
भूकंप के झटकों ने डाल दी दरारें
नवसारी. चिखली तहसील के कुछ गांवों में पिछले डेढ़ वर्ष से लगातार भूकंप के झटके आ रहे हैं। इन आघातों का असर सारवणी गांव की आंगणवाडी व प्राथमिक शाला पर दिखने लगा है। भवनों की दीवारों में दरारें पड़ गई हैं। दहशतभरे माहौल में दरार पड़ी दीवारों के बीच ही बच्चे पढऩे को मजबूर हैं। ग्रामीण बीते लंबे अरसे से स्कूल के नए भवन की मांग कर रहे हैं, जिसे अब तक माना नहीं गया है। उधर, गांव के हाइस्कूल में भी भूकंप की चोट साफ दिख रही है। यहां 10वीं कक्षा के वर्ग की छत को हुए नुकसान के बाद से बच्चों को दूसरे कमरे में पढ़ाया जा रहा है।
नवसारी जिले की तीन तहसीलें पिछले लंबे अरसे से लगातार भूकंप की चपेट में हैं। हालांकि रिक्टर स्केल पर उसकी तीव्रता 2 से 3 ही दर्ज होती है, लेकिन लगातार हो रही यह चोट इमारतों की नींव ही नहीं हिला रही उनके ढांचे में दरार पैदा कर रही है। जिले की चिखली, वांसदा और खेरगाम के गांवों में मकानों में दरारें पडने लगी हैं और ग्रामीण भय के साये में गुजर-बसर कर रहे हैं।
भूकंप के लगातार झटकों की चोट खाकर चिखली के सारवणी गांव की प्राथमिक शाला के भवन की दीवारों में दरारें पड़ गई हैं। इन दरारों के बीच ही शिक्षक पढ़ाने और बच्चे पढऩे को मजबूर हैं। स्कूल के समय में जब कभी भूकंप के झटके आते हैं तो बच्चे क्लास के बाहर दौड़ पड़ते हैं। कई बार बच्चों को शाला परिसर में खुले में बिठाकर पढ़ाना पड़ रहा है।
जर्जर हो रहा भवन
वर्ष 1975 के आसपास बना शाला भवन भूकंप के झटके खाकर जर्जर हो चुका है। हर दिन लोग बड़े हादसे की आशंका में परेशान रहते हैं। हाल ही में शाला का निरीक्षण करने आए जिला प्राथमिक शिक्षाधिकारी डॉ. मेहुल व्यास से मिलकर ग्रामीणों ने नया भवन बनाने की मांग की थी। बताया गया कि नए भवन निर्माण में दानदाता परिवार की जिद आड़े आ रही है। दानदाता परिवार का कहना है कि यह भवन पिता ने बनवाया था, इसलिए उसे तोड़ा नहीं जाना चाहिए। इससे ग्रामीणों में रोष है और उन्होंने शिक्षा विभाग से हस्तक्षेप करने की मांग की है।
आंगनबाडी भी खस्ताहाल
प्राथमिक शाला के समीप बनी आंगनबाडी भी खस्ताहाल हो चुकी है। भूकंप के झटकों के कारण इसकी दीवारों में पड़ी दरारें खंडहर भवन का सा अहसास कराती हैं। रखरखाव के अभाव में आंगनबाडी की खिडकियां भी लटक गई हैं और दरवाजा टूटा हुआ है। ग्रामीण आंगनबाडी भवन के रिनोवेशन की मांग भी कर रहे हैं।
हाइस्कूल भवन पर भी भूकंप का असर
गांव में कुछ दिनों पूर्व अलसुबह आए भूकंप के कारण गांव के हाइस्कूल भवन पर भी चोट पड़ी है। भवन के पहले मंजले पर 10वीं के एक वर्ग की छत का कुछ हिस्सा गिर गया। हालांकि इस हादसे में कोई जनहानी नहीं हुई थी, लेकिन भूकंप की तीव्रता इतनी तेज थी कि छत के अंदर की सलाखें भी निकल आईं। वर्ष 1978 में बना हाइस्कूल भवन जर्जर हो चुका है और जगह-जगह से खस्ताहाल हो गया है। ऐसे हाल में ग्रामीण अपने बच्चों की सुरक्षा को लेकर चिंतित हैं और भवन के पुनर्निर्माण की मांग कर रहे हैं।
लगातार भूकंप की यह हो सकती है वजह
नवसारी के चिखली, वांसदा व खेरगाम तहसील के गांवों में लगातार आ रहे भूकंप के झटकों के पीछे कई वजह हो सकती हैं। पर्यावरण मामलों के विशेषज्ञ डॉ. जयेश नायक के मुताबिक अरब साग से ४०६ किमी लंबी सूरत फॉल्ट लाइन नवसारी के बीलीमोरा से होते हुए सापूतारा और वहां से महाराष्ट्र के नासिक तक जाती है। इस कारण भूगर्भीय हलचल होने से भूकंप के झटके आ सकते हैं। वर्ष 2005 में सिस्मोलॉजी विभाग ने वलसाड के धरमपुर और आस-पास के क्षेत्रों में अध्ययन किया तो भूगर्भ में भूकंप की कारक मानी जाने वाली रेडोन गैस मिली थी। रेडोन गैस का मिलना संकेत देता है कि भूगर्भ में लावा भी हो सकता है। भूगर्भ में प्लेटों में हो रही हलचल भी भूकंप की वजह हो सकती है।
शिक्षा अधिकारी को दी है सूचना
पिछले डेढ़ वर्ष में लगातार भूकंप के झटके आने से स्कूल भवन की दीवारों में दरार पड़ गई है। स्कूल समय के दौरान जब भी भूकंप आता है, बच्चे क्लास से बाहर भाग जाते हैं। स्थिति की जानकारी जिला शिक्षा अधिकारी को दी है।
मीना पटेल, आचार्य, सारवणी प्राथमिक शाला
प्रशासन सुध ले
भूकंप के झटकों के कारण प्राथमिक शाला व आंगनवाडी पूरी तरह जर्जर हो चुकी है। भूकंप के कारण कोई बड़ी दुर्घटना हुई तो बच्चों की जान-माल पर संकट आएगा। ऐसे में प्रशासन इसकी सुध ले और नए भवन के लिए काम करे।
बकुलेश पटेल, ग्रामीण, सारवणी
ज्यादा तीव्रता का झटका दे सकता है चोट
10वीं के वर्ग में अलसुबह भूकंप आया तो छत का एक हिस्सा टूटकर गिर गया था। जिसके बाद इस कक्षा के बच्चों को दूसरे कक्ष में बिठाना शुरू किया है। अभी तो स्थिति गंभीर नहीं है, लेकिन अधिक तीव्रता का भूकंप आया तो मुश्किल हो सकती है।
अरविंद पटेल, आचार्य, सारवणी हाईस्कूल
Published on:
17 Aug 2018 08:35 pm
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