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गणगौर के निकाले जा रहे बिन्दौळे

महिलाएं खुशी से इसमें हो रहीं शामिल

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सूरत

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Sunil Mishra

Mar 31, 2019

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गणगौर के निकाले जा रहे बिन्दौळे


सिलवासा. शहर में राजस्थानी गणगौर पर्व से धार्मिक माहौल बना हुआ है। सोसायटियों में रोजाना एक घर से दूसरे घर गणगौर के बिन्दौळे निकाले जाते हैं। इनमें बड़ी संख्या में महिलाएं सम्मिलित हो रही हैं। राणी सती मंडल की ओर से ईसर-गौर पूजा एवं लोकनृत्य का आयोजन हुआ।
शहर के प्रमुख विहार, पार्क सिटी, आमली तिरुपति रेजिडेंसी, ग्रीनपार्क, बाविसा फलिया, लवाछा अंबिका पार्क, दादरा सांई कॉम्प्लेक्स में गणगौर उत्सव चल रहा है। पूजा के बाद विधि विधान से एक घर से दूसरे घर पर गणगौर प्रतिमाओं का मान-मनवार किया जाता है। एक घर पर बिन्दौळे के बाद दूसरे दिन प्रतिमाएं अन्य घर ले जाई जाती हैं। यह सिलसिला 8 अप्रेल तक चलेगा। अंतिम दिन शाम को गणगौर सवारी निकाली जाएगी। बाविसा फलिया में दोपहर के बाद महिलाएं और युवतियों ने एकत्रित होकर पहले गणगौर की पूजा की, बाद में लोकनृत्य करती हुई गौर ए गणगौर के गीत गाए। ग्रीनपार्क में महिलाओं के साथ लड़कियां भी गणगौर पूजन में हिस्सा ले रही हैं। यहां महिलाओं ने गणगौर पूजन के दौरान गौरीजी की कथा सुनी। राणी सती मंडल की महिलाओं ने ईसर-गौर का भेष धारण करके भव्य कार्यक्रम रखा, जिसमें राजस्थानी भाषा में गणगौर के गीत गुनगुनाए। लवाछा में गणगौर प्रतिमाओं को नए कपड़े पहनाकर पूजा की। व्रतधारी महिलाओं ने बिंदी, दूब, मोली, काजल, मेहंदी से गणगौर प्रतिमाओं का श्रंृगार किया। आयोजन के बाद ईसर-गौर प्रतिमा को सिर पर रखकर समूह में गीत गाती हुई बिन्दौळे निकाले।

गणगौर मुख्यत: महिलाओं का पर्व
पूजन करने वाली सुमन, पूजा, संतोष ने बताया कि गणगौर मुख्यत: महिलाओं का पर्व है, जो अखंड सुहाग और सुयोग्य वर के लिए किया जाता है। सुहागिनें अपने पति की लंबी आयु के लिए यह व्रत रखती हैं। व्रत के पीछे मान्यता है कि भगवान शिव व पार्वती ने समस्त स्त्री समाज को सौभाग्य का वरदान दिया था। इसमें मिट्टी से गौरी की स्थापना करके पूजन किया जाता है। व्रत के दौरान होली के बाद शीतला सप्तमी से चैत्र शुक्ल तृतीया तक ईसर गौर के गीत गाए जाते हैं।