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महिला पार्षद और पति का तीन दिन का रिमांड मंजूर

अवैध निर्माण का डिमोलिशन नहीं होने देने और निर्माण को मंजूरी दिलवाने के लिए पांच लाख रुपए की रिश्वत लेने के आरोप में गिरफ्तार भाजपा की महिला पार्षद...

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Female councilor and husband remand for three days

Female councilor and husband remand for three days

सूरत।अवैध निर्माण का डिमोलिशन नहीं होने देने और निर्माण को मंजूरी दिलवाने के लिए पांच लाख रुपए की रिश्वत लेने के आरोप में गिरफ्तार भाजपा की महिला पार्षद और उसके पति समेत तीन अभियुक्तों को कोर्ट में पेश करने पर कोर्ट ने दम्पती का तीन का रिमांड मंजूर किया। तीसरे अभियुक्त को न्यायिक हिरासत में भेजने का आदेश दिया गया।

भ्रष्टाचार निरोधक ब्यूरो के सहायक पुलिस आयुक्त आर.एस.पटेल ने बताया कि गुरुवार रात पांच लाख रुपए की रिश्वत लेते हुए महिला पार्षद के पति दिनेश राठौड़ और हरेश वाघमशी नाम के युवक को गिरफ्तार किया गया था। बाद में महिला पार्षद मीना राठौड़ को भी गिरफ्तार कर लिया गया। शुक्रवार को तीनों को कोर्ट में पेश किया गया। जांच अधिकारी ने पूछताछ के लिए अभियुक्तों की पुलिस हिरासत जरूरी बताते हुए सात दिन का रिमांड मंजूर करने की मांग की।

कोर्ट ने पार्षद मीना राठौड़ और दिनेश राठौड़ का तीन दिन का रिमांड मंजूर किया, जबकि हरेश वाघमशी को न्यायिक हिरासत में भेजने का आदेश दिया। गौरतलब है कि पार्षद मीना राठौड़ के पति दिनेश राठौड़ ने एक स्कूल के अवैध निर्माण का डिमोलिशन नहीं होने देने और निर्माण को मंजूरी दिलवाने के लिए पांच लाख रुपए की रिश्वत की मांग की थी। इसकी शिकायत मिलने पर गुरुवार रात ब्यूरो की टीम ने जाल बिछाया और देवध रोड से दिनेश राठौड़ तथा उसके साथी हरेश वाघमशी को पांच लाख रुपए की रिश्वत लेते हुए धर दबोचा।

सर्च के दौरान कुछ हाथ नहीं लगा

एसीपी आर.एस.पटेल ने बताया कि पांच लाख रुपए की रिश्वत लेते हुए पकड़े जाने के बाद महिला पार्षद के मकान में सर्च में कुछ खास हाथ नहीं लगा है। रिमांड के दौरान संपत्ति के बारे में पति-पत्नी से पूछताछ की जाएगी।

लोगों ने पटाखे फोड़े

पांच लाख रुपए की रिश्वत के मामले में महिला पार्षद और उसके पति की गिरफ्तारी के बाद गोडादरा क्षेत्र के कई लोग उनके घर के निकट जमा हो गए। कुछ लोगों ने पटाखे भी फोड़े। लोगों के बीच चर्चा थी कि क्षेत्र में जहां कहीं अवैध निर्माण होता था, पार्षद पति वहां पहुंच जाता था। वह निर्माण कार्य कर रहे व्यक्ति को अपना विजिटिंग कार्ड देकर मिलने के लिए बुलाता था। फिर निर्माण के हिसाब से घूस की राशि तय करता था। वह लोगों से कहता था कि मैं पचास हजार रुपए से कम तो लेता ही नहीं हूं।