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GOOD NEWS: कोरोना मरीज का ऑक्सीजन लेवल सुधरा, सीआरपी भी घटी

80-90 साल पुरानी इस थेरपी का सूरत के एक कोविड केयर सेंटर में प्रयोग, मरीजों में देखने को मिली अप्रत्याशित सुधार दर

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GOOD NEWS: कोरोना मरीज का ऑक्सीजन लेवल सुधरा, सीआरपी भी घटी

GOOD NEWS: कोरोना मरीज का ऑक्सीजन लेवल सुधरा, सीआरपी भी घटी

सूरत. ओ2 से ओ3 बनाकर कोरोना मरीजों को दिए जाने भर से उनका नीचे गया ऑक्सीजन लेवल वापस ऊपर की ओर आ जाता है और सीआरपी में भारी गिरावट आती है। युरोपीय देशों की 80-90 साल पुरानी इस एक्टिव ऑक्सीजन थेरपी का प्रयोग सूरत के गोपुत्र मित्र मंडल संचालित नमो कोविड केयर सेंटर में कुछ कोरोना संक्रमितों पर किया गया है और उनमें तेजी से स्वास्थ्य सुधार देखने को मिला है।
कोरोना की दूसरी लहर देशभर में भयानक कहर बरपा रही है और हर शहर-कस्बे में कोरोना मरीज ऑक्सीजन की कमी से तड़प रहे हैं और सरकार, प्रशासन सब बेबस-लाचार है। ऐसे विकट हालात में प्राणवायु के समान एक्टिव ऑक्सीजन थेरपी सूरत में फिलहाल बड़े ही सुक्ष्म रूप में सामने आई है और इस थेरपी के बड़े व सुखद परिणाम भी महज दो-तीन दिन में ही देखने को मिल रहे हैं। फिलहाल इस एक्टिव ऑक्सीजन थेरपी का प्रयोग शहर के परवत कम्युनिटी हॉल में संचालित नमो कोविड केयर सेंटर में घटते ऑक्सीजन लेवल व बढ़ती सीआरपी की वजह से वेंटिलेटर पर जाने वाले पांच-सात मरीजों पर विशेष रूप से किया जा रहा है और थेरपी लेने से इन सभी के स्वास्थ्य में अप्रत्याशित सुधार है। सेंटर संचालन में अहम भूमिका निभा रहे सूरत महानगरपालिका की स्लम इम्प्रूवमेंट कमेटी के चेयरमैन दिनेश राजपुरोहित बताते हैं कि फिलहाल यह थेरपी प्राथमिक स्तर पर उपयोग में ली जा रही है। इसके बेहतर परिणाम भी दिख रहे हैं और अच्छे परिणाम मिलने का इंतजार ह,ै ताकि निकट भविष्य में इसका उपयोग मनपा संचालित अन्य सेंटर व होस्पीटल में किया जा सकें।

-थोड़ी मुश्किल भी है इसमें

एक्टिव ऑक्सीजन थेरपी में विज्ञान के दृष्टिकोण से कुछ शारीरिक दिक्कतें भी है जो जल्दी से स्पष्ट नहीं हो पाती है, लेकिन इसके उपयोग में जो बड़ी परेशानी है वह यह है कि ओ2 से ओ3 बनने के 15 से 20 मिनट तक ही इसका उपयोग मरीज में किया जा सकता है अन्यथा बाद में ओ3 वापस ओ2 में बदल जाता है। इस थेरपी का उपयोग कर रहे डॉ. धर्मप्रकाश दूधरेजिया ने बताया कि एक्टिव ऑक्सीजन थेरपी का लाइव प्रयोग ही संभव है अर्थात जहां सेंटर है वहीं पर इसे बनाकर तत्काल सीरियस मरीज को चढ़ाया जाए, इसे बनाकर अन्य जगह ले जाना संभव नहीं है। ओ2 से ओ3 बनाने में महंगे ऑक्सीजन जनरेटर की जरूरत होती है, जिसका निर्माण फिलहाल भारत में नहीं है।

-सेंटर में मरीजों में यह दिखा सुधार

ऑक्सीजन लेवल की कमी और सीआरपी में अधिकता की वजह से वेंटिलेटर पर जाने को बेबस कोरोना मरीज को ओजोन-3 ट्रीटमेंट दिए जाने के बाद उसका ऑक्सीजन लेवल 80 से 95 तक पहुंचा और सीआरपी 148 से घटकर 10 तक रह गई। डॉ. दूधरेजिया बताते हैं कि ओजोन-3 ट्रीटमेंट शरीर की अंदरुनी कमजोरी दूर कर एंटी एजिंग, ऑटो इम्यून व इंस्टंट पावर बढ़ाता है तथा बॉडी डिटॉक्स कर बॉडी सेल को रिज्येनाइल करता है। युरोपीय देशों में इस थेरपी का उपयोग होता है, भारत में अभी यह नई समान है। उन्होंने गुजरात के सुरेंद्रनगर में पिछले कोरोना काल में साढ़े तीन हजार से अधिक मरीजों का इसी थेरपी से उपचार किया था।

