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Danah, Daman-Diu Integration Bill: दानह, दमण-दीव एकीकरण बिल संसद में पेश

बुधवार को हो सकती है बिल पर चर्चाकेन्द्रीय राज्यमंत्री जी.किशन रेड्डी ने संसद में पेश किया Bill can be discussed on Wednesday Union Minister of State G. Kishan Reddy presented in Parliament

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सूरत

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Sunil Mishra

Nov 26, 2019

Danah, Daman-Diu Integration Bill: दानह, दमण-दीव एकीकरण बिल संसद में पेश

Danah, Daman-Diu Integration Bill: दानह, दमण-दीव एकीकरण बिल संसद में पेश

सिलवासा/दमण. दादरा नगर हवेली एवं दमण दीव एकीकरण बिल2019 मंगलवार को संसद में केन्द्रीय राज्यमंत्री जी.किशन रेड्डी ने पेश किया। इस पर विस्तृत चर्चा बुधवार को हो सकती है। संसद में बिल पास होने के बाद दानह, दमण और दीव एक संघ प्रदेश के नाम से जाने जाएंगे। केन्द्र सरकार के इस कदम का दानह एवं दमण के सांसदों ने स्वागत किया है।
कहा जा रहा है कि दादरा नगर हवेली, दमण दीव के विलय से प्रशासनिक कामकाज में सुविधा होगी। लोगों को बेहतर प्रशासन मिलेगा। दोनों संघ प्रदेशों के बीच की दूरी मात्र 35 किमी है। इसके बावजूद दोनों का अलग-अलग सचिवालय और बजट बनता है। हाल ही केन्द्र सरकार ने जम्मू कश्मीर राज्य को दो केन्द्र शासित प्रदेश जम्मू कश्मीर एवं लद्दाख में बांट दिया था। इसके बाद दानह, दमण दीव के विलय का रास्ता साफ हो गया। देश में फिलहाल 9 केन्द्र शासित प्रदेश हैं। दानह, दमण, दीव एक होने से यह संख्या 8 रह जाएगी।

दानह सांसद ने गृहमंत्री अमित शाह से मुलाकात की
दादरा नगर हवेली के सांसद मोहन डेलकर ने गृहमंत्री अमित शाह से मुलाकात कर दादरा नगर हवेली और दमण-दीव की जनता में फैली ङ्क्षचता से अवगत कराया। मोहन डेलकर इस पर संसद में चर्चा करंेगे।

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क्या है विधेयक में
(1)दोनों प्रदेश एक हो जाएंगे, जिसका नाम दादरा नगर हवेली और दमण-दीव होगा
(2)अभी तक दोनों प्रदेशों के लिए अलग-अलग बजट आते थे,अब एक बजट होगा।
(3)दोनों प्रदेशों की सांसद सीटें यथावत रहेंगी, वह कम नहीं होगी।
(4)सचिवालय एक होगा तथा मुख्यालय दमण सचिवालय होगा।
(5)सचिवालय के कर्मचारियों का अन्य विभागों में विलय होगा।
(6)उच्च न्याय के लिए मुंबई हाईकोर्ट से जोड़ा है
(7)दोनों प्रदेशों की संस्कृति यथावत रहेगी,दमण में गोवा कल्चर और दानह में आदिवासी कल्चर।
(8)राष्ट्रपति के आदेश से एक्ट 139 में प्रशासक की नियुक्ति होगी।
(9)प्रदेश में केन्द्र और यूटी की योजना लागू रहेंगी।
(10)बायलोज,नियम आदि बने हैं उसमें जहां परिवर्तन की जरूरत होंगी, वहां परिवर्तन होगा। इसके साथ अन्य कई विषय भी शामिल किए गए हैं।

प्रदेश में मिनी एसेंबली मिलने के आसार बनेंगे: सांसद पटेल

दमण. संघ प्रदेश दमण-दीव और दानह के विलय को लेकर राजनीतिक पार्टियों और नेताओं ने हालांकि अभी तक चुप्पी साध रखी है। कोई खुलकर बोलने को तैयार नहीं है। कांग्रेस विलय के विरोध में है, लेकिन भाजपा के जनप्रतिनिधि इसका स्वागत कर रहे हैं।

दमण-दीव के सांसद लालूभाई पटेल ने बताया कि इस मुद्दों पर उन्होंने केन्द्रीय मंत्री अर्जुन मेघवाल के साथ बैठक कर प्रदेश के बारे में अवगत कराया। प्रदेश में किसी प्रकार का नुकसान नहीं होगा। सांसद ने बताया कि पर्यटन विकास और औद्योगिक विकास को भी बढ़ावा देना है। विलय होने के बाद जो डेली और कॉन्टेक्ट बेस पर कर्मचारी हैं उनको भी परमानेंट करने की मांग की जा रही है। सांसद ने कहा कि इस बारे में एक दो दिनों में संसद में चर्चा की जाएगी। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने आश्वासन दिया था कि इस प्रदेश को पांडिचेरी की तरह बना देंगे। इस प्रदेश में मिनी एसेंबली बनने के आसार हैं।

