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महिलाओं ने की दशा माता की पूजा

परिवार के सुख-समृद्धि की कामना की

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महिलाओं ने की दशा माता की पूजा

महिलाओं ने की दशा माता की पूजा

सिलवासा. महिलाओं ने उपवास रखकर रविवार को मंदिरों में दशा माता की कथा सुनी एवं पीपल को कच्चा धागा बांधकर विष्णु उपासना की और दु: ख, क्लेश, विघ्न, परेशानी से निजात पाने के लिए दशा मां को मनाया। दशा माता की पूजा व व्रत चैत्र माह के कृष्ण पक्ष की दशमी तिथि को करने का विधान है। आमली शिव मंदिर, बालाजी, तिरुपति रेजीडेंसी मंदिर में महिलाओं ने शिवलिंग पर जल चढ़ाकर दशा मां की उपासना की। बालाजी अपार्टमेंट, सांई सृष्टि, सांई धाम, बालाजी टाउनशिप, योगी विहार, मंदिर फलिया, 66 केवी रोड़ पर महिलाओं ने समूह में दशा माँ की पूजा-अर्चना की एवं गीत गाएं। गायत्री मंदिर में दशा माता का व्रत रखकर महिलाओं ने नल-दमयंती की कथा सुनी। इसके बाद परिवार के सुख-समृद्धि की कामना करते हुए सूती धागे का डोरा गले में बांधा। पूजन करने वाली मालती चौधरी, सुनीता, वीणा ने बताया कि व्रत की खासियत है कि इसका उद्यापन नहीं होता है। यह व्रत जीवन पर्यन्त कभी भी किया जा सकता है।

शीतला अष्टमी: महिलाओं ने किया बास्योड़ा पूजन


सिलवासा. होली दहन के के आठवें रोज घर-घर शीतला अष्टमी की पूजा हुई। महिलाओं ने सुबह जल्दी शीतला मंदिर पहुंचकर पहले दिन तैयार कि या पवित्र प्रसाद, शीतल व्यंजन, चावल, नारियल, गुड़, अंकुरित अनाज, दही आदि का भोग लगाया एवं सुखी परिवार की कामना की।
इस साल शीतला माता की गुरुवार और शुक्रवार दो दिन पूजा-अर्चना की गई। शहर के बालाजी टाउनशिप और विनोबा भावे सिविल अस्पताल के शीतला माता मंदिर में दोपहर तक भीड़ रही।
इन्हें चेचक आदि कई रोगों का नाश करने वाली देवी भी कहा जाता है। चेचक से मुक्ति के लिए पहले दिन के बनाए शीतल व्यंजन, आटा, चावल, नारियल, गुड़, घी आदि से भी शीतला देवी की पूजा की जाती है। शीतला पूजन से चेचक, खसरा आदि प्रकोप घर से दूर रहते हैं।