
Heavy fall in banana prices
नर्मदा।देश भर में ट्रांसपोर्टरों की हड़ताल शुक्रवार देर शाम समाप्त तो हो गई, लेकिन इसका असर नर्मदा जिले में भी देखने को मिला था। ट्रांसपोर्टरों की राष्ट्रव्यापी हड़ताल से नर्मदा जिले में केले की खेती करने वाले किसानों के माथे पर चिंता की लकीरें झलक रही है। तैयार फसल कट कर खेत में पड़ी थी, लेकिन ट्रांसपोर्टरों की हड़ताल की वजह से व्यापारी फसल खरीदने को राजी नहीं हो रहा था जिस कारण फसल के खराब होने का खतरा मंडराने लगा था।
आदिवासी बाहुल्य नर्मदा जिले में कोई बड़ी इंडस्ट्री व रोजगार का कोई साधन नहीं होने से यहां खेती ही एक बड़ा व्यवसाय है। यहां ज्यादातर गन्ना और केले ही मुख्य फसल है। हाल केले क ा सीजन चल रहा है। गुजरात में गौरी व्रत के साथ राजस्थान में सावन माह का शुरुआत शनिवार से हो गया। ट्रांसपोर्ट हड़ताल का विपरीत असर केला की खेती करने वाले किसानो पर भी पड़ा। नर्मदा जिला केले की फसल के लिए हब माना जाता है व नर्मदा नदी के किनारे पकने वाले केले की विदेशों में भारी मांग भी रहती है। इस कारण यहां से केले की सबसे ज्यादा निकासी होती है। इसके साथ ही साथ ५० प्रतिशत केला राजस्थान, दिल्ली, हरियाणा व पंजाब की ओर भेजा जाता है। हड़ताल के विपरीत असर के कारण बाहर के राज्यों के व्यापारी केला खरीदने से बचते रहे जिस कारण स्थानीय व्यापारी भी किसानों के पास से फसल खरीदना बंद कर दिए थे, जिससे किसानों को काफी नुकसान हुआ।
स्थानीय केला के व्यापारी पिंकल काछिया ने कहा कि राष्ट्रव्यापी ट्रांसपोर्ट हड़ताल से ट्रकों का आना जाना बंद हो गया था जिससे किसानो के पास से माल खरीदा भी जाता तो उसे भेजा कहा जाए। सामने वाले व्यापारी भी माल खरीदने से बचते रहे। केले की निकासी बाहरी राज्यों में होती है, वहीं हड़ताल से सब कारोबार ठप हो गया था। हड़ताल समाप्त होने से अब कुछ दिन बाद सुधार होगा।
किसानों को हुआ नुकसान
किसान जीतू भाई पटेल ने कहा कि खेत में केले की फसल तैयार हो चुकी है और केला व्यापारी को बेचने के लिए किसान तैयार है, मगर हड़ताल के कारण व्यापारी केला नहीं खरीद रहे थे। हड़ताल खत्म नहीं होने पर सब्जियों के साथ केले की फसल को भारी नुकसान हुआ, जिसका असर किसानों पर पड़ा।
व्यापारी केला खरीदने को तैयार नहीं
स्थानीय किसान गोपाल वसावा ने कहा कि इन दिनों चल रहे गौरीव्रत में केले की काफी मांग रहती है और इस माह में २० किलो केले का दाम २०० से ३०० रुपए मिलता था। ट्रांसपोर्ट हड़ताल से केला १०० रुपए में लेने के लिए भी व्यापारी तैयार नहीं हो रहा था। पूरा माल रोड पर फेंकने वाली स्थिति बन रही थी, मगर हड़ताल समाप्त होने से यह स्थिति नहीं हो पाई जिससे राहत मिली।
Published on:
09 Aug 2018 10:53 pm
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