भाजपा बिल का स्वागत करती है: मजीद
दमण-दीव भाजपा के प्रवक्ता मजीद लदानी ने कहा कि दादरा नगर हवेली और दमण दीव विधेयक बिल 2019 पेश हुआ है उसका भाजपा स्वागत करती है। इससे प्रशासनिक खर्चे बचेंगे और प्रशासनिक व्यवस्थाओं का सरलीकरण होगा। दोनों प्रदेशों का मूल अस्तित्व कायम रखकर बिल बनाया गया है। दोनों प्रदेशों की जनता को किसी प्रकार का नुकसान नहीं होगा।


लोगों से बिना पूछे बिल पेश किया: केतन पटेल
दमण-दीव कांग्रेस पार्टी के अध्यक्ष केतन पटेल ने बताया कि संविधान दिवस पर गर्व महसूस होना चाहिए परन्तु दमण-दीव के लोग पहले से राष्ट्रपति शासन में जी रहे हैं। पटेल ने सवाल उठाया कि इन प्रदेशों को आपस में एक करने की जरूरत क्यों है। जब कांग्रेस की सरकार एवं शासन था। जब दमण-दीव के लोगों को पूछा था कि आपको केन्द्र शासित में रहना है या गुजरात में जाना है। उसके लिए एक पब्लिक ओपिनियन पोल एक्ट लागू किया था और लोगों को पूछकर निर्णय लिया था। आज किसी को पूछ नहीं रहे हैं, जबकि चुने हुए जनप्रतिनिधियों से पूछना चाहिए। एक मात्र सांसद के कहने से क्या होता है।

कांग्रेस नेता ने किया विरोध
दानह कांग्रेस कमेटी के सदस्य प्रभू टोकिया ने कहा कि दानह-दमण-दीव विलीनीकरण बिल 2019 काला दिवस के रूप में मनाया जाएगा। स्थानीय प्रशासन की मनमानी एवं केन्द्र सरकार के सामने दोनों प्रदेश के सांसद मूकदर्शक बने हुए हैं, जो निंदनीय है। दोनों संघ प्रदेशों के विलय से दादरा नगर हवेली का अस्तित्व समाप्त हो जाएगा। पूरा देश आज संविधान दिवस मना रहा है, वहीं दानह के लिए यह काला दिन से कम नहीं है।

संघ प्रदेश एकीकरण: मूल अस्तित्व और सभ्यता रहे बरकरार
सुनील मिश्रा
संघ प्रदेश दमण-दीव और दादरा नगर हवेली के विलय की चर्चा लम्बे समय से चल रही है। हालांकि कभी भी विरोध के स्वर तेज नहीं हो पाए। इन दिनों दोनों संघ प्रदेशों के विलय का कार्य तेजी से आगे बढ़ रहा है। २६ नवम्बर २०१९ को संविधान दिवस के दिन दमण-दीव, दादरा नगर हवेली एकीकरण बिल २०१९ संसद में पेश कर दिया गया। अब इस पर खुलकर चर्चा होगी। बिल पास होने पर विलय का रास्ता साफ हो जाएगा और इसके बाद दोनों संघ प्रदेश मिलकर एक हो जाएंगे। विलय को लेकर जहां कांग्रेस के नेता और पदाधिकारी दबे स्वर में विरोध कर रहे हैं। वहीं दमण-दीव सांसद लालूभाई पटेल और स्थानीय भाजपा नेता इसका भरपूर स्वागत कर रहे हैं। निर्दलीय जीते दानह सांसद मोहन डेलकर ने अपने पत्ते अभी तक नहीं खोले हैं। हालांकि उन्होंने केन्द्रीय गृहमंत्री अमित शाह से मिलकर अपनी चिंताओं से अवगत कराया है। उनकी चिंता किस बात को लेकर यह स्पष्ट नहीं हो पाया है। दोनों संघ प्रदेशों की सभ्यता एक दूसरे से भिन्न है। दादरा नगर हवेली में जहां आदिवासी कल्चर की प्रमुखता है, वहीं दमण-दीव पर्यटक स्थल होने से गोवा जैसे खुलेपन वाले कल्चर का अहसास कराते हैं। यही दोनों संघ प्रदेशों की मूल आत्माओं में अंतर है। भौगोलिक दृष्टि से दादरा नगर हवेली और दमण एक दूसरे के नजदीक हैं। दोनों के बीच करीब ३० किमी का ही अंतर है। वहीं दीव इन दोनों से काफी दूरी पर है। जो कि गुजरात के ज्यादा करीब है। दोनों संघ प्रदेशों की अर्थव्यवस्था उद्योगों के अलावा पर्यटन तथा शराब बिक्री पर निर्भर है। विलय का स्वागत करने वालों का मानना है कि दोनों संघ प्रदेशों के विलय का सकारात्मक असर पड़ेगा। सरकारी खर्चे बचेंगे, प्रशासनिक व्यवस्थाओं का भी सरलीकरण हो जाएगा। लोगों के कामकाज में सुधार होगा। संसदीय सीटों पर कोई असर नहीं होगा। लोकसभा की दोनों सीटें बरकरार रहेंगी। वहीं, विरोध करने वालों का मानना है कि विलय से पूर्व यहां की जनता और विपक्षी राजनीतिक दलों के प्रतिनिधियों का भी ओपिनियन लेना चाहिए था। क्या वे इसके लिए सहमत हैं या नहीं।