
DIGITEL INDIA: आदिवासी इलाका है यह, बावजूद डिजीटलाइज्ड लाइब्रेरी
सिलवासा. संघ प्रदेश दादरा नगर हवेली भले ही आदिवासी विस्तार हो, परंतु यहां राजधानी सिलवासा में वर्ष 1955 से चार भाषाओं की पुस्तकों वाला लाइब्रेरी संचालित है। डिजीटल युग के कारण देशभर के पुस्तकालयों में पाठकों की संख्या घटी है। कई लाइब्रेरी बंद हो गई, वही सिलवासा लाइब्रेरी में हिन्दी, गुजराती, मराठी, अंग्रजी भाषाओं की 22,959 पुस्तकें हो गई हैं। पुस्तकें बढऩे से बड़ी संख्या में शहर के वरिष्ठ नागरिक, प्रबुद्धवर्ग, शिक्षण संस्थाओं के विद्यार्थी, सेवानिवृत्त अधिकारी लाइब्रेरी में पढऩे के लिए आते हैं। पाठक बढऩे से पुस्तकालय का समय सवेरे 8.30 बजे से रात 8 बजे तक कर दिया है।
शिक्षा विभाग द्वारा संचालित सिलवासा केन्द्रीय लाइब्रेरी में पाठकों की संख्या को देखते हुए पुस्तकों का डिजीटलाइजेशन किया गया है। यहां औसत 150 पाठक विभिन्न पुस्तकें पढऩे के लिए आते हैं। लाइब्रेरी में कुल 6 टच स्कीन कम्प्यूटर हैं तथा पाठकों की सेवा को बेहतर बनाने के लिए इंटरनेट सेवा की सुविधा उपलब्ध है। इस पुस्तकालय में बड़े लेखकों की किताबें, धार्मिक, अंतरिक्ष ज्ञान, पर्यावरण, देश-विदेश की संस्कृति, स्वास्थ्य शिक्षा, बायोग्राफी, प्राचीन विश्व, संविधान व कानून, चारो वेदों की शब्द वेद संहिता आदि अनेक पुस्तकें सिस्टम से उपलब्ध हंैं। पुस्तकालय इंचार्ज आईसी पटेल ने बताया कि लाइबे्ररी में सबसे अधिक 9941 पुस्तकें, अंग्रेजी, 6698 पुस्तकें गुजराती, 3439 पुस्तकें हिन्दी व 2069 मराठी भाषा की पुस्तकें पाठकों को अध्ययन के लिए रखी हैं। इसके अलावा 31 विभिन्न भाषाओं में ताजा मैगजीन, अखबार, स्टोरी, खेलकूद, संस्कृति आदि पर बुक उपलब्ध कराई जाती है।
इतना ही नहीं केन्द्रीय पुस्तकालय की दादरा, नरोली, रांधा, किलवणी, दपाड़ा, आंबोली, खानवेल, दुधनी और मांदोनी में शाखाएं भी चलती हैं। इन शाखाओं पर पाठकों की मांग के अनुसार पुस्तकें उपलब्ध कराई जाती हैं। पटेल ने बताया कि सचदेव बाल उद्यान के सामने बन रही नई इमारत तैयार होते ही केन्द्रीय पुस्तकालय उसमें स्थानांतरित होगा। इसके बाद पुस्तकालय में पाठकों को ज्यादा सुविधाएं मिलने लगेगी।
Published on:
04 Nov 2019 07:46 pm
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