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भक्त गोपाल की भक्ति में बंधे राम

बृजमंडल का श्रीकृष्णलीला महोत्सव- 2018, कृष्ण कथा के दौरान हुआ राम की भाव विह्वलता का मंचन
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सूरत

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Vineet Sharma

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Updated: 7 Sep 2018, 10:43 PM IST

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भक्त गोपाल की भक्ति में बंधे राम

सूरत. भक्ति के आगे ज्ञान बौना साबित होता है और अज्ञानी की भक्ति के आगे भगवान बौने हो जाते हैं। श्रीकृष्णलीला महोत्सव 2018 के तहत आयोजित बृज की रासलीला के दौरान शुक्रवार को भक्त गोपाल की कथा का सार यही रहा। कथा के मंचन में भक्ति की महिमा का बखान किया गया।

बृजमंडल की ओर से सिटीलाइट स्थित महाराजा अग्रसेन भवन में श्रीकृष्णलीला महोत्सव 2018 का आयोजन किया जा रहा है। बृज की रास मण्डली राधाकृपा रासलीला संस्थान के कलाकारों ने शुक्रवार को भक्त गोपाल और उनकी भक्ति में बंधे श्रीराम के प्रसंग का मंचन किया।

रासाचार्य फतेहकृष्ण शर्मा ने भक्त गोपाल चरित्र के प्रसंग का वर्णन करते हुए बताया कि यह भान होते ही कि संसार में रिश्ते स्वार्थ की नींव पर टिके हैं, भक्त गोपाल वैराग्य लेकर परिवार छोडक़र संतों के साथ चल देते हैं। संतजन उन्हें गौ चराने की जिम्मेदारी दे हैं और जंगल जाते समय भोजन के लिए कच्ची सामग्री साथ रख देते हैं। साथ ही गोपाल को सीख देते हैं कि अब श्रीराम ही तुम्हारे पिता हैं और उन्हें भोजन कराए बगैर भोजन ग्रहण नहीं करना है।

इस सीख पर अमल करते हुए भोजन तैयार कर गोपाल के आह्वान पर श्रीराम आते हैं और गोपाल के हिस्से का भोजन भी चट कर जाते हैं। अगले दिन गोपाल दो जनों के लिए भोजन सामग्री ले जाते हैं तो श्रीराम के साथ माता सीता भी आती हैं और गोपाल फिर भूखे रह जाते हैं। तीसरे दिन जब लक्ष्मण भी उनके साथ आते हैं, तो चौथे दिन गोपाल पांच जनों के लिए भोजन सामग्री लेकर जाते हैं। इस दिन उनके साथ भरत और शत्रुघ्न भी भोजन पर आ जाते हैं और गोपाल को लगातार चौथे दिन भूखा रहना पड़ता है।

पांचवे दिन गोपाल फिर अतिरिक्त सामग्री लेकर जाते हैं तो संतों को संशय होता है। उधर, जंगल में जाकर गोपाल भोजन तैयार नहीं करते। जब श्रीराम अपने भाइयों, माता सीता और हनुमान के साथ आते हैं तो पता चलता है कि गोपाल ने भोजन नहीं पकाया है। श्रीराम के आने पर वे सभी को भोजन पकाने की जिम्मेदारियां सौंपकर खुद भगवान की सेवा में लग जाते हैं।

इस बीच जब संत यह देखने के लिए जंगल में आते हैं कि गोपाल इतनी सामग्री का करता क्या है तो देखते हैं कि हनुमान, लक्ष्मण, भरत, शत्रुघ्न व माता सीता भोजन पकाने की व्यवस्था में जुटे हैं तो अवाक रह जाते हैं। उन्हें गोपाल तो सेवा करता दिखता है लेकिन भगवान श्रीराम के दर्शन नहीं होते।

इस संशय को जब संतजन गोपाल से कहते हैं तो गोपाल भगवान श्रीराम से इसकी वजह पूछता है। उस समय भगवान बताते हैं कि संतों के पास ज्ञान तो बहुत है, लेकिन भक्ति का मूल भाव नहीं है, इसीलिए वह श्रीराम को नहीं देख पा रहे। शनिवार को द्रोपदी चीरहरण की कथा का मंचन किया जाएगा।