
दंत रोगियों को चुकानी पड़ती है कई गुना कीमत
सिलवासा. प्रदेश में दंतरोग मरीजों को भारी खर्च झेलना पड़ रहा है। है। मरीजों को भारी कीमत पर मुंबई या सूरत की प्राइवेट क्लीनिकों से कृत्रिम दांत बनवाने पड़ते हैं। दांत खराब होने पर मरीज के दांत मोडिफाई किए जाते हैं। उसके बाद कृत्रिम दांत, कैप या कवच के लिए मरीज प्राइवेट लेबोरट्रीज पर आश्रित हो जाते हैं। प्राइवेट क्लीनिकों में मरीजों से कई गुना कीमत पर कृत्रिम दांत व कैप उपलब्ध कराते हैं। सरकारी श्री विनोबाभावे सिविल अस्पताल के डेंटिस्ट भी मुंबई की प्राइवेट लेबोरेट्री में कृत्रिम दांतों का ऑर्र्डर देते हैं।
दंत चिकित्सक प्रीति जैन के अनुसार मरीज को दांत हिलना, दंतक्षरण, कमजोर होना, दुखना, दांतो में कीड़े, ढलती उम्र्र में घिसाव, टूटना और सडऩ आदि कई रोग हो सकते हैं। दांत की बाहरी व रक्षा करने वाली परत इनेमल, उसके नीचे डेंटिन तथा नीचे मौजूद नस पल्प में कहीं भी रोग संक्रमण हो सकता है। दांतों में अटका खाना रोग संक्रमण का मुख्य कारक है। प्रारम्भ में जब दांत के इनेमल को नुकसान पहुंचता है, तब दांत में कैविटी बनने लगती है। कैविटी बढऩे से दांतों में दर्द होने लगता है, उसके बाद चिकित्सा के लिए फिलिंग या रूट कैनाल एक मात्र उपचार है। दंत चिकित्सक फिलिंग व रूट कैनाल करके दांतों की सुरक्षा व मजबूती के लेमिनेट कैप या क्राउन करते हैं। कैप के लिए मरीजों को बाहरी एजेंसियों के भरोसे छोड़ देते हैं, जहां मरीजों से नकली दांत व कैप के नाम पर जमकर लूटा जाता है।
खर्च कई गुना
दांत खराब होने की स्थिति में दंत चिकित्सक एक रूट कैनाल के करीब 3 हजार रुपए फीस लेते हैं। इसके बाद आर्टिफिशियल कैप का खर्च भी ढाई हजार से पांच हजार तक आता है। इसके चलते कई मरीज रूट कैनाल की बजाए जड़ों से उखाड़ देते हैं। उससे जबड़े के दांत कम पड़ जाते हैं।
Published on:
19 Mar 2019 06:33 pm
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