
BHARUCH NEWS: जल के देव हुए जल में विर्सजित
भरुच. भरुच शहर में सप्तमी से शुरू हुआ मेघराजा का मेला मेघराजा की विदाई के साथ रविवार को संपन्न हो गया। गुजराती पंचांग के मुताबिक श्रावण दशमी रविवार की देर शाम शहर के भोईवाड़ से ढोल-नगाड़े व आतिशबाजी के बीच धूमधाम से मेघराजा की सवारी निकली। जिसमें लोगों का भारी हुजूम लगा रहा। मेघराजा से अगले साल फिर आने की कामना के साथ भक्तों ने जल के देवता का विर्सजन पवित्र नर्मदा नदी के जल में किया।
भरुच में दो साल के बाद मेघराजा के मेले की असली रंगत इस साल देखने को मिली। वाल्मीकि, भोई तथा खारवा समाज की छडिय़ों के मिलन के साथ पुराने भरुच शहर की संकरी गलियों में झूल रही छड़ी को देखने के लिए लोगों की भारी भीड़ उमड़ पड़ी थी। रविवार देर शाम आतिशबाजी व ढोल-नगाड़े के बीच लोगों ने मेघराजा को भव्य विदाई दी। कोरोना की महामारी के कारण पिछले दो साल से मेघराजा का मेला नही लग पा रहा था। कहा जाता है कि दो सौ साल पहले भरुच में भीषण सूखा पडऩे के बाद उस समय भोईवाड़ में मेघराजा की प्रतिमा बनाकर स्थापित की गई थी व तब से भरुच शहर में मेघराजा का मेला आयोजित किया जाता है। पूरे देश में मात्र भरुच शहर में ही मेघराजा के मेले का आयोजन किया जाता है।
मेला समाप्त होने के बाद साफ-सफाई में जुटी पालिका
चार दिनों तक चलने वाले मेघराजा के मेले के समापन के बाद भरुच नगरपालिका सोमवार से साफ-सफाई में जुट गई। मेले के दौरान पांचबत्ती से सोनेरी महल के बीच लगी दुकानों के हटने के बाद काफी मात्रा में कुड़ा-कचरा सडक़ किनारे बिखर गया था। नगरपालिका की सेनेटरी इंस्पेक्टर भूमिबेन व अरविंद भाई के निर्देशन में सोमवार को पूरे दिन अभियान चलाकर कुड़ा-कचरा साफ कराया गया। भूमिबेन ने बताया कि लगभग छह ट्रॉली कचरा मेला क्षेत्र से निकाला गया। पिछले चार दिनों से साफ-सफाई कराई जा रही थी मगर अंतिम दिन सफाई कर्मचारियों की पूरी टीम को लगाकर बड़े पैमाने पर सफाई कराई गई।
Published on:
22 Aug 2022 07:51 pm
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