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चार इंच के पत्थर ने रोकी थी पानी की राह

खुली मेंटिनेंस टीम की पोल, चार इंच की पाइपलाइन में फंसा था पत्थर

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सूरत

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Vineet Sharma

Oct 20, 2018

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सूरत. बीते करीब 20 दिनों से पूणा की शिवशक्ति सोसायटी में पानी की समस्या का समाधान आखिरकार निकल ही आया। पानी की पाइपलाइन में फंसे चार इंच के पत्थर सोसायटी में पानी आपूर्ति की राह का रोड़ा बना हुआ था। बीते तीन दिनों से जहां पानी आपूर्ति पूरी तरह ठप थी, मनपा की टीम भी सोसायटी में डेरा डाले हुए थी।

पिछले करीब 20 दिनों से पुणा क्षेत्र की शिवशक्ति सोसायटी में तो स्थिति बेहद खराब थी। लोगों को जरूरतभर का पानी नहीं मिल रहा था। पानी की जो आपूर्ति हो भी रही, अनियमित थी जिससे लोगों को परेशानी हो रही थी। बीते तीन दिनों से तो सोसायटी में पानी की आपूर्ति पूरी तरह ठप हो गई थी। जैसे ही यह जानकारी अधिकारियों तक पहुंची पूरी टीम मौके पर डेरा डाल इसकी वजह जानने में जुटी हुई थी। खामी ढूंढने के लिए अधिकारियों ने पांच जगह पर पंक्चर कर खड्डे खोद दिए लेकिन मामला समझ नहीं आया था कि आखिर पानी घरों तक पहुंच क्यों नहीं रहा है?

पाइपलाइन की जांच के दौरान शनिवार को मेन लाइन से सोसायटी में जा रही चार इंच की पाइपलाइन में चार इंच का पत्थर फंसा हुआ मिला। इस पत्थर ने पानी आपूर्ति के अटकने की वजह तो सामने रख दी, लेकिन पाइप लाइनों की मेंटिनेंस के तरीके पर सवाल खड़े कर दिए। मौके पर मौजूद अधिकारियों के मुताबिक मेंटिनेंस के दौरान यह पत्थर कहीं रह गया होगा या फिर पानी की टंकी में से आपूर्ति हो रही पाइपलाइन में आ गया। जब यह बड़ी पाइपलाइन में फंसा तो पानी का प्रेशर प्रभावित हुआ और जब सोसायटी की पाइपलाइन में आकर फंसा तो लाइन चोक हो गई।

पहले फंसा था कबूतर

ऐसा नहीं है कि पाइपलाइन में कुछ फंसने का मामला बना हो। इस बार चार इंच का पत्थर चार इंच की पाइपलाइन में फंस गया और पाइपलाइन चोक हो गई। पूर्व में भी ऐसा मामला बना है, जब पानी की टंकी में कबूतर फंस गया था और उसका शव पाइपलाइन में बह गया था। उस वक्त भी मेंटिनेंस के तौर-तरीके पर सवाल उठे थे।

लापरवाही ने बढ़ाई लोगों की मुश्किल

सोसायटी में रह रहे लोगों ने इस स्थिति के लिए मनपा प्रशासन को जिम्मेदार ठहराया। उन्होंने कहा कि समय रहते अधिकारियों ने उनकी शिकायत को गंभीरता से लिया होता तो लंबे समय तक यह स्थिति बनी नहीं रहती। शुरू में जोन दफ्तर और हाइड्रोलिक विभाग के अधिकारी अपनी जिम्मेदारी एक-दूसरे पर टालते रहे थे। जब पानी की आपूर्ति पूरी तरह ठप हो गई तब अधिकारियों की नींद टूटी।

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