया कि वे उद्धवजी के अवतार है और वल्लभाचार्य महाराज से सूरदास ने दीक्षा ग्रहण की थी।
भगवान के अनन्य भक्तों पर नाभाजी महाराज रचित श्रीभक्तमाल कथा के तीसरे दिन महाराज ने पंडाल में श्रद्धालुओं को बताया कि दीक्षा के बाद सूरदासजी महाराज को कृष्ण भगवान के दर्शन होने लगे और तभी से वे भगवान की लीला को देखकर भजन गाने लगे। सूरदासजी रचित भजन वर्तमान में भी भक्तजन गाकर अपना जीवन धन्य बना रहे है। सूरदासजी को जीवनभर समय-समय पर भगवान के दर्शन होते रहे और बादशाह अकबल ने सूरदासजी के दर्शन कर स्वयं को धन्य माना था। कथा में महाराज ने बताया कि एक दिन श्रीजी महाराज ने सूरदासजी से कहा कि अब तुम्हारे बिना मन नहीं लगता, तब सूरदासजी ने मन बना लिया कि अब संसार से जाना है। तभी उनके गुरु के पुत्र वि_लनाथजी ने सभी भक्तों से कहा कि आज भक्ति का जहाज जा रहा है और सारे मुख्य भक्तगण सूरदासजी के पास पहुंच गए। तब संत ने निवेदन किया कि मेरी पीठ गिरिराज की तरफ नहीं रहनी चाहिए और भक्तों ने उन्हें ओंधा लैटा दिया। इसी स्थिति में सूरदासजी ने श्रीकृष्ण शरणं मम का जाप करते हुए ठाकुरजी के चरणों में प्राण त्याग दिए। कथा के दौरान सांसद सीआर पाटिल, विधायक संगीता पाटिल, भगवान मालाणी, भंवरलाल, दामोदर पेड़ीवाल समेत कई श्रद्धालु मौजूद थे।

भागवत कथा की शुरुआत


शहर में भटार रोड पर वैष्णोदेवी मंदिर के आदर्श समाज भवन में गो सेवार्थ श्रीजी जानकीनाथ गोशाला सेवा समिति की ओर से श्रीमद्भागवत कथा की शुरुआत बुधवार से की गई। समिति के महामंत्री राजेश भारुका ने बताया कि कथा की शुरुआत में सुबह राममंदिर, रामवाड़ी से शोभायात्रा निकाली गई और दोपहर में आयोजित कथा में व्यासपीठ से परमेश्वरलाल शास्त्री ने भागवत महात्म्य के बारे में बताया। शाी ने कहा कि भागवत कथा एक प्रसाद है, इसे जितना बांटा जाए उतनी वृद्धि होती है। भागवत महापुराण है जो पुरातन होते हुए भी नूतन बनी रहती है। गाय कि रक्षा के लिए ज्ञान बल, भुज बल एवं धन बल होने चाहिए। कथा के दौरान समिति के ब्रह्मदत्त भारुका, चिरंजीलाल अग्रवाल, लक्ष्मीनारायण भारुका, सांवरमल शर्मा समेत अन्य श्रद्धालु मौजूद थे।