26 जनवरी 2026,

सोमवार

Patrika LogoSwitch to English
icon

मेरी खबर

video_icon

शॉर्ट्स

epaper_icon

ई-पेपर

सूरत

SURAT VIDEO NEWS : दादी ने कहा बच्चों की जिद के आगे मजबूर थी, माताजी ने लाज रख ली

- गोडादरा में परिजन कर रहे लखन के घर लौटने का इंतजार

Google source verification

सूरत. माताजी के दर्शन करने के लिए अठवालाइन्स अंबाजी मंदिर गई थी। लखन, करण और अंजलि तीनों में मेरे साथ थे। मेरा डुमस जाने का कोई इरादा नहीं था। यह कहते हुए लखन की दादी सविता देवीपूजक की आंखों से छलक आए। उन्होंने पत्रिका को आपबीती सुनाते हुए कहा कि शुक्रवार को भादरवीं पूनम थी। इस दिन माताजी के दर्शन का विशेष महत्व होने के कारण वह बच्चों को लेकर मंदिर गई थी।

वहां दर्शन के बाद बच्चों ने डुमस घूमने की जिद की। पहले तो मैनें उन्हें मना किया लेकिन फिर उनकी जिद के आगे मजबूर हो गई। उन्हें लेकर डुमस चली गई। वहां बीच पर नहाते समय लखन और करण गहरे पानी में चले गए। करण को तो लोगों ने निकाल लिया लेकिन लखन नहीं मिला। मैंने लखन के पिता व चाचा को फोन कर बुलाया।

इस हादसे के लिए खुद को जिम्मेदार मानते हुए लगातार माताजी से प्रार्थना कर रही थी कि किसी तरह मेरे लखन को बचा ले। आखिर माताजी ने मेरी लाज रख ली। अभी लखन अस्पताल में है और उसके पिता भी उसके साथ हैं। हम सभी को उसके घर लौटने का इंतजार हैं।

दिनभर तलाश के बाद उम्मीद टूट गई थी

पाटण जिले के हारिज के मूल निवासी लखन के पिता विकास व चाचा प्रकाश देवीपूजक ने बताया कि शु्क्रवार को अंधेरा होने तक पुलिस व दमकल की मदद से तलाश की लेकिन कुछ पता नहीं चला तो हमारी उम्मीद टूट गई। देर रात घर लौटे और किसी तरह से रात गुजारी। शनिवार सुबह 4 बजे ही डुमस के लिए रवाना हो गए दिनभर तलाश के बाद उसके जिंदा बचने की उम्मीद तो नहीं थी, उसके शव की तलाश कर रहे थे।

शाम को पुलिस वालों ने बताया कि लखन सकुशल मिल गया है तो एक उम्मीद जगी, लेकिन यकीन कर पाना मुश्किल था। पुलिस वालों ने तुंरत उससे बात नहीं करवाई। उन्होंने कहा कि वह समुद्र में हैं, वहां कोई मोबाइल नेटवर्क नहीं है। उसे नवसारी लाया जा रहा है। देर रात हम नवसारी पहुंचे और सही सलामत देख कर जान में जान आई।

कैसे 24 घंटे तक समुद्र के बीच रहा होगा

लखन की मां चंदा आठ माह गर्भ से है। वह शुक्रवार को घर पर ही थी। लखन के डूबने की खबर मिलने के बाद से वह लगातार प्रार्थना कर रही थी। उन्होंने बताया कि मेरा लखन बहुत छोटा है, अभी छठी कक्षा में पढ़ता है। पता नहीं कैसे वह 24 घंटे तक समुद्र बीचों बीच रहा होगा। जहां कहीं कुछ नजर नहीं आता और बड़े बड़ों की हिम्मत जवाब दे जाती है। जिन लोगों ने उसे बचाया उनका बहुत बहुत आभार।