
सूरत।अमरोली न्यू कोसाड रोड पर
जलाराम सोसायटी निवासी पैंतीस वर्षीय महिला की मृत्यु के बाद परिजनों ने अंगदान कर
समाज को नई दिशा दिखाने की कोशिश की। डोनेट लाइफ संस्था की मदद से परिजन किडनी और
लीवर के साथ चक्षु दान के लिए तैयार हो गए। अहमदाबाद आईकेडीआरसी में प्रत्यारोपण की
कार्रवाई पूरी की गई।
गायत्री गिरीश चौहाण (35) को गले में तकलीफ, पेट
में जलन और घुटने में जकड़न के साथ तीन अप्रेल को निष्ठा अस्पताल में डॉ. विजय लुखी
के यहां भर्ती कराया गया था। बेहोशी की हालत में नौ अप्रेल को उसे आयुष आईसीयू एंड
मल्टी स्पेशलिस्ट अस्पताल में वेंटिलेटर पर शिफ्ट किया गया। यहां सीटी स्कैन में
पता चला कि गायत्री के दिमाग की नस में खून की गांठ होने से लकवे का असर हुआ
है।
दिमाग में सूजन के कारण वह बेहोश थी। पेट में खून पहुंचाने वाली
धमनी तथा दाहिनी किडनी को खून पहुंचाने वाली धमनी में भी खून की गांठ थी। डॉ. विजय
के अलावा डॉ. किशोर विरडिया, डॉ. सिध्धार्थ जैन, डॉ. परेश झांझमेरा और डॉ. हसमुख
सोजित्रा ने उसकी जांच की।
11 अप्रेल को डॉ. परेश झांझमेरा और डॉ.
हसमुख सोजित्रा ने उसे ब्रेन डेड घोषित कर दिया। इसके बाद आयुष आईसीयू के इंचार्ज
डॉ. रमेश पटेल ने डोनेट लाइफ के प्रमुख नीलेश मांडलेवाला से सम्पर्क किया और मरीज
की जानकारी दी। मांडलेवाला ने गायत्री के पति गिरीश तथा परिजनों को अंगदान के बारे
में जानकारी दी। परिजन अंगदान के लिए तैयार हो गए।
बाद में अहमदाबाद की
आईकेडीआरसी के डॉ. प्रांजल मोदी से सम्पर्क किया गया। डॉ. प्रांजल ने किडनी और लीवर
का दान स्वीकार किया, जबकि दो चक्षुओं का दान लोकदृष्टि चक्षु बैंक ने स्वीकार
किया। किडनी अहमदाबाद की पचपन वर्षीय महिला कुन्जुमोल थोमस तथा लीवर कोडीनार निवासी
जेसिंग जेठावाला (44) में प्रत्यारोपित किया गया। गिरीश कतारगाम क्षेत्र में
टेलरिंग का कार्य करते हैं। उनकी एक पुत्री श्वेता (13) और एक पुत्र करण (9) है।
सूरत समेत दक्षिण गुजरात से अब तक ब्रेन डेड घोषित व्यक्ति के परिजनों
से मिलकर नीलेश मांडलेवाला और डोनेट लाइफ ने 111 किडनी, 32 लीवर, तीन पेन्क्रीयाज
और 90 चक्षु दान में मिले, जिनसे 236 व्यक्तियों को नया जीवन मिला है।
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