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86 की उम्र में डॉक्टर ऑफ साइंस

जब ८६ वर्ष की उम्र में याददाश्त भी साथ नहीं देती, तब किसी का पढ़ाई से जुड़े रहकर शोध की सबसे ऊंची डिग्री हासिल करना बड़ी बात है। मूल राजस्थान के...

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Doctor of Science at the age of 86

Doctor of Science at the age of 86

सूरत।जब ८६ वर्ष की उम्र में याददाश्त भी साथ नहीं देती, तब किसी का पढ़ाई से जुड़े रहकर शोध की सबसे ऊंची डिग्री हासिल करना बड़ी बात है। मूल राजस्थान के डॉ. धनकुमार जैन ने यह कर दिखाया है। इस उम्र में उन्होंने गणित के सूत्रों के साथ गुणा-भाग करते हुए डॉक्टर ऑफ साइंस की उपाधि हासिल की है। एकेडेमिक क्षेत्र में शोध के लिए यह अंतिम उपाधि है। डॉ. जैन ने ८१ वर्ष की उम्र में पीएचडी की उपाधि हासिल की थी। उनकी इस उपलब्धि को गोल्डन बुक ऑफ रेकड्र्स में जगह मिली है।

पेशे से गणित अध्यापक रहे डॉ. धनकुमार जैन ने ४९ वर्ष की उम्र में शिक्षक की नौकरी से स्वैच्छिक सेवानिवृत्ति ले ली थी। उसके बाद उन्होंने जैन धर्म के साहित्य का अध्ययन शुरू किया। डॉ. जैन ने बताया कि शिक्षक रहते विषय से अलग पढऩे का अवसर नहीं मिल पाता था। स्वैच्छिक सेवानिवृत्ति के बाद तय किया कि जीवन पर्यंत कुछ करते रहना है। लगन ही थी जिसने बार-बार कुछ नया करने के लिए प्रेरित किया। परिवार का सहयोग मिला तो राह आसान हो गई।

परिवार को मिलेगी प्रेरणा

डॉ. जैन के बड़े पुत्र सुनील जैन ने इन क्षणों को परिवार के लिए प्रेरणादायी बताया। उन्होंने कहा कि जब ८६ वर्ष की उम्र में पिताजी ने डॉक्टर ऑफ साइंस की उपाधि हासिल कर ली है तो अब मुझे भी पीएचडी के लिए प्रयास शुरू कर देना चाहिए। उन्होंने कहा कि कारोबार बच्चों के संभालने के बाद से ही उनके मन में भी कुछ नया करने का विचार आता रहा है। वर्ष २०१४ में जब पिता ने पीएचडी की उपाधि हासिल की, उसके बाद से ही वे भी पीएचडी करने का मन बनाए हुए हैं।

और सिलसिला आगे बढ़ा

८१ की उम्र में मिली पीएचडी से उत्साहित डॉ. जैन ने शोध की पढ़ाई की सबसे ऊंची उपाधि डॉक्टर ऑफ साइंस की उपाधि को लक्ष्य बनाया। इसके लिए भी उन्होंने अपने पसंदीदा विषय गणित को साथ रखा और जैनाचार्य नेमीचंद सिद्धांत चक्रवर्ती कृत त्रिलोकार को आधार बनाया। पंडित टोडरमल की ढूंढारी भाषा में टीका पर उन्होंने ‘मॉडर्न मैथेमेटिकल एनालिसिस ऑफ त्रिलोकसार’ विषय पर शोध कार्य शुरू किया। शनिवार को डॉ. जैन को डॉक्टर ऑफ साइंस की उपाधि दी गई।

८१ की उम्र में मिली पीएचडी की उपाधि

पेशे से गणित के शिक्षक रहे डॉ. धनकुमार जैन ने जैन धर्म के साहित्य में भी गणित के सूत्र खोज निकाले। उन्होंने डाक्टरेट करने का मन बनाया तो विषय भी गणित से ही संबंधित रखा। ‘टोडरमल कृत अर्थ शास्त्री अधिकार में निहित कर्म प्रकृति मोह का गणितीय विश्लेषण’ विषय पर शोध शुरू किया और वर्ष २०१४ में ८१ वर्ष की उम्र में पीएचडी की उपाधि हासिल की।

विनीत शर्मा.