सूरत. एथर इंडस्ट्रिज में लगी भीषण आग के समय लापता हुए श्रमिकों के परिजनों की उम्मीद उस समय टूट गई जब गुरुवार तडक़े प्लांट से सात नरकंकाल बरामद हुए। हादसे का शिकार हुए एक श्रमिक तो दो दिन पहले गांव से लौटा था। हादसे का शिकार हुए श्रमिक सनथ मिश्रा के परिचितों ने बताया कि वह उसके लापता होने की खबर से हम परेशान थे। वह तीन साल से एथर में काम कर रहे थे।
उनकी तीन व एक साल की दो छोटी बच्चियां है। हादसे के बाद सुबह वह घर नहीं लौटे तो उनकी पत्नी परेशान हो गई। हम उनकी पत्नी के साथ प्लांट पर गए, लेकिन हमें अंदर नही जाने दिया गया। काफी पूछताछ के बाद पता चला कि वह काम पर आया था। हादसे के बाद से ही अन्य चार-पांच श्रमिकों के साथ वह भी लापता है। आग बुझाने के बाद हम सनथ की पत्नी को लेकर सुबह चार बजे प्लांट पर गए, तब वहां नरकंकाल बरामद हुए।
हम अधिक देर तक नहीं रुक पाए। सनथ की पत्नी यह सब देख कर बेहोश हो गई। हादसे का शिकार हुए एक अन्य श्रमिक संतोष विश्वकर्मा के भतीजे अनिल विश्वकर्मा ने बताया कि मैंने ही उन्हें एथर में काम पर रखवाया था। संतोष अपने पुत्र के साथ किराए के कमरे में रहते थे। उनके पुत्र से आग लगने की खबर मिलने पर मैं उसके साथ मौके पर पहुंचा। हमें उस वक्त कुछ पता नहीं चल पाया। बाद में उनकी मौत के बारे में पता चला। सुनिल वर्मा के परिचितों ने बताया कि वह उत्तरप्रदेश का मूल निवासी है। दीपावली की छुट्टियों में गांव गया था। दो पहले ही गांव से लौटा था। उसकी परिजन अभी तक गांव में ही हैं।
00 परिजन नहीं कर पाए शिनाख्त
मलबे से कंकाल मिलने पर पुलिस ने रात के अंधेरे में ही परिजनों को शिनाख्त के लिए बुलाया था। कुछ को प्लांट में बुलाया गया तो कुछ को न्यू सिविल अस्पताल के पोस्टमार्टम रूम पर बुलाया गया। शरीर के नाम पर सिर्फ हडिड्यों का ढांचा ही बचा होने के कारण वे श्रमिक की पुख्ता शिनाख्त नहीं करवाए। पुलिस ने बताया कि मृतकों का डीएनए टेस्ट करवाया जाएगा।
00 प्लांट व पोस्टमार्टम रूम पर कड़ा पहरा
हादसे के बाद से एथर इंडिस्ट्रज के प्लांट को घेर कर उस पर पहरा बिठा दिया गया था। पुलिस के साथ प्लांट के निजी सुरक्षाकर्मी भी तैनात थे। मीडियाकर्मियों को भी अंदर जाकर घटना स्थल का जायजा नहीं लेने दिया गया। पोस्टमार्टम रू पर पुलिस का पहरा था। वहां कंपनी के कुछ लोग भी मौजूद थे, जो शायद मृतकों के परिजनों को मुआवजा नहीं मिलने का डर दिखा मीडिया से खुलकर बात करने से रोक रहे थे।
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