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मलबे में दो जिन्दगियां घुटने के बाद ठेकेदार पर कसा शिकंजा

सूरत के घोड़दौड़ रोड पर अवैध निर्माण के दौरान ढही छत, दो श्रमिक की गई जान....  

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सूरत

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Sunil Mishra

Feb 22, 2018

surat news

सूरत. शहर के अठवा जोन स्थित घोड़दौड़ रोड इलाके में बीती रात आदर्श पछात वर्ग सोसायटी के पास भरभरा कर ढही निर्माणाधीन बिल्डिंग में अवैध तरीके से छत पर स्लैब डालने का काम हो रहा था। इसी दौरान छत का बड़ा हिस्सा ढह गया और उसमें दबने से दो श्रमिकों की मौत हो गई। मामले में पुलिस ने सख्ती बरतते हुए ठेकेदार दीपक शाह के खिलाफ गंभीर धाराओं में मुकदमा दर्ज किया। करीब दस टन के वजनी स्लैब की चपेट में आने से मनोज देशमुख (30) और गणेश माकोड़ो (40) की मौत हो गईं, वहीं तीसरे श्रमिक नवागांव डिंडोली निवासी पर्वत नागले (36) को बचा लिया गया। नागले का न्यू सिविल अस्पताल में उपचार जारी है। इससे पहले तड़के करीब साढ़े तीन बजे तक राहत और बचाव के कार्य के बाद दोनों श्रमिकों के क्षत-विक्षत शव मलबे से निकाले गए, जिन्हें पोस्मार्टम के लिए सिविल अस्पताल में पहुंचाया गया।

कब थमेंगे अवैध निर्माण, लगातार ले रहे जान

शहर में महानगरपालिका की नाक के नीचे सैकड़ों अवैध निर्माण बेधड़क चल रहे हैं। इनको लेकर कई जागरूक लोग शिकायतें भी दर्ज कराते हैं, पर संबंधित जिम्मेदार अधिकारी और कर्मचारी लापरवाही बरतते हैं और हादसे के बाद चेतते हैं। इस मामले में भी भवन निर्माता ने निर्माण की कोई मंजूरी नहीं ली और गलत तरीके से निर्माण का प्रयास किया। शहर के सबसे पॉश इलाके में खुलेआम हो रहे इस निर्माण पर महानगरपालिका के किसी भी कार्मिक की नजर तक नहीं पड़ी।

नहीं तो घट जाता बड़ा हादसा...

हादसे में बचे श्रमिक पर्वत नागले ने बताया कि छत पर स्लैब डालने का काम करने के लिए १८ श्रमिक मौके पर मौजूद थे। शाम करीब सवा सात बजे काम पूरा होने पर सभी श्रमिक वहां से निकल गए, पर आगे के काम को देखने के लिए पर्वत और हताहत हुह दोनों श्रमिक गणेश और मनोज वहां रूक गए। इस दौरान ठेकेदार और मकान मालिक बाहर की तरह बातें कर रहे थे। इसी दौरान यकायक छत के चरमराने की आवाज सुनी। दौड़कर देखा तो कुछ दिन पहले लगाए गए बीम से आवाज आ रही थी। वह गिर नहीं जाए इसलिए फटाफट उसको सपोर्ट लगाया, लेकिन आवाज और तेज हो गई। इसी दौरन भरभरा के छत गिर गई और हम तीनों उसकी चपेट में आ गए। कुछ देर की तेज आवाज के बाद सन्नाटा हुआ तो अहसास हुआ कि किसी भारी भरकम चीज के नीचे दबा हूं। आंखों के सामने अंधेरा छा गया। करीब पौन घंटे तक मदद को चिल्लाता रहा। बाद में किसी ने मेरी आवाज सुनी और बड़ी मुश्किल से बाहर निकाला। मैं सीढिय़ों के बीच में था इसलिए बच गया। नागले ने बताया कि यही हादसा कुछ समय पहले घटता तो अनर्थ हो जाता।