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प्रवासी शिक्षक फिर बनेंगे विद्यार्थियों की नैया के खिवैया

- प्रवासी शिक्षक योजना समाप्त करने का शिक्षा पर पड़ा था असर- गुजरात काउंसिल ऑफ सेकेन्डरी एज्यूकेशन को बार-बार बढ़ानी पड़ी थी प्रवासी शिक्षक सेवा योजना की अवधि

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प्रवासी शिक्षक फिर बनेंगे विद्यार्थियों की नैया के खिवैया

सूरत.

नए शैक्षणिक सत्र में सरकार फिर से प्रवासी शिक्षकों के सहारे ही विद्यार्थियों को पढ़ाएगी। स्कूलों में प्रवासी शिक्षक सेवा योजना समाप्त करने से शिक्षा पर गहरा असर पड़ा था। स्कूलों में हो रही परेशानी के कारण गुजरात काउंसिल ऑफ सेकन्डरी एज्यूकेशन ने राज्य के सभी जिला शिक्षा अधिकारियों को प्रवासी शिक्षकों को नियुक्त करने को हरी झंडी दे दी है।
राज्य के सरकारी और अनुदानित स्कूलों में शिक्षकों के रिक्त पदों के कारण विद्यार्थियों की शिक्षा पर असर पड़ता रहा है। गुजरात काउंसिल ऑफ सेकेन्डरी एज्यूकेशन बोर्ड ने राष्ट्रीय माध्यमिक शिक्षा अभियान के अंतर्गत प्रवासी शिक्षकों की योजना शुरू की। स्कूलों को प्रवासी शिक्षक नियुक्त करने होंगे। प्रति कक्षा के अनुसार शिक्षकों को शिक्षा विभाग की ओर से वेतन देना तय किया गया। यह योजना दो साल के लिए लागू की गई थी। गुजरात बोर्ड ने 20 दिसम्बर 2017 से इस योजना को बंद कर दिया था।
इधर, नियमित शिक्षकों की संख्या कम होने तथा प्रवासी शिक्षकों को हटाने से स्कूलों में विद्यार्थियों की पढ़ाई पर असर पडऩे लगा। इसके बाद गुजरात बोर्ड ने पुन: इस योजना की अवधि को बढ़ा दी थी। 20 जनवरी 2018 तक स्कूलों को प्रवासी शिक्षकों की सेवा का लाभ लेने की छूट दी गई थी। इसके बाद इस योजना को बंद कर दिया जाना था। नए शैक्षणिक सत्र में अध्यापकों के सभी रिक्त स्थानों को भरना था। जो नहीं हो सका। सोमवार से राज्य में नया शैक्षणिक सत्र 2018-19 शुरू हो गया और सभी प्राथमिक, माध्यमिक और उच्चतर माध्यमिक स्कूल खुल गए। सरकारी और अनुदानित स्कूलों में रिक्त पड़े शिक्षकों के स्थान पर किसी की भी नियुक्ति नहीं की गई। सरकार ने पढ़ाई बाधित नहीं हो, इसके लिए पुन: प्रवासी शिक्षक योजना लागू कर दी है। सभी स्कूलों को प्रवासी शिक्षक नियुक्त करने की मंजूरी दे दी गई है। साथ ही मंजूर किए पदों की सूची भी जारी कर दी गई है। योजना के तहत मार्च 2019 तक प्रवासी शिक्षकों को स्कूल में नियुक्त करने की सरकार ने मंजूरी प्रदान की है।