
पर्सनल लोन के प्री-पेमेंट पर चार्ज नहीं वसूल सकती बैंक
सूरत. पर्सनल लोन की राशि वक्त से पहले चुकाने पर बैंक ग्राहक से प्री-पेमेंट चार्ज नहीं वसूल सकती। यह महत्वपूर्ण फैसला ग्राहक कोर्ट ने सुनाया है। एक मामले की सुनवाई करते हुए कोर्ट ने ग्राहक की याचिका मंजूर करते हुए प्री-पेमेंट चार्ज के तौर पर वसूली राशि नौ फीसदी ब्याज के साथ चुकाने का बैंक का आदेश दिया।
हेमंतकुमार और उनकी पत्नी मनीषा जैन ने एचडीबी फाइनेंसियल सर्विस लिमिटेड के खिलाफ अधिवक्ता श्रेयस देसाई के जरिए ग्राहक कोर्ट में शिकायत की थी। याचिका के मुताबिक बैंक के प्रतिनिधि ने दम्पती से संपर्क कर उन्हें लोन ऑफर किया था। प्रतिनिधि से बातचीत करने के बाद हेमंतकुमार और मनीषा जैन ने पहले वर्ष 2010 में 40 लाख और वर्ष 2012 में 18 लाख रुपए का लोन लिया। वर्ष 2014 को दोनों लोन की किस्तें नियमित भरते रहे। इसके बाद हेमंत जैन ने बैंक के समक्ष प्रस्ताव रखा कि लोन की बकाया राशि एक साथ चुकाना चाहता है, जिस पर बैंक ने प्री-पेमेंट चार्ज के तौर पर 3.03 लाख रुपए भरने को कहा। यह चार्ज नहीं भरने पर बैंक ने लोन के लिए मार्गेज रखी संपत्ति के दस्तावेज नहीं लौटाने की धमकी दी। धमकी से डरे हेमंतकुमार ने बैंक के मुताबिक लोन की राशि के साथ प्री-पेमेंट चार्ज के तौर पर 3.03 लाख रुपए भी जमा करवा दिए, लेकिन बाद में ग्राहक कोर्ट में बैंक के खिलाफ शिकायत की। सुनवाई के दौरान अधिवक्ता देसाई ने दलीलें पेश करते हुए कोर्ट से कहा कि लोन देते वक्त बैंक की ओर से ऐसी कोई शर्त ग्राहक को बताई नहीं गई थी और पर्सनल लोन में बैंक प्री-पेमेंट चार्ज नहीं वसूल सकती। कोर्ट ने दलीलों को ध्यान में रखते हुए याचिका मंजूर कर ली थी और प्री-पेमेंट के तौर पर वसूली गई राशि नौ फीसदी ब्याज के साथ चुकाने का बैंक को आदेश दिया था। कोर्ट के फैसले को बैंक की ओर से राज्य की उच्च ग्राहक अदालत में चुनौती दी गई। सुनवाई के दौरान अधिवक्ता देसाई ने दलीलें पेश की कि कानूनी प्रावधान के मुताबिक अपील करने की मियाद 30 दिन की होती हंै, जबकि बैंक की ओर से 818 दिन बाद अपील की गई है। इस विलंब का कारण भी कोर्ट के समक्ष पेश नहीं कर पाई है। कोर्ट ने इन दलीलों को ध्यान में रखते हुए बैंक की याचिका नामंजूर कर दी और सूरत ग्राहक कोर्ट के फैसले को सही ठहराया।
Published on:
12 Jan 2019 08:15 pm
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