
जीने की कला सिखाती है भगवद गीता : भाग्येश ज्हा
सूरत. गीता के प्रबंधन सूत्र की व्याख्या करते हुए गुजरात साहित्य अकादमी के अध्यक्ष भाग्येश ज्हा ने कहा कि गीता हमें जीने की कला सिखाती है। भविष्य के बजाय वर्तमान में जियो और उसी पर ध्यान केंद्रित करो, यही वर्तमान की शक्ति है।
दक्षिण गुजरात चैंबर ऑफ कॉमर्स एंड इंडस्ट्री और भारत विकास परिषद सूरत मेन की संयुक्त पहल पर नानपुरा स्थित समृद्धि भवन में 'भगवद गीता - द बेस्ट गाइड टू मैनेजमेंट - गीता पंचामृत' श्रृंखला का आयोजन किया गया है। 'गीता - व्यक्तित्व विकास संहिता' विषय पर बोलते हुए गुजरात साहित्य अकादमी के भाग्येश ज्हा ने गीता में प्रबंधन के सूत्र बताए। उन्होंने कहा कि गीता अकेला ग्रंथ है जो व्यक्तित्व निर्माण में 360 डिग्री विकास की जरूरत की बात करता है। गीता का मूल मंत्र है कि हर स्थिति में कर्म करते रहो। मुश्किल वक्त में भी स्थित प्रज्ञ रहने का मंत्र गीता में मिलता है। गीता में भक्ति, कर्म और ज्ञान तीनों तत्वों का सार निहित है। गीता कहती है कि हर व्यक्ति में कृष्ण हैं। उन्होंने कहा कि श्रीमद्भगवद्गीता में सभी वेदों, उपनिषदों और पुराणों का सार निहित है। गीता का नियमित पाठ करने और इसमें बताए गए सूत्रों को अमल में लाने से व्यक्ति के सभी संकट दूर हो सकते हैं। भगवान की पूजा समर्पण के साथ करनी चाहिए। उन्होंने कार्यक्रम में उपस्थित श्रोताओं की जिज्ञासाओं का निराकरण भी किया।
इससे पहले चैंबर अध्यक्ष हिमांशु बोडावाला ने कहा कि आधुनिक प्रबंधन में गीता की शिक्षाओं से प्रेरित दृष्टि, मिशन, योजना, नेतृत्व और प्रेरणा जैसी विभिन्न अवधारणाएं शामिल हैं। दुनिया भर के प्रबंधन गुरुओं ने गीता की शिक्षाओं को अपने प्रबंधन सिद्धांतों में शामिल किया है। भारत विकास परिषद सूरत के अध्यक्ष रुपिन पच्चीगर ने कहा कि भगवद गीता को हार्वर्ड यूनिवर्सिटी ने एक पाठ्यपुस्तक के रूप में स्वीकार किया है। यह ज्ञान, जीवन शैली और प्रबंधन का ग्रंथ है। चेम्बर के मानद मंत्री भावेश टेलर ने कार्यक्रम का संचालन किया और मानद कोषाध्यक्ष भावेश गढ़िया ने आभार व्यक्त किया।
Published on:
08 Feb 2023 07:18 pm
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