-पहले होती थी उपयोग

एक्टिव ऑक्सीजन थेरपी 30-40 साल पहले तक युरोपीय व अन्य देशों में उपयोग ली जाती थी। पैशेंट को स्टेबल करने के लिए थेरपी उपयोगी तो है, लेकिन इसके साइड इफेक्ट भी कई है और ऑर्गन पर असर करती है। कम ही संजोग में गंभीर मरीज पर इस थेरपी का उपयोग किया जाता है।
डॉ. मोहित साहनी, प्रेसिडेंट, नेशनल नियानेटोलॉजी फॉरम गुजरात शाखा

-चार मरीज स्वस्थ होकर घर लौटे

एक्टिव ऑक्सीजन थेरपी से इस सेंटर पर अभी 15 जनों को ट्रीटमेंट दिया जा रहा है और चार जने स्वस्थ होकर घर लौट चुके हैं। इस थेरपी का उपयोग क्रिटिकल पैशेंट को स्टेबल करने के लिए पहले किया जाता है। यह थेरपी निकट भविष्य में काफी उपयोगी साबित हो सकती है।
डॉ. धर्मप्रकाश दूधरेजिया, सुरेंद्रनगर

-पहले से बेहतर होने लगा महसूस

तीन दिन पहले जब सेंटर पर मुझे लाया गया था तब मेरी बेहद गंभीर हालत थी। लेकिन जब से ओजोन-3 का ट्रीटमेंट मुझे मिल रहा है तब से मैं लगातार बेहतर महसूस कर रही हूं। पहले जैसे ऑक्सीजन लेने में दिक्कत नहीं हो रही और पल्स भी बेहतर है।
लक्ष्मी वैष्णव, सेंटर में उपचाराधीन मरीज

-क्या है यह एक्टिव ऑक्सीजन थेरपी

युरोप के जर्मनी में 80-90 साल पहले जन्मी एक्टिव ऑक्सीजन थेरपी में मरीज का ऑक्सीजन लेवल बढ़ाने व सीआरपी अर्थात सीरिएक्टिव प्रोटीन को घटाई जाती है। ओ2 के ऑक्सीजन सिलेंडर से ओ3 अर्थात ओजोन-3 बनाई जाती है जो कि सही में प्राणवायु है। इसे बाद में ऑक्सीजन ले रहे मरीज को चढ़ाया जाता है और कुछ समय बाद मरीज का ऑक्सीजन लेवल इस थेरपी से बढ़ जाता है और सीआरपी घट जाती है, जिससे उसके जल्द स्वस्थ होने की संभावना बढ़ जाती है। भारत में यह थेरपी 6-7 साल से ही उपयोग में ली जा रही है और यहां इसका उपयोग ऑटो इम्यून डिसीज, पेन मैनेजमेंट, ब्यूटी, एंटी एजिंग, बॉडी डिटॉक्स आदि में अधिक किया जा रहा है।

-4 लीटर ऑक्सीजन सिलेंडर से 40 बोटल तैयार

कोरोना काल में यह थेरपी पूरी तरह से कारगर रही तो देशभर में ऑक्सीजन की कमी जल्द दूर होने में वक्त नहीं लगेगा और मरीजों के स्वस्थ होने में भी तेजी आएगी। विदेश से आयात एक ऑक्सीजन जनरेटर के जरिए 4 लीटर के ऑक्सीजन सिलेंडर से 40 बोटल ओजोन-3 तैयार की जा सकती है और 40 मरीजों को इसके उपचार का लाभ मिल सकता है। इसका उपचार मिलने के बाद मरीज का ऑक्सीजन कंजप्शन 50 फीसदी तक कम हो जाता है क्योंकि एक्टिव ऑक्सीजन थेरपी के बाद उसका ऑक्सीजन लेवल 80 से बढ़कर 95 तक हो जाता है, इसलिए उसकी श्वसन प्रक्रिया ऑक्सीजन सिलेंडर की मदद से बगैर दबाव बढ़ाए चलती है और उसका सीआरपी घट जाने से उसके जल्द स्वस्थ होने की संभावना भी बढ़ती जाती है।