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डिजिटल युग में प्रिंट मीडिया की बढ़ी चुनौतियां

स्वतंत्रता और जवाबदारी में संतुलन जरूरी: मिहिरवर्धनराष्ट्रीय पत्रकारिता दिवस पर कार्यक्रम आयोजित

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सूरत

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Sunil Mishra

Nov 16, 2018

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डिजिटल युग में प्रिंट मीडिया की बढ़ी चुनौतियां


दमण. लोकतंत्र में मीडिया को जितनी स्वतंत्रता होती है, उतनी ही जवाबदारी भी होती है। स्वतंत्रता और जवाबदारी का संतुलन बनाए रखना चाहिए। सूचना एवं प्रचार विभाग के सचिव मिहिरवर्धन ने यह बात राष्ट्रीय पत्रकारिता दिवस पर आयोजित कार्यक्रम में कही। कलक्टर भवन के सभागार में आयोजित कार्यक्रम का शुभारंभ सूचना एवं प्रचार विभाग के सचिव मिहिरवर्धन, सूचना एवं प्रचार अधिकारी हरमिन्दर ङ्क्षसह सहित पत्रकारों ने दीप प्रज्ज्वलित कर किया। मिहिरवर्धन ने कहा कि पत्रकार अपने कर्तव्य के साथ जवाबदारी भी पूरी करे। समाज को पत्रकारों से सही जानकारी को लेकर बहुत आशा रहती है। प्रेस पर सरकारी नियंत्रण भी कम होना चाहिए।

चुनौतियों के साथ प्रेस को अच्छा कार्य भी करना है
उपसचिव हरमिन्दर ङ्क्षसह ने कहा कि इन्टरनेट के युग में सरलता के साथ चुनौतियां भी बढ़ी हंै। विभिन्न चुनौतियों के साथ प्रेस को अच्छा कार्य भी करना है। डिजिटल युग में पत्रकारिता आचार संहिता पर प्रदीप भावसार ने कहा कि आज के समय स्मार्टफोन के चलते हर कोई अपने आपको पत्रकार समझता है और ऐेसे मेें सही जानकारी देने की जवाबदारी बढ़ गई है। स्मार्टफोन और सोशल मीडिया के लोगों के लिए कोई आचार संहिता नहीं है परन्तु वास्तविक मीडिया के लिए आचार संहिता लगी रहती है। मुकेश गोसावी ने कहा कि प्रिंट मीडिया के लिए भी चुनौतियां बढ़ गई हंै। डिजिटल के साथ सरलता बढ़ी है परन्तु उसके साथ वास्तविक समाचार के लिए चुनौतियां बढ़ गई है। कार्यक्रम में निलेश जोशी, केयूर, मणीलाल पार, तुषार चौहान सहित अन्य सदस्यों ने भी विचार रखे। राष्ट्रीय पत्रकार दिवस पर प्रशासन की ओर से स्मृति चिन्ह देकर सम्मानित किया गया।

आज का बालक कल का भारत: डॉ. पिन्टो
वापी. सेन्ट जेवियर्स स्कूल में बाल दिवस मनाया गया। इस मौके रायन इंटरनेशनल के अध्यक्ष डॉ. एएफ पिन्टो ने देश के प्रथम प्रधानमंत्री जवाहरलाल नेहरू के बयान का उद्धरण करते हुए कहा कि आज के बच्चे ही कल के भारत का निर्माण करेंगे। यह दिन हमें याद दिलाकर यह सुनिश्चित करता है कि बचपन बच्चों के जीवन की स्वर्णावधि है और उन्हें इसका आनंद लेने दें। डॉ. पिन्टो के अनुसार पंडित नेहरू को यह भलीभांति पता था कि हमारे देश का भविष्य बच्चों पर निर्भर है इसलिए प्रधानमंत्री के रूप में बच्चों को सुरक्षित और स्नेहिल माहौल देने का कार्य किया गया और इसीलिए उन्हें चाचा नेहरू कहा जाता है। पंडित जवाहरलाल ने भारत में बच्चों को नि:शुल्क अनिवार्य प्राथमिक शिक्षा देने के लिए पांच साल की योजनाओं में प्रतिबद्धता रेखांकित की और आइआइटी तथा आइआइएम व एम्स जैसे प्रतिष्ठित संस्थानों की स्थापना की। उन्होंने छात्रों से जिम्मेदार नागरिक बनकर देश को प्रगति और समृद्धि के रास्ते पर ले जाने का आह्वान किया।