
Campaign to free the beggars from Surat station
सूरत।सूरत स्टेशन को भिखारी मुक्त करने के लिए बुधवार से अभियान शुरू हो गया। पहले दिन स्टेशन परिसर से नौ भिखारियों को पकड़ कर आश्रम पहुंचाया गया। रेलवे सुरक्षा बल के आइजी ने हाल ही सूरत स्टेशन के निरीक्षण के दौरान अधिकारियों को भिखारी मुक्त स्टेशन परिसर बनाने के निर्देश दिए थे। राजस्थान पत्रिका ने एक सितम्बर को इस बारे में खबर प्रकाशित की थी।
रेलवे सुरक्षा बल के आइजी ए.के. सिंह ने ३० अगस्त को सूरत और उधना स्टेशन का निरीक्षण किया था। आइजी ने सूरत में दक्षिण गुजरात के सभी रेलवे सुरक्षा बल निरीक्षकों, क्राइम ब्रांच निरीक्षक, इंटेलीजेंस विभाग के निरीक्षक, पैसेंजर सुरक्षा विभाग के निरीक्षकों के साथ बैठक की थी। उन्होंने अधिकारियों को स्टेशन परिसर को भिखारी मुक्त बनाने का निर्देश दिया था। बुधवार को सूरत रेलवे सुरक्षा बल थाना निरीक्षक ईश्वर सिंह यादव ने जवानों को भिक्षुकों को पकडऩे के निर्देश दिए। इन भिक्षुकों को सुरक्षित ठिकानों पर भेजने की व्यवस्था पहले ही कर ली गई थी।
इसके लिए मानव सेवा चेरिटेबल ट्रस्ट के सदस्य राजेन्द्र गौतम से सम्पर्क किया गया था। गौतम ने स्टेशन से पकड़े गए भिक्षुकों के लिए अमरोली सायण रोड के गोठान आश्रम में रहने की व्यवस्था की है। यादव ने बताया कि बुधवार को स्टेशन परिसर से नौ भिक्षुक पकड़े गए। इनमें पांच पुरुष और चार महिलाएं थीं। इन भिक्षुकों ने बताया कि उनके पास न काम है और न रहने के लिए जगह। रेलवे सुरक्षा बल ने सभी भिक्षुकों को मानव सेवा चेरिटेबल ट्रस्ट को सौंप दिया।
उल्लेखनीय है कि रेलवे सुरक्षा बल के आइजी ने सूरत स्टेशन का निरीक्षण करने के दौरान प्लेटफॉर्म तथा फुटओवर ब्रिज पर कुछ जगह लोगों को सोए और बैठे हुए देखा था। उन्होंने रेलवे सुरक्षा बल के थाना निरीक्षकों के साथ बैठक में ट्रेनों तथा प्लेटफॉर्म पर होने वाले अपराधों पर लगाम लगाने के लिए जरूरी निर्देश के साथ रेल परिसर को भिक्षुक मुक्त बनाने के निर्देश दिए थे।
चैकअप के दौरान बलात्कार का मामला
चैकअप के दौरान बलात्कार के मामले में बुधवार को कोर्ट ने सीआरपीसी की धारा 164 के तहत विवाहिता का बयान दर्ज किया। आरोपी डॉक्टर प्रफुल दोषी का रिमांड पूरा होने पर उसे न्यायिक हिरासत में लाजपोर जेल भेज दिया गया। अठवा लाइंस थाने के जांच अधिकारी ने चीफ कोर्ट में धारा 164 के तहत विवाहिता का बयान दर्ज कराने के लिए याचिका दायर की थी। इसे चीफ कोर्ट ने महिला न्यायाधीश को स्थानांतरित कर दिया था।
कोर्ट के आदेश पर बुधवार को विवाहिता कोर्ट में पेश हुई और न्यायाधीश के समक्ष बयान रिकॉर्ड करवाया। नानपुरा के मी एंड मम्मी अस्पताल के संचालक डॉ. दोषी पर २८ वर्षीय विवाहिता ने चैकअप के दौरान बलात्कार का आरोप लगाया था। आरोप के मुताबिक विवाहिता आइवीएफ ट्रीटमेंट के लिए ४ सितम्बर को अपने पति के साथ अस्पताल गई थी। चैकअप के दौरान दोषी ने उसे इंजेक्शन देकर जान से मारने की धमकी दी और बलात्कार किया। विवाहिता ने इस बारे में परिजनों को बताया और पुलिस से संपर्क किया।
Published on:
26 Sept 2018 09:49 pm
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