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कृष्ण से मिला था मीरा को भक्ति का वरदान

बृजमंडल का श्रीकृष्णलीला महोत्सव- 2018

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सूरत

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Vineet Sharma

Sep 05, 2018

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कृष्ण से मिला था मीरा को भक्ति का वरदान

सूरत. चिकसौली गांव की गोपी को अगले जन्म में कृष्ण से भक्ति का वरदान मिला था। यही गोपी कलियुग में गिरधर गोपाल की भक्त मीरा के नाम से प्रसिद्ध हुई।

बृजमंडल की ओर से सिटीलाइट स्थित महाराजा अग्रसेन भवन में श्रीकृष्णलीला महोत्सव 2018 का आयोजन किया जा रहा है। बृज की रास मण्डली राधाकृपा रासलीला संस्थान के कलाकारों ने बुधवार को मीरा चरित्र का मंचन किया। रासाचार्य फतेहकृष्ण शर्मा ने मीरा चरित्र के प्रसंग का वर्णन करते हुए बताया कि मीरा पूर्व जन्म में श्रीराधारानी के गांव बरसाना के पास चिकसौली गांव की गोपी थीं।

नंद गांव के एक गोप से विवाह हुआ तो ससुराल जाते समय मां ने बेटी को कृष्ण का मुख न देखने की सीख दी। गोवर्धन पूजा के दौरान गोपी ने गिरिराज पर्वत उठाए कृष्ण के दर्शन किए तो उसे मां की सीख पर अमल करने पर पश्चाताप हुआ। वह रोने लगी और मन में कृष्ण से इस अपराध के लिए क्षमा मांगने लगी।

कृष्ण ने गोपी के इस दुख को कम करते हुए अगले जन्म में अपनी भक्ति का वरदान दिया। कृष्ण के वरदान का ही असर था कि गोपी ने राजस्थान के मेड़ता गांव में पिता रतनसिंह के परिवार में मीरा के रूप में जन्म लिया। मीरा का मन बचपन से ही गिरधर गोपाल में रमा था और पिता ने उनका विवाह मेवाड़ के राजा संग्राम सिंह के पुत्र भोजराज के साथ करा दिया। भोजराज की मृत्यु के बाद उनके छोटे भाई विक्रम ने राजकाज संभाला और मीरा को कष्ट दिए।

तमाम परेशानियों के बाद भी गिरिधर में मीरा की भक्ति बनी रही। विक्रम के अत्याचार बढऩे पर मीरा मेड़ता छोडक़र पहले वृंदावन और फिर वहां से द्वारिका आ गईं। गुरुवार को गिरिराज पूजन प्रसंग के मंचन के साथ ही अन्नकूट और छप्पन भोग का आयोजन होगा।

चित्र प्रतियोगिता 9 को

राजस्थान पत्रिका व बृज मण्डल के संयुक्त तत्वावधान में नौ सितंबर को रविवार सुबह साढ़े नौ बजे से दोपहर एक बजे तक अग्रसेन भवन में चित्र प्रतियोगिता का आयोजन किया जाएगा। आयोजक परिवार की दीपिका अग्रवाल ने बताया कि प्रतियोगिता तीन वर्गों में आयोजित की जाएगी। पहले वर्ग में जूनियर से दूसरी कक्षा तक के प्रतिभागी रंगभरो प्रतिस्पर्धा में भाग ले सकेंगे। तीसरी से पांचवीं कक्षा के प्रतिभागियों को ‘सेव ट्री सेव अर्थ’ विषय पर और कक्षा छह से आठ तक के प्रतिभागियों को ‘तापी रिवर’ विषय पर अपनी प्रतिभा उकेरनी होगी। प्रतियोगिता के सभी प्रतिभागियों को प्रमाण-पत्र दिए जाएंगे जबकि विजेताओं को पुरस्कृत किया जाएगा।