
भंगार एकत्र कर रहा भारत का भविष्य
सिलवासा. जिन बच्चों के हाथों में पुस्तकें, पट्टी, चॉक व स्कूल बैग होना चाहिए, परिजनों ने उनके कंधों पर भंगार एकत्र करने के लिए थैला थमा दिया है। इसमें वे टूटी-फूटी बोतलें, प्लास्टिक सहित भंगार का अन्य सामान एकत्र करते दिख रहे हैं। अन्य राज्यों से आकर रह रहे परिवारों के बच्चे भंगार, प्लास्टिक की थैलियां, कांच व लौहखंड के टुकड़े एकत्र करने के कार्य में लगे हैं। शहर और औद्योगिक इलाकों में कचरा बीनते बच्चों को देखा जा सकता है।
भंगार अड्डों पर जमा प्लास्टिक, स्टील, घर का टूटा सामान, अखबार, लोहे का सामान, टूटे कांच आदि सामान बीनने वालों में मध्यप्रदेश, महाराष्ट्र, गुजरात, राजस्थान आदि प्रांतों से आए घुमक्कड़ लोग ज्यादा हैं। गरीबी के चलते परिजन अपने बच्चों को चाय-टपरी व भंगार एकत्र करने के काम पर लगा देते हैं। यह बच्चे सुबह से सायंं तक गलियों में घूम-फिरकर भंंगार बटोरने के लिए किस्मत का दोष मानते हैैं। प्रदेश में 302 आंगनवाडिय़ां चल रही हैं, लेकिन आयु एवं निवास प्रमाण पत्र के अभाव में इन बच्चों को न आंगनवाडिय़ों में प्रवेश मिलता हैं और न ही स्कूलों में। प्र्रवासी होने केे कारण इन बच्चों के पास निवास का प्रमाण पत्र नहीं है। सर्र्व शिक्षा अभियान की पोल खलते यह बच्चे गरीबी से अभिशप्त हंैै। इन्हेंं न तो पहनने को पूरे कपड़़े मिलते हैैं, औैर न ही भोजन। इनमे ज्यादातर बच्चे कुुपोषण का शिकार हंैै। पेेट की अग्नि शांंत करने केे लिए कचरा बीनना या दूसरे काम करना इनकी किस्मत बन चुकी हंैै। औैद्योगिक इकाइयों केे कारण भंंगार व्यवसायियों का धंंधा फल-फूूल रहा हैं, वहीं मासूूम बच्चे इनकेे शिकार बने हैैं। यह बच्चे इतने डरे हुए हैं कि कुछ भी बोलने को तैयार नहीं दिखते हैं। इनकी आंखों मेें मासूमियत झलक रही है। ऐसे परिवार औद्योगिक विस्तारों में प्लास्टिक के टेंट लगाकर रहते हैं। आमली, पिपरिया, डोकमर्डी, रोहितवास, चाणददेवी रोड पर मासूमों को कचरा बीनते देखा जा सकता है। अफसोस की बात है कि बच्चों को भंगार इकट्ठा करने के लिए परिजनों की और से दबाव डाला जाता हैं। इससे कई बच्चे बाद में अपराध में संलिप्त हो जाते हैं।
दीपावली पर उद्योगों से निकलता है भंगार
उद्योगपति दीपावली पर सफाई के दौरान बड़ी मात्रा में भंगार, टूटे उपकरण, अपशिष्ट, लौहखंड, बेकार सामान्य को भंगार के रूप में बाहर निकालते हैं। इस भंगार पर कारोबारियों की नजर रहती है। भंगार खरीदने के लिए कारोबारी मुंबई, अहमदाबाद व पड़ोसी राज्यों से चले आते हैं।
Published on:
26 Oct 2018 06:40 pm
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