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एचआईवी मरीजों में सूरत प्रदेश में टॉप पर

शहर में अब तक एड्स के तीस हजार मरीज एआरटी सेन्टर में नामांकित हो चुके हंै। इसमें सिर्फ दस हजार मरीज ही हर माह दवा लेने सेन्टर पर आते हैं। गुजरात में ल

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HIV patients in top of Surat state

HIV patients in top of Surat state

सूरत।शहर में अब तक एड्स के तीस हजार मरीज एआरटी सेन्टर में नामांकित हो चुके हंै। इसमें सिर्फ दस हजार मरीज ही हर माह दवा लेने सेन्टर पर आते हैं। गुजरात में लगभग चालीस हजार एचआईवी मरीजों के साथ सूरत शहर राज्य में टॉप पर है। एक दिसम्बर को मेरा स्वास्थ्य, मेरा अधिकार थीम के साथ विश्व एड्स दिवस मनाया जाएगा।


एचआईवी और एड्स विशेषज्ञ डॉ. केतन राणपरीया दो दिसम्बर को नानपुरा समृद्धि हॉल में एचआईवी के मरीजों पर हुए रिसर्च को लेकर इंडियन मेडिकल एसोसिएशन और फैमिली फिजीशियन एसोसिएशन के चिकित्सकों से संवाद करेंगे।

जबकि एक दिसम्बर को अठवागेट एमटीबी कॉलेज से सुबह सात बजे एचआईवी के मरीजों के प्रति जागरुकता के लिए आईएमए, एफपीए और जिंदगी फाउंडेशन की ओर से रैली निकाली जाएगी। डॉ. रानपरीया ने बताया कि साउथ अफ्रीका में 71 लाख, नाइजीरिया में 32 लाख के बाद सबसे अधिक 21 लाख मरीज भारत में हैं। इसमें सिर्फ 11 लाख मरीज ही एचआईवी का इलाज करवा रहे हंै। भारत में प्रत्येक एक हजार लोगों में तीन व्यक्ति एचआईवीग्रस्त हैं।

वर्ष २०१६ में ६२ हजार लोगों की मौत एचआईवी से हुई और ८० हजार लोगों को एचआईवी का संक्रमण सामने आया। महाराष्ट्र में सबसे अधिक तीन लाख एचआईवी पीडि़त हैं। सिर्फ गुजरात की बात करें तो एक लाख ६६ हजार एचआईवी मरीजों के साथ गुजरात चौथे नम्बर पर है। गुजरात में प्रत्येक दस हजार व्यक्तियों में ४२ जनों को एचआईवी है। पिछले छह माह में सरकारी संस्थानों में सूरत में 1100, अहमदाबाद में 1200, वडोदरा में 800, नडिय़ाद में 500 और हिम्मतनगर में ४०० केस दर्ज किए गए हंै।

देश में मरीज घटे, सूरत में बढ़े

एचआईवी और एड्स विशेषज्ञ डॉ. केतन राणपरीया ने बताया कि देश में एचआईवी की समस्या घटी है, लेकिन सूरत और गुजरात में मरीजों की संख्या बढ़ी है। सिर्फ सरकारी योजनाओं से एचआईवी पर काबू नहीं पाया जा सकता है। शहर के प्रत्येक डॉक्टर, मेडिकल स्टाफ, सामान्य नागरिक, एचआईवी पीडि़त, वकील, राजनेताओं को जागरुकता के लिए प्रयास करने होंगे। सूरत में हीरा, कपड़ा बाजार में कार्यरत सौराष्ट्र, उत्तरप्रदेश, बिहार, झारखंड और ओडिसा से आए लोग बड़ी संख्या में हैं।

यह लोग परिवार और जीवनसाथी से दूर रहते हंै। ऐसे लोग शारीरिक संबंध बनाने के दौरान सावधानी नहीं बरतते हंै और एचआईवी का शिकार हो जाते हंै। ९० फीसदी मामलों में सुरक्षित यौन संबंध नहीं होने से एचआईवी के केस सामने आते हैं। इसके अलावा इंजेक्शन लेने में सावधानी बरतने, ब्लड बैंक से एचआईवी की जांच के बाद ही रक्त यूनिट लेने की सलाह चिकित्सकों ने दी है।

‘दोस्त’ में बताएंगे जीवन की बात

सूरत. न्यू सिविल अस्पताल के मानसिक रोग विभाग में एक दिसम्बर एड्स दिवस पर दोस्त सेन्टर पर विशेष कार्यक्रम आयोजित होगा। इसमें जो मरीज अच्छे हो गए हैं वे अपने जीवन की बात करेंगे। इसके अलावा पोस्टर और विभिन्न प्रतियोगिताओं का भी आयोजन होगा।

मानसिक रोग विभाग के असिस्टेन्ट प्रोफेसर डॉ. कमलेश दवे ने बताया कि न्यू सिविल अस्पताल में छह साल से दोस्त सेन्टर कार्यरत हैं। यहां व्यसन मुक्ति केन्द्र भी चलाया जाता है। दोस्त सेन्टर की नोडल ऑफिसर और मानसिक रोग विभाग की एचओडी डॉ. ऋतंभरा मेहता शुक्रवार को व्यसन मुक्ति के उपचार बताएंगी। सूरत मेडिकल कॉलेज डीन डॉ. जयेश ब्रह्मभट्ट और एडिशनल मेडिकल सुप्रिटेन्डेंट डॉ. जयमीन कॉन्ट्रक्टर भी मौजूद रहेंगे।

एसटीडी क्लीनिक को अवार्ड

न्यू सिविल अस्पताल अधीक्षक डॉ. एमके वाडेल ने बताया कि अस्पताल के एसटीडी क्लीनिक को इस वर्ष एड्स नियंत्रण में अच्छा कार्य करने के लिए स्वास्थ्य और परिवार कल्याण विभाग द्वारा राज्य स्तरीय अवार्ड दिया जाएगा। अच्छा कार्य करने के लिए क्लीनिक को वर्ष २००९ से लगातार अवार्ड मिल रहा है।