
आधी आबादी की अधूरी जिंदगी को मिलेगा नया आयाम
विनीत शर्मा
सूरत. प्रदेश की अकेली महिला यूनिवर्सिटी शुरू करने के बाद वनिता विश्राम ट्रस्ट ने अब आधी आबादी की अधूरी जिंदगी को नया आयाम देने की पहल की है। विश्वविद्यालय प्रशासन ने इसके लिए संगांथ अभियान शुरू किया है। इसके तहत विधवा महिलाओं को उनकी क्षमता के अनुरूप रोजगार दिलाने के प्रयास किए जाएंगे। इसके लिए वनिता विश्राम प्रशासन ने शहर में नियोक्ताओं के साथ संवाद शुरू किया है। वनिता विश्राम की स्थापना भी दो विधवा महिलाओं ने ही की थी। उस वक्त ही उन्होंने महिला उत्थान के लिए रोडमैप दे दिया था।
समाज में विधवा महिलाओं की स्थिति आज भी बेहतर नहीं है। साथी के अभाव में आधी-अधूरी जिंदगी को पूरा करना विधवा महिला के लिए आसान नहीं है। वर्ष 1907 में दो विधवा महिलाओं बाजीगौरीबेन और शिवगौरीबेन ने जब वनिता विश्राम की नींव रखी थी, महिला उत्थान का रोडमैप भी सामने रख दिया था। ट्रस्ट संचालित वनिता विश्राम कॉलेज को राज्य की पहली महिला यूनिवर्सिटी का दर्जा दिलाने के बाद वनिता विश्राम ट्रस्ट ने अब बाजीगौरीबेन और शिवगौरीबेन के अधूरे सपने को पूरा करने का बीड़ा उठाया है। इसके तहत विधवा महिलाओं को सम्मानजनक स्थिति दिलाने के साथ ही उन्हें आत्मनिर्भर बनाने का काम किया जाएगा। इसके लिए शुरू किए अभियान को उन्होंने संगांथ नाम दिया है।
वनिता विश्राम ट्रस्ट के मुताबिक संगांथ के माध्यम से उन महिलाओं को सशक्त और आत्मनिर्भर बनाने के प्रयास किए जाएंगे, जिन्होंने अपने जीवनसाथी को खो दिया है। जिंदगी में आए इस अधूरेपन को पूरा करने के लिए उनके कौशल्य और ज्ञान के अनुरूप काम खोजा जाएगा और नियोक्ताओं से मिलकर नौकरियां दिलाने की कोशिश होगी। साथ ही गुजरात सरकार की विभिन्न योजनाओं का लाभ दिलाने के प्रयास होंगे। ऐसी महिलाओं को चिन्हित करने की प्रक्रिया शुरू कर दी गई है। वनिता विश्राम से जुड़ी सुजाता देसाई ने बताया कि इसके लिए वनिता विश्राम की वेबसाइट पर संगांथ में महिलाओं का रजिस्ट्रेशन किया जाएगा।
मुश्किलें होंगी दूर
सुजाता ने बताया कि कई ऐसी महिलाएं सामने आई हैं, पति की मृत्यु के बाद परिवार में कोई दूसरा व्यक्ति कमाने वाला नहीं है। इन विधवा महिलाओं के लिए नौकरी पहली बड़ी जरूरत है। इन महिलाओं को रोजगार दिलाने के साथ ही उनको जरूरी ट्रेनिंग के प्रयास भी किए जाएंगे। इससे विधवा महिलाओं को परिवार पालने में आ रही मुश्किलें दूर होंगी। उन्होंने कहा कि कई ऐसी महिलाएं भी हैं जो विवाह से पहले आत्मनिर्भर थीं, लेकिन पारिवारिक जरूरतों को प्राथमिकता देते हुए अपने व्यावसायिक करियर को बीच में ही छोड़ दिया था। जीवनसाथी को खोने के बाद उनके पास काम पर लौटने के विकल्प भी सीमित रह गए हैं। ऐसी महिलाओं के लिए वनिता विश्राम की यह पहल कारगर साबित हो सकती है।
Updated on:
06 Jul 2021 07:10 pm
Published on:
06 Jul 2021 06:57 pm
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