
'God, Guru, know the true nature of religion'
सूरत।मैं शरीर हूं या आत्मा, ऐसा सोचना संशय है। आत्मा के ज्ञान से अनभिज्ञ रहना संशय है। मनुष्य जीवन दुर्लभ है, इसे व्यर्थ नहीं गंवाना है। एक क्षण का सत्संग भी अनन्त पुण्य लाभ का कारण बन सकता है। अपनी आत्मा का हित करना है तो स्वयं को पहचानें। उपरोक्त उद्गार पंडित प्रदीप झांझरी ने शनिवार को परवत पाटिया के मॉडलटाउन में श्रीचंद्रप्रभु दिगम्बर जैन मंदिर के पास प्रांगण में प्रवचन के दौरान व्यक्त किए। झांझरी ने बताया कि मुनियों द्वारा पालन किए जाने वाले समता भाव को गृहस्थ अगर अंशमात्र भी पालन करता है तो उसका जीवन सफल हो सकता है।
निजात्म कल्याण आध्यात्मिक शिविर के दूसरे सत्र में डॉ. संजीवकुमार गोधा ने अपने संबोधन में कहा कि गुण-दोष का भेद करें और किस मार्ग पर जाना है व किस मार्ग पर नहीं जाना, दोनों को समझें ताकि गलत मार्ग पर नहीं भटका जा सके। देव, गुरु , धर्म के सच्चे स्वरूप को जानना ही सम्यग् ज्ञान है। पं. सुमतप्रकाश खनियांधाना ने संस्कृति के बारे में अपने विचार पंडाल में प्रकट किए। वहीं रात में डॉ. हुक्मीचंद भारिल्ल ने अपने में अपनापन विषय पर प्रकाश डालते हुए बताया कि स्वयं की बात स्वयं के कल्याण के लिए सोचें।
भगवद्भक्ति भगवान के लिए नहीं करनी है, बल्कि खुद के लिए भी करनी है। दीवान ब्रदर्स के संजय दीवान ने बताया कि रविवार दोपहर दो बजे से शाम पांच बजे तक जैन दर्शन की दृष्टि में विश्व...विषय पर प्रवचन होगा। इसके अलावा दैनिक कार्यक्रम व समयसार विधान के आयोजन भी होंगे।
एक क्षण का सत्संग भी अनन्त पुण्य लाभ का कारण बन सकता है। अपनी आत्मा का हित करना है तो स्वयं को पहचानें। उपरोक्त उद्गार पंडित प्रदीप झांझरी ने शनिवार को परवत पाटिया के मॉडलटाउन में श्रीचंद्रप्रभु दिगम्बर जैन मंदिर के पास प्रांगण में प्रवचन के दौरान व्यक्त किए। झांझरी ने बताया कि मुनियों द्वारा पालन किए जाने वाले समता भाव को गृहस्थ अगर अंशमात्र भी पालन करता है तो उसका जीवन सफल हो सकता है।
Published on:
24 May 2018 10:22 pm
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