
सूरत में अंगदान से इंदौर की महिला को फेफड़े और अहमदाबाद के व्यक्ति को मिला लीवर
सूरत.
कामरेज निवासी एक व्यक्ति के ब्रेनडेड होने के बाद परिवार ने अंगदान का निर्णय किया। जिससे इंदौर निवासी महिला को चैन्नई के एमजीएम अस्पताल में ट्रांसप्लांट किए गए। महिला को कोरोना हुआ था और फेफड़े खराब होने के कारण 76 दिनों से एकमो पर थी। वहीं, लीवर अहमदाबाद के व्यक्ति में ट्रांसप्लांट किया गया। जिससे उसे नया जीवन मिला है।
कामरेज पसोदरा पाटिया खोलवड रोड ओपेरा प्रिन्स निवासी मनसुख झीणा काथरोटिया (35) की 2 अगस्त की रात अचानक तबीयत खराब हुई। परिजन उनको कामरेज के स्टार अस्पताल में लेकर गए। चिकित्सकों ने ब्रेनस्ट्रॉक और लकवा का असर बताया। इसके बाद परिजन उनको लाल दरवाजा स्थित विनस अस्पताल न्यूरोफिजिशियन डॉ. राकेश भारोडिया के पास ले आए। लेकिन मनसुख की हालत बिगड़ती चली गई।
चिकित्सकों ने 6 अगस्त को उन्हें ब्रेनडेड घोषित किया। अस्पताल से सूचना मिलने पर डोनेट लाइफ के प्रमुख निलेश मांडलेवाला ने परिवार को अंगदान के बारे में बताया। सहमति मिलने पर मांडलेवाला ने स्टेट ऑर्गन एंड टिश्यू ट्रांसप्लांट ऑर्गेनाइजेशन (एसओटीटीओ) के कन्विनर डॉ. प्रांजल मोदी से सम्पर्क किया और फेफड़े, किडनी तथा लीवर दान की जानकारी दी। इसके बाद किडनी और लीवर अहमदाबाद के इंस्टिच्यूट ऑफ किडनी डिजीज एंड रिसर्च सेंटर को दी गई। जबकि एनओटीटीओ द्वारा फेफड़े चैन्नई के एमजीएम अस्पताल को डोनेट किए गए। वहीं, चक्षुओं का दान लोकदृष्टि चक्षुबैंक के दिनेश जोगाणी ने स्वीकार किया। इंदौर निवासी 51 वर्षीय महिला को चैन्नई की एमजीएम अस्पताल में डॉ. बालाकृष्णन की टीम ने फेफड़े ट्रांसप्लांट किए।
महिला की कोरोना के कारण फेफडे खराब हो गए थे। वह 76 दिनों से इंदौर में वेंटिलेटर सपोर्ट पर थी। वहीं, लीवर का ट्रांसप्लांट अहमदाबाद निवासी 54 वर्षीय व्यक्ति में आइकेडीआरसी में डॉ. प्रांजल मोदी, डॉ. वैभव सुतरिया की टीम ने ट्रांसप्लांट किया। इसके अलावा दान में मिली किडनी में रक्त की गांठ जमने के कारण दोनों किडनी खराब हो गई जिससे उसका ट्रांसप्लांट नहीं हुआ।
हीरा निकला हीरा कारीगर
गौरतलब है कि मनसुख रत्न कलाकार के तौर पर किरण एक्सपोर्ट में नौकरी करता था। उसके परिवार में पत्नी रीटा, पुत्र ध्रुव (13) और पुत्री खुशी (3) है। वह मूल अमरेली जिले की धारी तहसील के महादेवपुरा चलाला गांव का निवासी था। उनके इस अंगदान से हर वर्ग को प्रेरणा मिलेगी।
सूरत से चैन्नई 1610 किमी 160 मिनट में तय की
सूरत के विनस अस्पताल से फेफड़े को चैन्नई पहुंचाने के लिए सूरत एयरपोर्ट तक ग्रीन कॉरिडोर बनाया गया था। सूरत से चैन्नई 1610 किमी की दूरी हवाई यात्रा से 160 मिनट में तय की गई है। सूरत से अहमदाबाद 267 किमी की दूरी लीवर, किडनी को पहुंचाने के लिए सडक़ मार्ग पर ग्रीन कॉरिडोर बनाया गया था। ग्रीन कॉरिडोर बनाने में सूरत शहर, ग्रामीण के अलावा अलग-अलग जिलों की पुलिस ने अंगदान को अहमदाबाद जल्दी पहुंचाने में मदद की।
बीते एक साल में 102 को नया जीवन
कोरोना महामारी के चलते देश में अंगदान के मामलों में कमी आई है। वहीं, सूरत से डोनेट लाइफ द्वारा पिछले एक साल में 36 किडनी, 20 लीवर, 8 हृदय, 12 फेफड़े, 1 पेन्क्रीयाज और 34 चक्षुओं समेत कुल 111 अंगों का दान लेकर 102 जनों को ट्रांसप्लांट से नया जीवन मिला है। सूरत और दक्षिण गुजरात से डोनेट लाइफ के द्वारा अब तक 369 किडनी, 165 लीवर, 8 पेन्क्रीयाज, 34 हृदय, 16 फेफड़े, और 298 चक्षुओं समेत कुल 915 अंगों का दान लेकर 840 जनों का ट्रांसप्लांट के बाद नई जिंदगी मिली है।
Published on:
09 Aug 2021 09:53 pm
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