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गुजरात में फेफेड़ों का पहला दान सूरत से

195 मिनट में बैंगलुरू ले जाकर किया ट्रांसप्लांट

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गुजरात में फेफेड़ों का पहला दान सूरत से

सूरत. गुजरात में पहली बार फेफड़ों का दान सूरत से किया गया है। सूरत के ब्रेन डेड युवक के फेफड़ों को 195 मिनट में 1293 किमी दूर बैंगलुरू ले जाकर ट्रांसप्लांट किया गया। इसके अलावा ह्रदय, किडनी, लीवर और चक्षुओं का भी दान किया गया, जिन्हें अलग-अलग मरीजों में ट्रांसप्लांट किया गया।


पालनपुर-कैनाल रोड पर राजहंस विंग्स निवासी व्रजेश नवीनचंद्र शाह आइ.टी. ट्रेनिंग अकादमी चलाता था। 42 वर्षीय व्रजेश को 12 मई को अचानत तबीयत बिगडऩे पर गंभीर हालत में निजी अस्पताल में भर्ती किया गया। जांच के पता चला कि उसके दिमाग की नस फट गई है। तीन दिन के उपचार के बाद भी हालत में कोई सुधार नहीं हुआ। 15 मई को चिकित्सकों ने उसे ब्रेन डेड घोषित कर दिया। डोनेट लाइफ संस्था के प्रमुख नीलेश मांडलेवाला ने परिजनों को अंगदान का महत्व समझाया। परिजनों की ओर से मंजूरी मिलने के बाद व्रजेश के फेफड़े, हृदय, किडनी, लीवर और चक्षुओं का दान स्वीकारा गया। गुजरात या मुंबई में फेफड़े के ट्रांसप्लांट का कोई मरीज नहीं होने के कारण फेफड़े सूरत से 1293 किमी दूर बैंगलुरू ले जाए गए। वहां अशोक चौधरी नाम के मरीज में इन्हें ट्रांसप्लांट किया गया। हृदय को मुंबई ले जाकर सूरत निवासी प्रकाश शांतिलाल शाह में ट्रांसप्लांट किया गया। एक किडनी अहमदाबाद के यशपालसिंह माटीएडा (20) और दूसरी कमलेश नारण सोंलकी में ट्रांसप्लांट की गई। लीवर का ट्रांसप्लांट ऊंझा की इन्दू पटेल (47) में किया गया।