
EDUCATION DEPT : सरकारी कॉलेजों में समान मूल्यांकन प्रणाली के प्रयास
सूरत.
शिक्षा विभाग ने राज्य के सभी विश्वविद्यालयों के सरकारी कॉलेजों में एक समान आंतरिक परीक्षा का फैसला किया है। शिक्षा विभाग ने मूल्यांकन का प्रारूप जारी कर दिया है। सभी सरकारी कॉलेजों को इस प्रारूप के अनुसार परीक्षा आयोजित कर आंतरिक मू्ल्यांकन करने का आदेश दिया गया है।
शिक्षा विभाग ने राज्य के सभी विश्वविद्यालयों में एक समान शैक्षणिक कैलेंडर का पालन करने का निर्देश शैक्षणिक सत्र शुरू होते ही जारी कर दिया था। इसके अनुसार सभी विश्वविद्यालय से संबंद्धित महाविद्यालयों में एक ही समय प्रवेश, एक समय पर परीक्षा और एक ही समय पर वेकेशन तथा अन्य छुट्टियों का नियम लागू किया गया है। अब शिक्षा विभाग ने राज्य के सभी सरकारी कॉलेजों में एक समान आंतरिक मूल्यांकन प्रणाली को लागू करने का फैसला किया है। इसके अनुसार कॉमर्स, साइंस, आट्र्स और लॉ के अलावा अन्य महाविद्यालयों में एक समान आंतरिक परीक्षा का मूल्यांकन किया जाएगा।
प्रति सप्ताह एक परीक्षा
सरकारी महाविद्यालयों को प्रति सप्ताह एक परीक्षा आयोजित करनी होगी। साथ ही, एक सेमेस्टर में दो परीक्षाएं लेनी होंगी। इसके लिए विद्यार्थी को 10 में से अंक दिए जाएंगे। प्रति सेमेस्टर एक एमसीक्यू या ऑनलाइन परीक्षा लेनी होगी। इसके लिए 5 अंकों में से विद्यार्थियों का मूल्यांकन होगा। प्रति सेमेस्टर विद्यार्थी से चार एसाइनमेंट्स लेने होगे, जिसका 10 अंकों का मूल्यांकन होगा। कक्षा में उपस्थिति के 5 अंक होंगे। इस तरह 30 अंकों में से विद्यार्थियों का मूल्यांकन कर आंतरिक अंक देने होंगे। सभी कॉलेजों को इसी शैक्षणिक सत्र से आदेश का पालन करने को कहा गया है।
सूरत में हुआ विरोध
सूरत के सरकारी डिग्री इंजीनियङ्क्षरग कॉलेज में इस आदेश का पालन शुरू किया गया था। कॉलेज प्रशासन ने इंजीनियिरिंग के विद्यार्थियों की प्रति सप्ताह परीक्षा लेने की घोषणा की। जैसे ही इस सूचना को नोटिस बोर्ड पर लगाया गया, विद्यार्थियों ने हंगामा शुरू कर दिया। विद्यार्थियों का आक्रोश देख कॉलेज प्रशासन ने इस आदेश को वापस ले लिया।
प्राध्यापकों के कार्यभार की जानकारी मांगी गई
राज्य के अनुदानित महाविद्यालयों ने कार्यभार कम होने की जानकारी देकर शिक्षा विभाग से कई प्राध्यापकों को सरप्लस करने की मांग की है। शिक्षा विभाग के अनुसार कई महाविद्यालय कार्यभार कम होने का बहाना बना रहे हैं। इसलिए महाविद्यालयों के प्राध्यापकों के कार्यभार की जानकारी मांगी गई थी। वहीं, ज्यादातर महाविद्यालयों ने जानकारी नहीं दी। शिक्षा विभाग महाविद्यालयों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई करने के मूड में है। सभी महाविद्यालयों को जल्द से जल्द कार्यभार की जानकारी देने का आदेश दिया गया है। महाविद्यालयों को विषय के साथ पिछले तीन साल का कार्यभार की जानकारी देनी होगी। मान्य हुई कक्षा, मान्य विषय, विद्यार्थियों की संख्या, कार्यभार के आधार पर सरप्लस हुए शिक्षकों की संख्या सहित कई अन्य जानकारी सात दिनों के अंदर शिक्षा विभाग को भेजने का आदेश दिया है। शिक्षा विभाग ने जानकारी नहीं देने पर महाविद्यालयों के प्राचार्य का वेतन रोकने की चेतावनी दी गई है।
Published on:
13 Aug 2018 07:22 pm
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